Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शन का 32वां दिन, सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर कायम; विपक्ष और सरकार आमने-सामने
सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर, विपक्ष ने तेज किया विरोध, सरकार चर्चा पर अड़ी
Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर चल रहा प्रदर्शन आज अपने 32वें दिन में पहुंच गया है। छात्र और प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर लगातार डटे हुए हैं। इस बीच पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वे नीट समेत कई परीक्षाओं में हुए पेपर लीक के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को सड़क से संसद तक उठाया है। सरकार चर्चा के लिए तैयार होने का दावा कर रही है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच गतिरोध अभी भी बरकरार है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी
बुधवार को जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक विरोधी प्रदर्शन का 32वां दिन चल रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के प्रदर्शनकारी यहां डटे हुए हैं। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया है कि सरकार ने उनके समय को बर्बाद किया। उनके अनुसार सरकार ने प्रतिनिधिमंडल को बुलाया और फिर उन्हें जेपी नड्डा के घर नजरबंद कर दिया गया। अब दीपके का साफ कहना है कि वे सरकार से बातचीत करने नहीं जाएंगे। सरकार को खुद जंतर-मंतर आकर छात्रों से बात करनी होगी। प्रदर्शनकारियों का रुख सख्त बना हुआ है और वे अपनी मांगों पर अड़े हैं।
छात्र अपनी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में पेपर लीक होने से हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि महज जांच से काम नहीं चलेगा। जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो और शिक्षा मंत्री को जवाबदेह ठहराया जाए।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और सरकार की पहल
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वे नीट सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। उनकी मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। वांगचुक का मानना है कि परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए बड़े फैसले की जरूरत है।
सरकार ने इस गतिरोध को तोड़ने की कोशिश की है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा मेदांता अस्पताल पहुंचे जहां सोनम वांगचुक भर्ती हैं। इससे पहले वे सफदरजंग अस्पताल से डिस्चार्ज हुए थे। मंत्रियों की इस मुलाकात को सरकार की ओर से बड़ी पहल माना जा रहा है। बातचीत का मकसद गतिरोध खत्म करना और छात्रों की चिंताओं को समझना बताया जा रहा है। हालांकि वांगचुक अभी भी अपनी मांग पर अडिग नजर आ रहे हैं।
विपक्षी दलों का सक्रिय रुख
विपक्षी दलों ने नीट पेपर लीक मुद्दे को जोरशोर से उठाया है। शिवसेना यूबीटी के नेता उद्धव ठाकरे देर रात जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि यह सरकार छात्रों का भला नहीं चाहती। उद्धव ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया और कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार छात्रों की जायज मांगें नहीं मानती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सपा के कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन किए। लखनऊ सहित विभिन्न जगहों पर नेता विपक्ष माता प्रसाद पांडेय समर्थकों के साथ सड़क पर उतरे।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री आवास के सामने धरना दिया। उनके साथ कांग्रेस के कई सांसद भी मौजूद रहे। इस दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह राहुल गांधी से मिले। मंत्री का दावा है कि राहुल गांधी ने आश्वासन दिया था कि अगर सरकार नीट मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हो जाती है तो धरना खत्म कर देंगे। लेकिन बाद में राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग रख दी। सरकार का कहना है कि विपक्ष अपनी मांगें बदल रहा है।
धर्मेंद्र प्रधान का पलटवार
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी पर सीधा पलटवार किया। उन्होंने लिखा कि विपक्षी नेता राहुल गांधी संसद के मानसून सत्र के दौरान हंगामा करने के लिए छात्रों को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रधान के अनुसार राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर जनता को परेशानी पहुंचाई और सुरक्षा नियमों की अनदेखी की।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार नीट पर चर्चा करने और युवाओं की हर असली चिंता दूर करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। फिर भी कांग्रेस ने लोकतांत्रिक बहस के बजाय राजनीतिक तमाशा चुना। सरकार का रुख साफ है कि सदन में चर्चा के लिए वह तैयार है, लेकिन सड़क पर हंगामा करने से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा।
दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई
प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में भी सुनवाई होनी है। सोमवार को संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया था, लेकिन बुधवार को इस मामले को लिस्ट किया गया है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच इस याचिका पर सुनवाई करेगी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया।
अन्य राज्यों में भी प्रदर्शन
नीट पेपर लीक का मुद्दा सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने भी प्रदर्शन किया। भोपाल में कांग्रेस विधायकों ने धरना दिया। पार्टी के नेता जीतू पटवारी को हिरासत में लिया गया। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, मैनपुरी और सीतापुर जैसे जिलों में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए। विपक्ष पूरे देश में इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
कांग्रेस संसद में पेपर लीक पर चर्चा करवाने की मांग कर रही है। अगर सदन में बहस होती है तो पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक की संभावना है। विपक्ष धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा हुआ है, जबकि सरकार चर्चा के लिए तैयार होने का दावा कर रही है।
छात्रों की मांगें और सरकार का रुख
छात्रों की मुख्य मांगें साफ हैं। वे नीट पेपर लीक मामले में सख्त कार्रवाई चाहते हैं। परीक्षा प्रणाली में सुधार और दोषियों पर कार्रवाई की मांग के साथ-साथ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की आवाज भी उठ रही है। सोनम वांगचुक भी इसी मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं।
सरकार का कहना है कि वह मामले में सख्त कार्रवाई कर रही है। सदन में चर्चा के लिए वह 100 फीसदी प्रतिबद्ध है। सरकार का आरोप है कि विपक्ष युवाओं की (Jantar Mantar Protest) असली चिंताओं को दरकिनार कर राजनीतिक लाभ के लिए हंगामा कर रहा है। दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं और अभी तक कोई आम सहमति नहीं बन पाई है।
Jantar Mantar Protest: आगे का क्या है रुख
आज जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहेगा। सोनम वांगचुक की सेहत और उनकी मांगों पर नजर बनी हुई है। दिल्ली हाईकोर्ट में बल प्रयोग वाली याचिका की सुनवाई महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। संसद के मानसून सत्र में भी यह मुद्दा गरमा सकता है। विपक्ष सड़क से संसद तक दबाव बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है, जबकि सरकार चर्चा का विकल्प पेश कर रही है।
नीट जैसी परीक्षा युवाओं के करियर का आधार होती है। पेपर लीक की घटनाएं बार-बार होने से परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। इस पूरे मामले में छात्रों का भविष्य सबसे महत्वपूर्ण है। दोनों पक्षों को चाहिए कि वे युवाओं की चिंताओं को प्राथमिकता दें और कोई ठोस समाधान निकालें। फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और राजनीतिक घमासान भी थमने का नाम नहीं ले रहा।
Read More Here