Opposition Protest: काले कपड़ों में संसद पहुंचे विपक्षी सांसद, छात्र मुद्दों और कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन

छात्र मुद्दों और कथित पुलिस कार्रवाई पर विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में जताया विरोध

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Opposition Protest:  संसद परिसर में बुधवार को विपक्षी सांसदों ने काले कपड़े पहनकर जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद मकर द्वार के सामने एकजुट हुए। उन्होंने छात्रों के विभिन्न मुद्दों और मंगलवार को हुई कथित पुलिस कार्रवाई के खिलाफ सरकार पर हमला बोला। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार युवाओं की चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है और लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश कर रही है। यह प्रदर्शन नीट पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर चल रहे व्यापक आंदोलन का हिस्सा बन गया है।

मकर द्वार पर एकजुट विपक्ष

विपक्षी सांसद आज संसद पहुंचे तो काले कपड़ों में थे। उन्होंने संसद परिसर के मकर द्वार के सामने प्रदर्शन किया। कांग्रेस, सपा और टीएमसी के सांसद इस विरोध में शामिल रहे। काले कपड़ों का चुनाव मंगलवार को विपक्षी नेताओं के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई के खिलाफ अपनी नाराजगी जताने के लिए किया गया। सांसदों ने सरकार पर छात्र आंदोलनों को कुचलने का आरोप लगाया।

प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने नारेबाजी की और छात्रों के मुद्दों को प्रमुखता दी। उनका कहना था कि युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों को सरकार गंभीरता से नहीं ले रही। मकर द्वार पर हुई यह एकजुटता संसद परिसर में राजनीतिक तनाव को बढ़ाने वाली साबित हुई।

मंगलवार की घटनाओं पर विपक्ष का गुस्सा

मंगलवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेताओं को दिल्ली में हिरासत में लिया गया था। वे राजाजी मार्ग से लोक कल्याण मार्ग तक मार्च निकाल रहे थे। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। सोनिया गांधी भी मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंची थीं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई नेता इस प्रदर्शन में शामिल थे।

विपक्ष का आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बर व्यवहार किया। कांग्रेस सांसद के सुरेश ने कहा कि आज काले कपड़े पहनकर आने का मकसद कल हुई कथित बर्बर कार्रवाई के खिलाफ विरोध दर्ज कराना है। प्रियंका गांधी ने कहा कि वे डरपोक हैं और हमसे डरते हैं। हम उनसे नहीं डरते।

छात्रों के मुद्दों पर विपक्ष का हमला

विपक्षी सांसदों ने छात्रों से जुड़े कई मुद्दों को उठाया। बार-बार हो रही पेपर लीक की घटनाएं, बेरोजगारी का रिकॉर्ड स्तर और शिक्षा व्यवस्था की खराब नीतियां उनके विरोध के मुख्य आधार रहे। आरजेडी सांसद संजय यादव ने कहा कि देश में बार-बार पेपर लीक हो रहे हैं और बेरोजगारी पिछले पचास वर्षों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। सरकार की नीतियों के कारण करोड़ों छात्र और युवा बेरोजगार हैं। उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है।

विपक्ष का आरोप है कि पारदर्शिता की मांग कर रहे युवाओं पर सरकार दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बजाय आंदोलनों को दबाने की रणनीति अपनाई जा रही है। सांसदों ने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग बरकरार

विपक्ष की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शामिल है। पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय करने और छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई की जांच की भी मांग की गई। विपक्षी दल लंबे समय से इन मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं।

काले कपड़ों में प्रदर्शन को विपक्ष ने अपनी नाराजगी जताने का प्रतीकात्मक तरीका बताया। उनका कहना है कि जब सदन के अंदर आवाज नहीं सुनी जा रही तो इस तरह के प्रदर्शन जरूरी हो जाते हैं। कांग्रेस, सपा और टीएमसी के सांसद एक स्वर में सरकार के रवैये की आलोचना कर रहे हैं।

सोमवार से शुरू विरोध का सिलसिला

यह पूरा विवाद सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी के संसद चलो प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ। मध्य दिल्ली में पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए विपक्ष सड़क पर उतर आया। मंगलवार को बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए और नेताओं को हिरासत में लिया गया। बुधवार को संसद परिसर में काले कपड़ों वाला प्रदर्शन इसी सिलसिले की कड़ी है।

विपक्ष का आरोप है कि सरकार छात्र आंदोलनों को दबाने की कोशिश कर रही है। वे कह रहे हैं कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जताने का अधिकार छीना जा रहा है। कई राज्यों में भी कांग्रेस और अन्य दलों ने प्रदर्शन किए। तिरुवनंतपुरम, गुवाहाटी, जबलपुर और भुवनेश्वर जैसी जगहों पर भी विरोध प्रदर्शन हुए।

राजनीतिक घमासान तेज

विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर दमनकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि छात्रों की जायज मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। पेपर लीक जैसी गंभीर घटनाओं पर ठोस कार्रवाई की बजाय आंदोलनों को कुचलने की कोशिश हो रही है। बेरोजगारी और शिक्षा नीति की विफलताओं को छुपाने के लिए दबाव की नीति अपनाई जा रही है।

प्रियंका गांधी के बयान में साफ चुनौती थी। उन्होंने कहा कि सरकार डरपोक है और विपक्ष से डरती है। विपक्षी सांसद इस बात पर अड़े हैं कि युवाओं के मुद्दों को राजनीतिक रंग देकर खारिज नहीं किया जा सकता। वे संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

संसद परिसर में तनावपूर्ण माहौल

काले कपड़ों में हुए प्रदर्शन ने संसद परिसर में तनाव का माहौल बना दिया। मकर द्वार के सामने विपक्षी सांसदों की एकजुटता साफ दिख रही थी। यह प्रदर्शन मानसून सत्र के तीसरे दिन हुआ जब विपक्ष पहले से ही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है।

विपक्ष का कहना है कि जब तक छात्रों के मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक विरोध जारी रहेगा। काले कपड़ों का यह प्रदर्शन उनकी नाराजगी का प्रतीक बन गया है। संसद परिसर में हुआ यह दृश्य राजनीतिक घमासान को और गहरा करने वाला साबित हो सकता है।

आगे क्या होगा रणनीति

विपक्षी दल छात्रों के मुद्दों को लेकर अपनी रणनीति पर कायम हैं। वे पेपर लीक, बेरोजगारी और कथित पुलिस कार्रवाई को एक साथ जोड़कर सरकार पर दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। काले कपड़ों वाला प्रदर्शन इसी रणनीति का हिस्सा है। आने वाले दिनों में संसद के अंदर और सड़क दोनों जगह विरोध का सिलसिला जारी रह सकता है।

युवाओं का भविष्य इस पूरे विवाद के केंद्र में है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकार और शिक्षा व्यवस्था की रक्षा से जोड़ रहा है। सरकार पर आरोप हैं कि वह इन मुद्दों को गंभीरता से नहीं ले रही। दोनों पक्षों के बीच यह टकराव फिलहाल थमने वाला नहीं दिख रहा। संसद परिसर में आज काले कपड़ों में दिखे विपक्षी सांसद इसी बात का संकेत दे रहे हैं।

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