NSUI Protest: जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले NSUI कार्यकर्ता हिरासत में, कांग्रेस ने कहा ‘लोकतंत्र की हत्या’
NSUI Protest: जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले NSUI कार्यकर्ता हिरासत में, कांग्रेस ने कहा 'लोकतंत्र की हत्या'
NSUI Protest: लखनऊ पुलिस ने NSUI छात्रों को क्यों हिरासत में लिया?
दिल्ली में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन होने वाला था। लखनऊ पुलिस ने उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी, जिनके प्रदर्शन में शामिल होने की आशंका थी। लखनऊ विश्वविद्यालय से NSUI के अहमद रजा, शुभम खर्कवार समेत कई छात्रों और पदाधिकारियों को हिरासत में लिया गया।
अहमद रजा ने बताया कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले आंदोलन में हिस्सा लेने जा रहे थे। पुलिस की यह कार्रवाई प्रदर्शन से पहले ही की गई ताकि कोई बड़ा समूह दिल्ली न पहुंच सके। लिबरेशन के जिला सचिव रमेश सेंगर को भी नजरबंद कर दिया गया।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्या आरोप लगाए जा रहे हैं?
NSUI और अन्य विपक्षी संगठनों का आरोप है कि वोटर लिस्ट से करोड़ों भारतीय नागरिकों के नाम काट दिए गए हैं। अहमद रजा ने इसे आम नागरिकों के अधिकारों का हनन और संविधान का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, संगठन पीछे नहीं हटेगा।
शुभम खर्कवार ने दावा किया कि वोटों की चोरी के जरिए कई राज्यों और केंद्र में भाजपा की सरकारें बनीं। उनके अनुसार ज्ञानेश कुमार का पूरा सहयोग रहा और उनके इशारे पर काम हुए। विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव आयोग की भूमिका पारदर्शी नहीं रही और मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर कटौती हुई है।
आराधना मिश्रा मोना का क्या बयान है?
उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने छात्रों और संगठनों को प्रदर्शन में जाने से रोकने पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करना विपक्ष की नैतिक जिम्मेदारी है। अपनी बात रखना और सरकार की गलत नीतियों का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है।
उन्होंने साफ कहा कि प्रदर्शन को रोकना लोकतंत्र की हत्या करने जैसा है। आराधना मिश्रा का कहना है कि संविधान हर राजनीतिक दल और संगठन को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार देता है। वे लगातार इस मुद्दे पर सरकार को जवाबदेह ठहराने की बात कर रही हैं।
किस संगठनों ने प्रदर्शन का आह्वान किया और उनकी मांगें क्या हैं?
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान आइसा और कॉकरोच जनता पार्टी ने किया था। NSUI के कार्यकर्ता भी इसमें शामिल होने जा रहे थे। इन संगठनों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और उनके इस्तीफे की है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मतदाता सूचियों से नाम काटना लोकतंत्र के लिए खतरा है। वे लगातार युवा अभियान चलाने की बात कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में दिल्ली और अन्य जगहों पर भी इसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं और कई लोगों को हिरासत में लिया गया था।
NSUI Protest: NSUI का आगे का रुख क्या है?
NSUI के छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, वे पीछे नहीं हटेंगे। अहमद रजा ने कहा कि संगठन लगातार युवा अभियान चलाएगा। शुभम खर्कवार ने कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा।
कांग्रेस और NSUI दोनों ही इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हैं। आराधना मिश्रा मोना समेत अन्य नेताओं ने भी पुलिस कार्रवाई की निंदा की है। लखनऊ में यह कार्रवाई उस समय हुई जब दिल्ली में प्रदर्शन की तैयारियां जोरों पर थीं। पुलिस की तरफ से आधिकारिक बयान में अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह घटना मतदाता सूचियों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद को और उजागर करती है। विपक्षी दल लगातार आरोप लगा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग और सरकार की तरफ से इन आरोपों को खारिज किया जाता रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और गतिविधि देखने को मिल सकती है।
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