PM Surya Ghar Yojana का आवेदन हुआ रिजेक्ट? इन 12 गलतियों की वजह से अटकती है सब्सिडी, जानें कैसे करें सुधार

PM Surya Ghar Yojana का आवेदन हुआ रिजेक्ट? इन 12 गलतियों की वजह से अटकती है सब्सिडी, जानें कैसे करें सुधार

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PM Surya Ghar Yojana: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत लाखों लोग अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवा चुके हैं, लेकिन इनमें से एक बड़ा तबका ऐसा भी है जिसकी सब्सिडी बीच में ही अटक जाती है। कई बार तो आवेदन पूरी तरह रिजेक्ट भी हो जाता है, और लोग समझ नहीं पाते कि आखिर गलती कहां हुई। टाटा पावर की वेबसाइट के अनुसार, इस योजना में सख्त जांच नियमों की वजह से कई अर्जियों को हरी झंडी नहीं मिल पाती।

अगर आपका भी सूर्य घर योजना का आवेदन रिजेक्ट हो चुका है, तो घबराने की जरूरत बिल्कुल नहीं है। ज्यादातर मामलों में वजह इतनी छोटी होती है कि उसे आसानी से सुधारकर दोबारा आवेदन किया जा सकता है। सोचकर देखिए, कहीं आपकी सब्सिडी भी सिर्फ एक स्पेलिंग गलती या गलत दस्तावेज की वजह से तो नहीं फंसी? आइए जानते हैं आवेदन रिजेक्ट होने के पीछे की सबसे आम वजहें और उन्हें सुधारने का तरीका।

PM Surya Ghar Yojana: वेंडर और सोलर पैनल से जुड़ी गड़बड़ियां बनती हैं बड़ी वजह

पीएम सूर्य घर योजना में सबसे ज्यादा रिजेक्शन वेंडर से जुड़ी गलतियों की वजह से होता है। अगर आपने MNRE या अपनी DISCOM के आधिकारिक पोर्टल पर रजिस्टर्ड वेंडर की जगह किसी गैर-सूचीबद्ध यानी नॉन-एम्पैनल्ड लोकल वेंडर से सोलर सिस्टम इंस्टॉल करवाया है, तो सब्सिडी जारी होने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है। इसलिए हमेशा आधिकारिक पोर्टल पर दर्ज अधिकृत वेंडर का ही चुनाव करना समझदारी है।

इसके साथ ही सोलर पैनल का मॉडल भी योजना के नियमों पर खरा उतरना जरूरी है। सरकार की ALMM यानी Approved List of Models and Manufacturers सूची में शामिल मॉडल और DCR यानी मेड इन इंडिया पैनल ही मान्य माने जाते हैं। अगर वेंडर ने लागत बचाने के चक्कर में सस्ते या गैर-प्रमाणित पैनल लगा दिए, तो कमीशनिंग रिपोर्ट सीधे खारिज हो जाती है। यह ट्विस्ट कई लोगों को पता ही नहीं होता, जिसकी वजह से मेहनत की कमाई से लगवाया गया सोलर सिस्टम भी सब्सिडी के बिना रह जाता है।

दस्तावेज और नाम में मामूली अंतर भी बन सकता है बड़ी अड़चन

आवेदन रिजेक्ट होने की एक बड़ी वजह दस्तावेजों में नाम का मेल न खाना भी है। आधार कार्ड, बिजली बिल और बैंक पासबुक में नाम की स्पेलिंग अक्षर-दर-अक्षर एक समान होनी चाहिए। थोड़ा सा भी फर्क, जैसे उपनाम का गायब होना या स्पेलिंग में मामूली बदलाव, आवेदन को रद्द कराने के लिए काफी है। जानकार बताते हैं कि यह सबसे साधारण लेकिन सबसे ज्यादा होने वाली गलती है।

गलत कंज्यूमर नंबर डालना भी एक आम समस्या है। कई बार लोग बिजली बिल पर दर्ज कंज्यूमर अकाउंट नंबर की जगह मीटर नंबर भर देते हैं, जिसे सिस्टम अमान्य कर देता है। इसी तरह बैंक खाते का गलत या पुराना IFSC कोड डालने पर सब्सिडी का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT फेल हो जाता है। इसके अलावा कमीशनिंग रिपोर्ट अपलोड करते समय धुंधली छत की फोटो, बिना सीरियल नंबर वाली पैनल फोटो या अधूरे दस्तावेज अपलोड करने से जांच टीम आवेदन को पेंडिंग में डाल देती है।

कनेक्शन और स्वीकृत भार से जुड़ी शर्तें भी हैं अहम

बिजली कनेक्शन के स्वीकृत भार यानी सैंक्शन्ड लोड से बड़ा सोलर सिस्टम लगवाना भी रिजेक्शन की एक बड़ी वजह बनता है। मामला कुछ इस तरह से है कि अगर आपके बिजली बिल पर सैंक्शन्ड लोड 2 किलोवाट दर्ज है और आपने 5 किलोवाट का सोलर प्लांट लगवा लिया, तो DISCOM की फिजिबिलिटी रिपोर्ट खारिज हो जाएगी। इसलिए सोलर सिस्टम लगवाने से पहले अपने बिजली कनेक्शन का सैंक्शन्ड लोड जरूर जांच लेना चाहिए।

पुराना बकाया बिजली बिल भी आवेदन को अटका सकता है। अगर कनेक्शन पर कोई ड्यूज बकाया है, तो DISCOM फिजिबिलिटी क्लियर नहीं करती, इसलिए आवेदन से पहले पूरा बकाया चुकाना जरूरी माना जाता है। इसके अलावा यह योजना सिर्फ आवासीय यानी रेजिडेंशियल कनेक्शन के लिए है। अगर आपका कनेक्शन कमर्शियल या एग्रीकल्चर कैटेगरी में दर्ज है, तो अर्जी सीधे खारिज हो जाएगी।

PM Surya Ghar Yojana: बैंक खाता और प्रॉपर्टी ओनरशिप की शर्तें न भूलें

सब्सिडी पाने के लिए बैंक खाते का आधार सीडिंग यानी DBT के लिए एक्टिव होना जरूरी है। अगर आपका बैंक खाता आधार से लिंक तो है, लेकिन NPCI मैपर पर DBT के लिए सक्रिय नहीं है, तो पैसा ट्रांसफर होने में दिक्कत आती है। इसे बैंक शाखा में जाकर आसानी से ठीक कराया जा सकता है।

अगर मकान एक से अधिक लोगों के नाम पर यानी ज्वाइंट प्रॉपर्टी है या पुश्तैनी संपत्ति है, तो बाकी सह-मालिकों का अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC अपलोड करना जरूरी होता है। इसके बिना ओनरशिप चेक फेल हो जाता है। इसके अलावा एक परिवार या एक मकान के लिए सिर्फ एक ही सब्सिडी मान्य होती है। अगर एक ही पते पर कई कनेक्शन दर्ज हैं, तो सिस्टम उसे डुप्लीकेट एप्लीकेशन मानकर फ्लैग कर देता है, जिससे आवेदन में देरी या रिजेक्शन दोनों हो सकते हैं।

आम आदमी के लिए यह योजना बिजली बिल से राहत का बड़ा जरिया बन सकती है, लेकिन जरा सी लापरवाही पूरी सब्सिडी को अटका सकती है। यही वजह है कि आवेदन करने से पहले वेंडर की सूची, दस्तावेजों में नाम की स्पेलिंग, बैंक डिटेल और कनेक्शन की कैटेगरी जैसी बातों की दोबारा जांच कर लेना बेहद जरूरी है। छोटी सी सावधानी बरतकर हजारों रुपये की सब्सिडी को अटकने से बचाया जा सकता है।

कुल मिलाकर, पीएम सूर्य घर योजना में आवेदन रिजेक्ट होने के पीछे ज्यादातर कारण तकनीकी या कागजी गलतियों से जुड़े होते हैं, जिन्हें थोड़ी सतर्कता से आसानी से सुधारा जा सकता है। वेंडर का सही चुनाव, दस्तावेजों में सही जानकारी और बैंक डिटेल का मिलान, इन तीन बातों का ध्यान रखने से आवेदन के स्वीकृत होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। अगर आपका आवेदन भी रुका हुआ है, तो एक बार इन सभी बिंदुओं को दोबारा जांचकर फिर से अप्लाई करना ही सबसे बेहतर तरीका होगा।

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