Assam Flood 2026: 80 लोगों की मौत, 2.12 लाख अब भी प्रभावित, सरकार ने 6 महीने की EMI राहत और व्यापारियों के लिए विशेष पैकेज का किया ऐलान
बाढ़ प्रभावित चार जिलों में 2.12 लाख लोग प्रभावित, सरकार ने लोन मोरेटोरियम और पुनर्वास पैकेज की घोषणा की।
Assam Flood 2026: पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख राज्य असम में कुदरत का कहर एक बार फिर तबाही बनकर बरसा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों, विशेष रूप से ऊपरी असम के जिलों में आई विनाशकारी बाढ़ से अब तक मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 80 हो गई है। असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (ASDMA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में राज्य के चार प्रमुख जिलों—चराईदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट में 2,12,400 से अधिक लोग इस त्रासदी से सीधे तौर पर प्रभावित हैं। इस गंभीर मानवीय संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित जिलों के निवासियों और व्यापारियों को सभी प्रकार के बैंक ऋणों की मासिक किस्त (EMI) चुकाने पर छह महीने का मोरेटोरियम (स्थगन) देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, बाढ़ में तबाह हुई छोटी दुकानों के पुनरुद्धार और सांस्कृतिक व धार्मिक धरोहर के रूप में जाने जाने वाले वैष्णव पूजा स्थलों ‘नामघर’ के पुनर्निर्माण के लिए विशेष वित्तीय सहायता पैकेज की घोषणा की गई है।
Assam Flood 2026: बाढ़ की विभीषिका और चार प्रमुख जिलों में वर्तमान स्थिति का ब्योरा
असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के अद्यतन बुलेटिन के अनुसार, पिछले 24 घंटों के भीतर शिवसागर जिले में बाढ़ के तेज बहाव में डूबने से दो और लोगों की असमय मौत दर्ज की गई, जिनमें एक कम उम्र का बच्चा भी शामिल है। इन नई मौतों के साथ ही इस वर्ष मानसून के दौरान असम में बाढ़ और भूस्खलन से जान गंवाने वाले नागरिकों की संख्या 80 के आंकड़े तक पहुंच गई है। वर्तमान में जो चार जिले सबसे अधिक आपदा झेल रहे हैं, उनमें चराईदेव जिला सबसे ऊपर है, जहां अकेले 80 हजार से अधिक लोग जलभराव और तबाही के बीच जीवन यापन करने को मजबूर हैं। इसके बाद शिवसागर में 71 हजार, जोरहाट में 40 हजार और गोलाघाट में लगभग 21 हजार लोग बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।
हालांकि, पिछले 48 घंटों की तुलना में जलस्तर में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को प्रभावितों का आंकड़ा 3 लाख के पार था, जो अब घटकर 2.12 लाख पर आया है। स्थानीय प्रशासन ने बेघर हुए लोगों को शरण देने के लिए 112 राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां इस समय 75,583 नागरिक आश्रय लिए हुए हैं। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने स्वयं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और शिवसागर, चराईदेव तथा जोरहाट के राहत शिविरों का दौरा कर पीड़ित परिवारों का हाल जाना। उन्होंने अधिकारियों को शिविरों में रह रही गर्भवती महिलाओं, दूध पिलाने वाली माताओं, नवजात बच्चों, बुजुर्गों और विद्यार्थियों की बुनियादी आवश्यकताओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के कड़े निर्देश दिए। राज्यपाल ने आश्वस्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह असम के जमीनी हालातों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
मुख्यमंत्री का बड़ा फैसला: लोन ईएमआई पर छह महीने की छूट और कर्ज विस्तार
बाढ़ प्रभावितों को आर्थिक रूप से उबरने का अवसर देने के लिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दिसपुर में राज्य स्तरीय बैंकर समिति (SLBC) की एक उच्चस्तरीय और विशेष बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नाबार्ड (NABARD), भारतीय स्टेट बैंक (SBI) तथा अन्य वाणिज्यिक बैंकों के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल हुए। गहन विचार-विमर्श के बाद यह सर्वसम्मत निर्णय लिया गया कि शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट के बाढ़ पीड़ितों को उनके द्वारा लिए गए सभी प्रकार के वाणिज्यिक, व्यक्तिगत, कृषि और व्यावसायिक ऋणों की ईएमआई चुकाने से छह महीने के लिए पूर्ण राहत दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बैंकों के अधिकारी जमीनी स्तर पर जाकर ग्राहकों की वास्तविक क्षति का आकलन करेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इस योजना का लाभ केवल वास्तविक बाढ़ पीड़ितों तक ही पहुंचे। उन्होंने चार जिलों के उन निवासियों से अपील की, जिनका बाढ़ से कोई नुकसान नहीं हुआ है, कि वे अपनी ईएमआई समय पर देते रहें। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्राहकों की पुनर्भुगतान क्षमता को बहाल करने के लिए उनके मौजूदा लोन की कुल अवधि को उनके कर्ज के प्रकार के आधार पर 1 साल से लेकर 7 साल तक के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है, जिससे उन पर अचानक वित्तीय बोझ न पड़े।
Assam Flood 2026: छोटे व्यापारियों और नामघरों के लिए विशेष पुनर्वास पैकेज
आपदा के कारण आजीविका गंवा चुके छोटे खुदरा व्यापारियों और दुकानदारों को दोबारा खड़ा करने के लिए सरकार ने एक अनूठी पहल की है। जिन छोटे व्यापारियों की दुकानें बाढ़ के पानी में पूरी तरह बह गई हैं या जिनका सामान नष्ट हो चुका है, उन्हें बैंक बिना किसी नए दस्तावेज, सिक्योरिटी या कोलैटरल (जमानत) के उनके मौजूदा लोन खाते में 10 हजार रुपये की अतिरिक्त क्रेडिट राशि तत्काल उपलब्ध कराएंगे। इस कार्यशील पूंजी की मदद से दुकानदार अपनी दुकानों का ढांचा और स्टॉक दोबारा शुरू कर सकेंगे।
इसके अलावा, असमिया समाज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रीढ़ माने जाने वाले वैष्णव संप्रदाय के पारंपरिक पूजा स्थलों यानी ‘नामघर’ के नुकसान की भरपाई का भी खाका तैयार किया गया है। शिवसागर और चराईदेव जिलों में बाढ़ के पानी से कई ऐतिहासिक और स्थानीय नामघर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि प्रत्येक प्रभावित नामघर के जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण के लिए 1.5 लाख रुपये की एकमुश्त अनुदान राशि प्रदान की जाएगी ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियां पुनः सामान्य हो सकें।
केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग और प्रशासनिक तत्परता
ऊपरी असम में आई इस अचानक और विनाशकारी बाढ़ को राज्य सरकार ने एक ‘असामान्य और तीव्र आपदा’ के रूप में चिह्नित किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा भेजी गई इंटर-मिनिस्ट्रियल सेंट्रल टीम (IMCT) ने हाल ही में ऊपरी असम के प्रभावित जिलों का चार दिवसीय विस्तृत दौरा पूरा किया है। राज्य सरकार ने इस केंद्रीय टीम के समक्ष राहत, बचाव और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए एक विशेष केंद्रीय सहायता पैकेज की मांग रखी है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया है कि केंद्र सरकार असम को इस आपदा से उबारने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता मंजूर करेगी।
राहत और पुनर्वास कार्यों की गति को बनाए रखने के लिए जिला प्रशासनों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। राहत शिविरों में शुद्ध पेयजल, सूखा राशन, पका हुआ भोजन, बच्चों के लिए दूध, जीवनरक्षक दवाएं और चल चिकित्सा इकाइयों (Mobile Medical Units) की निरंतर तैनाती सुनिश्चित की गई है। सरकार ने यह भी याद दिलाया कि इस वर्ष बाढ़ में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि (Ex-gratia) को बढ़ाकर 9 लाख रुपये कर दिया गया है। साथ ही, पीड़ित परिवारों को त्वरित राहत राशि वितरित करने के उद्देश्य से अनिवार्य पोस्टमार्टम रिपोर्ट की अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया गया था।
दीर्घकालिक समाधान और आजीविका बहाली की चुनौती
यद्यपि नदियों (Assam Flood 2026) का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है और बाढ़ की स्थिति में सुधार के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। पानी उतरने के साथ ही महामारी फैलने का खतरा, कृषि योग्य भूमि पर गाद जमा होना और बेघर हुए लोगों के आशियाने का पुनर्गठन एक बेहद जटिल प्रक्रिया है। मौसम विभाग द्वारा आगामी दिनों में उत्तर-पूर्वी राज्यों में पुनः मध्यम से भारी वर्षा की चेतावनी जारी किए जाने के कारण असम सरकार का जल संसाधन विभाग तटबंधों की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है।
असम में हर साल आने वाली बाढ़ केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि राज्य की पूरी सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था को पटरी से उतारने वाला वार्षिक संकट बन चुकी है। राज्य सरकार का वर्तमान फोकस केवल तात्कालिक राहत शिविर चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वित्तीय मोरेटोरियम और सीधी आर्थिक मदद के जरिए प्रभावित परिवारों की आजीविका को दोबारा पटरी पर लाना है। 6 महीने की ईएमआई राहत और छोटे कारोबारियों को कार्यशील पूंजी देने के इस कदम से निश्चित तौर पर असम के हजारों परिवारों को इस कठिन घड़ी में संभलने का एक बड़ा संबल मिलेगा।
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