Prayagraj Flood 2026: संगम नगरी में उफान पर गंगा-यमुना, दारागंज की झोपड़ियों में घुसा बाढ़ का पानी, निचली बस्तियां जलमग्न
गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ने से दारागंज की निचली बस्तियां जलमग्न, प्रशासन अलर्ट
Prayagraj Flood 2026: संगम नगरी प्रयागराज में मानसून की सक्रियता के साथ ही गंगा और यमुना नदियों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। दोनों नदियों के उफान के कारण दारागंज समेत प्रयागराज की विभिन्न निचली बस्तियों में जलभराव की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। दारागंज के तटीय इलाकों में बनी झोपड़ियों और कच्चे मकानों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाने से दर्जनों गरीब परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रभावित लोग अपने मासूम बच्चों, मवेशियों और जरूरी घरेलू सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं।
यद्यपि वर्तमान में गंगा और यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे बना हुआ है, लेकिन ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश के चलते जलस्तर में हो रही वृद्धि ने तटीय निवासियों की नींद उड़ा दी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है तथा संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ राहत चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है।
दारागंज की निचली बस्तियों में जलभराव से जीवन अस्त-व्यस्त
गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर का सबसे प्रत्यक्ष और गंभीर प्रभाव दारागंज क्षेत्र की निचली बस्तियों पर देखने को मिल रहा है। कई झोपड़ियां पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं, जबकि पक्के मकानों के निचले हिस्सों में घुटनों तक पानी भर गया है। अचानक बढ़े पानी के कारण लोगों को अपना सामान सुरक्षित निकालने का पर्याप्त समय भी नहीं मिल सका। बर्तन, कपड़े और खाने-पीने का अनाज पानी में भीग जाने से परिवारों के सामने गुजर-बसर का संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर मानसून में उन्हें इस प्रकार की प्राकृतिक विभीषिका का सामना करना पड़ता है। पानी जमा होने के कारण क्षेत्र में गंदगी फैल रही है, जिससे संक्रामक बीमारियों और मच्छर जनित रोगों के प्रसार की आशंका बढ़ गई है। प्रभावित लोग अपने रिश्तेदारों के यहां या पास के ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हुए कई परिवार
आशियाना पानी में डूब जाने के बाद कई परिवारों के पास सिर छिपाने की जगह नहीं बची है। प्रभावित नागरिक खुले आसमान के नीचे या अस्थाई तिरपाल तानकर दिन और रात गुजारने को विवश हैं। विशेष रूप से छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं।
प्रभावित बस्तियों के लोगों ने स्थानीय प्रशासन से तत्काल राशन, पीने का साफ पानी और अस्थाई आश्रय स्थल (शेल्टर होम) उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है। यद्यपि कुछ स्थानीय समाजसेवी संस्थाओं ने सूखा राशन और भोजन के पैकेट बांटना शुरू किया है, लेकिन बड़े पैमाने पर राहत कार्य संचालित करने के लिए व्यापक सरकारी सहायता की दरकार है।
दशाश्वमेध घाट की सीढ़ियां डूबीं, श्रद्धालुओं और दुकानदारों की बढ़ी परेशानी
नदियों के उफान का असर प्रयागराज के धार्मिक और सांस्कृतिक ताने-बाने पर भी पड़ा है। दारागंज स्थित प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट की अधिकांश सीढ़ियां गंगा जी के जल में जलमग्न हो चुकी हैं। इसके बावजूद संगम और आसपास के घाटों पर श्रद्धालुओं के पहुंचने और स्नान करने का क्रम जारी है।
प्रशासनिक टीम ने घाटों पर लाउडस्पीकर के माध्यम से चेतावनी जारी करते हुए श्रद्धालुओं से गहरे पानी में न जाने की सख्त अपील की है। जलस्तर बढ़ने के कारण घाट किनारे स्थित पुजारियों के तख्त, पूजा-सामग्री की दुकानें और अन्य छोटे कारोबारियों को अपना सामान पीछे हटाना पड़ा है, जिससे उनके दैनिक रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
अलर्ट मोड पर जिला प्रशासन, राहत चौकियां और निगरानी टीम सक्रिय
प्रयागराज जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग नदियों के जलस्तर पर 24 घंटे बारीक नजर रखे हुए हैं। जिलाधिकारी के निर्देशों के बाद सभी तटीय इलाकों में बाढ़ नियंत्रण कक्ष और राहत चौकियों को क्रियाशील कर दिया गया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यदि जलस्तर में और बढ़ोतरी होती है तो तटीय इलाकों के निवासियों को सुरक्षित राहत शिविरों में स्थानांतरित करने की पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे नदियों के पास जाने से बचें और सोशल मीडिया पर फैलने वाली किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें।
Prayagraj Flood 2026: मानसून का रुख और बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान
मौसम विभाग के अनुसार, गंगा और यमुना के ऊपरी मैदानी इलाकों व पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही वर्षा के कारण नदियों का जलस्तर अभी कुछ दिनों तक और बढ़ सकता है। प्रयागराज में भी रुक-रुक कर हो रही हल्की से मध्यम बारिश स्थिति को और संवेदनशील बना रही है।
स्थानीय निवासियों और विशेषज्ञों का मानना है कि प्रयागराज में हर साल आने वाली इस समस्या का केवल तात्कालिक राहत से समाधान संभव नहीं है। तटीय इलाकों को सुरक्षित करने के लिए पक्के तटबंधों (एमबेंकमेंट) का निर्माण, ड्रेनेज सिस्टम में सुधार और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में रहने वाले गरीबों के लिए पुनर्वास नीति पर दीर्घकालिक काम करने की अत्यंत आवश्यकता है।
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