Pappu Yadav Protest: संसद परिसर में साधु बने पप्पू यादव, दानपेटी लेकर किया विरोध; राहुल गांधी ने डाला दान, सांकेतिक छीना-झपटी से गरमाई राजनीति

राम मंदिर चढ़ावा मामले पर संसद परिसर में पप्पू यादव का अनोखा प्रदर्शन, राहुल गांधी समेत विपक्षी नेता भी हुए शामिल।

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Pappu Yadav Protest: संसद के मानसून सत्र के दसवें दिन शुक्रवार को संसद परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शनों का एक अभूतपूर्व और बेहद अनोखा रूप देखने को मिला। बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में हुई कथित करोड़ों रुपये की हेराफेरी और गबन के मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आए। भगवा वस्त्र धारण कर और साधु का भेष बनाकर पप्पू यादव संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समीप एक दानपेटी लेकर बैठ गए। इस अनोखे राजनीतिक नाटक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई शीर्ष नेताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। राहुल गांधी ने जैसे ही दानपेटी में पैसे डाले, उसके तुरंत बाद सांसदों के बीच सांकेतिक छीना-झपटी का एक मजेदार दृश्य बना, जिसने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया।

साधु के भेष में पहुंचे पप्पू यादव और अनोखा विरोध प्रदर्शन

शुक्रवार की सुबह जैसे ही संसद की कार्यवाही शुरू होने वाली थी, सांसद पप्पू यादव गेरुआ वस्त्र पहने, माथे पर बड़ा तिलक लगाए और गले में कंठी माला डाले संसद परिसर में दाखिल हुए। उनके हाथ में एक लकड़ी की बड़ी दानपेटी थी जिस पर ‘राम मंदिर चढ़ावा चोरी विरोध’ का सांकेतिक संदेश लिखा हुआ था। परिसर में बैठकर उन्होंने सांकेतिक रूप से चंदा इकट्ठा करना शुरू कर दिया और मीडिया व साथी सांसदों के सामने राम मंदिर न्यास तथा शासन व्यवस्था पर तीखे सवाल दागे।

पप्पू यादव के इस साधु रूप को देखते ही संसद परिसर में विपक्षी सांसदों का हुजूम जमा हो गया। उनके इस प्रदर्शन में अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी, सपा सांसद डिंपल यादव और कई अन्य प्रमुख विपक्षी नेता शामिल हुए। पप्पू यादव ने इस प्रदर्शन के माध्यम से यह राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की कि जब देश की सबसे बड़ी आस्था के केंद्र राम मंदिर में चढ़ावे की सुरक्षा नहीं हो पा रही है और कथित तौर पर करोड़ों रुपये चोरी हो रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा और पारदर्शी शासन का दावा पूरी तरह खोखला साबित होता है।

राहुल गांधी की मौजूदगी और दानपेटी छीना-झपटी का पूरा घटनाक्रम

इस विरोध प्रदर्शन का सबसे चर्चित मोड़ तब आया जब कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी स्वयं पप्पू यादव के पास पहुँचे। राहुल गांधी ने मुस्कुराते हुए पप्पू यादव की दानपेटी में सांकेतिक रूप से पैसे डाले। उनके देखा-देखी कई अन्य विपक्षी सांसदों ने भी उस दानपेटी में नोट डाले। इसके ठीक बाद पप्पू यादव दानपेटी लेकर वहां से भागने का मजेदार नाटक करने लगे, जिसे देखकर पास खड़े अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद और अन्य समाजवादी पार्टी के सांसदों ने उन्हें तुरंत घेर लिया और उनसे दानपेटी छीन ली।

यह पूरा दृश्य हास्य और पैरोडी से भरपूर था, जिसे संसद परिसर में मौजूद कैमरों ने कैद कर लिया। दानपेटी छीने जाने के बाद पप्पू यादव ने मजाकिया अंदाज में मीडिया से कहा कि वे तो पैसे लेकर भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सपा के ‘जासूसों’ ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया और अब वे उन्हें ‘फांसी’ देने की बात कह रहे हैं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर कुछ ही मिनटों में वायरल हो गया। इस राजनीतिक नाटक के जरिए विपक्ष ने यह दिखाने का प्रयास किया कि मंदिर के चढ़ावे में किस तरह सुनियोजित गबन हुआ और दोषी पकड़े नहीं जा रहे हैं।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले का पूरा इतिहास और कानूनी स्थिति

विपक्ष जिस मुद्दे को लेकर संसद में आक्रामक बना हुआ है, उसकी शुरुआत जून 2026 में हुई थी। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने सबसे पहले यह गंभीर आरोप लगाया था कि अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पण किए जाने वाले नकद चंदे और कीमती धातुओं की गिनती के दौरान करोड़ों रुपये का गबन किया जा रहा है। मामले के तूल पकड़ने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक वरिष्ठ पदाधिकारी की शिकायत पर अयोध्या के रामजन्मभूमि थाने में एक आधिकारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी।

उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की संवेदनशीलता I(Pappu Yadav Protest) को देखते हुए विशेष जांच दल यानी एसआईटी (SIT) का गठन किया था। पुलिस जांच के दौरान मंदिर परिसर और गणना कक्ष से जुड़े लगभग आठ कर्मचारियों और बाहरी संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों के पास से पुलिस ने करीब 80 लाख रुपये की नकद राशि और कुछ विदेशी मुद्राएं भी बरामद की थीं। हालांकि पुलिस का दावा है कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा चुकी है और गबन की गई राशि बरामद कर ली गई है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि यह घोटाला कई सौ करोड़ रुपये का है और इसमें ट्रस्ट के बड़े अधिकारियों तथा राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों को बचाया जा रहा है।

Pappu Yadav Protest: संसद के भीतर जोरदार हंगामा और स्पीकर ओम बिरला की कड़ी चेतावनी

संसद परिसर के बाहर पप्पू यादव और राहुल गांधी के इस ड्रामे का असर सीधे तौर पर लोकसभा की कार्यवाही पर भी पड़ा। जैसे ही पूर्वाहन 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसद वेल (सदन के बीचों-बीच) में आ गए और ‘चढ़ावा चोर गद्दी छोड़’ के नारे लगाने लगे। विपक्षी सांसद राम मंदिर चढ़ावा मामले पर तत्काल कार्यस्थगन प्रस्ताव लाकर सदन में विस्तृत चर्चा की मांग कर रहे थे। इसके अलावा विपक्ष प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली, दिल्ली में छात्रों पर हुए बल प्रयोग और सदन में गृह मंत्री अमित शाह की गैर-मौजूदगी को लेकर भी सरकार पर हमलावर रहा।

हंगामे और नारेबाजी को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों को अपनी सीटों पर लौटने का कड़ा निर्देश दिया। स्पीकर ने सांसदों को चेतावनी देते हुए कहा कि संसद की गरिमा को बनाए रखना सभी सदस्यों का उत्तरदायित्व है और तख्तियां दिखाने या तमाशा करने के लिए यह मंच नहीं है। लगातार हो रहे हंगामे और शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा, जिससे विधायी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ।

विपक्ष की मांग और केंद्र व राज्य सरकार का पक्ष

इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष का तर्क है कि राम मंदिर देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की अपार श्रद्धा का केंद्र है। जब देश-विदेश से लोग अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा मंदिर में चढ़ाते हैं, तो उसकी पाई-पाई का हिसाब पारदर्शी होना चाहिए। अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि जिस अयोध्या के नाम पर सरकार सत्ता में आई, उसी अयोध्या में श्रद्धालुओं के चढ़ावे पर डाका डाला जा रहा है, इसलिए इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवारत जज की निगरानी में होनी चाहिए।

दूसरी ओर, सरकार और सत्ता पक्ष ने विपक्ष के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे केवल राजनीतिक पैंतरा और मंदिर की छवि खराब करने की साजिश करार दिया है। सत्ता पक्ष के सांसदों का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी पूरी निष्पक्षता से काम कर रही है, दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है और रिकवरी भी की गई है। सरकार का तर्क है कि जब मामला अदालत और एसआईटी के विचाराधीन है, तो इस पर संसद का समय बर्बाद करने का कोई औचित्य नहीं है।

राजनीतिक संदेश और आगामी दिशा

पप्पू यादव द्वारा किए गए इस साधु भेष वाले विरोध प्रदर्शन और उसमें राहुल गांधी की भागीदारी ने इस बात के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि विपक्ष मानसून सत्र में इस मुद्दे को इतनी आसानी से ठंडा नहीं होने देगा। संसद परिसर में प्रतीकात्मक और नाटकीय विरोध प्रदर्शनों के जरिए विपक्ष आम जनता का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल रहा है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में क्या सरकार इस मुद्दे पर सदन में किसी बहस के लिए तैयार होती है या फिर मानसून सत्र के बाकी बचे दिन भी इसी तरह के हंगामे और गतिरोध की भेंट चढ़ जाते हैं।

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