Muzaffarnagar School Firing: 12वीं के छात्र ने सहपाठी पर चलाई गोली, प्रिंसिपल को भी दी धमकी

खतौली के कॉलेज में फायरिंग से मचा हड़कंप, पुलिस ने आरोपी को तमंचे और कारतूस के साथ पकड़ा

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Muzaffarnagar School Firing: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के खतौली थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां ज्ञान के मंदिर में खूनी खेल खेलने का प्रयास किया गया। जानसठ रोड स्थित श्री कुंद-कुंद जैन इंटर कॉलेज में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब 12वीं कक्षा के एक छात्र ने क्लासरूम के भीतर अपने ही सहपाठी को निशाना बनाकर तमंचे से गोली चला दी। संयोगवश निशाना चूक जाने के कारण गोली दीवार में जा धंसी और पीड़ित छात्र की जान चमत्कारिक रूप से बच गई।

गोली चलने की जोरदार आवाज और छात्रों की चीख-पुकार से पूरा परिसर दहल उठा। प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए आरोपी छात्र को परिसर में ही रोके रखा और सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे मय असलहा और कारतूसों के साथ धर दबोचा। इस दुस्साहसिक वारदात ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, अनुशासन और हथियारों की आसान पहुंच को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

Muzaffarnagar School Firing: फीस जमा करने का बहाना बनाकर घुसा, क्लासरूम में झोंकी गोली

प्रत्यक्षदर्शियों और कॉलेज प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार को कॉलेज में नियमित कक्षाएं संचालित हो रही थीं। दोपहर के समय 12वीं कक्षा का आरोपी छात्र कॉलेज के मुख्य द्वार पर पहुंचा। उसने सुरक्षा कर्मियों और शिक्षकों से कहा कि वह फीस जमा कराने आया है तथा रास्ते में चोट लग जाने के कारण उसे आने में विलंब हुआ। उसकी बातों पर विश्वास कर उसे परिसर में प्रवेश की अनुमति दे दी गई।

अंदर पहुंचते ही छात्र प्रशासनिक ब्लॉक में जाने के बजाय सीधे 12वीं कक्षा के उस कमरे में गया, जहां उसका सहपाठी बैठा हुआ था। बिना कोई चेतावनी दिए उसने अपने बस्ते या कपड़ों में छिपाकर लाया गया अवैध तमंचा बाहर निकाला और सहपाठी की ओर तानते हुए ट्रिगर दबा दिया। गोली चलने से कमरे में धुआं और बारूद की गंध फैल गई। गनीमत रही कि गोली पीड़ित छात्र के बेहद करीब से गुजरती हुई निकल गई, जिससे वह बाल-बाल बच गया। गोली की आवाज सुनते ही क्लास के बाकी बच्चे दहशत में अपनी जान बचाने के लिए बाहर की तरफ भागे।

प्रधानाचार्य अनुराग जैन को भी दिखाया तमंचा, शिक्षकों ने दिखाई सूझबूझ

वारदात के तुरंत बाद कॉलेज के प्रधानाचार्य अनुराग जैन और अन्य वरिष्ठ शिक्षक दौड़कर मौके पर पहुंचे। उन्होंने आरोपी छात्र को समझाने और उसे काबू में करने का प्रयास किया, किंतु आक्रोश में अंधा हो चुका छात्र उल्टा प्रधानाचार्य की ओर तमंचा तानते हुए उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देने लगा।

ऐसी विकट और जानलेवा स्थिति में भी प्रधानाचार्य अनुराग जैन ने अपना मानसिक संतुलन नहीं खोया। उन्होंने छात्र को बातों में उलझाए रखा और किसी भी तरह का उत्तेजक कदम उठाने से परहेज किया। इसी दौरान अन्य स्टाफ सदस्यों ने तुरंत कॉलेज का मुख्य लौह द्वार बंद कर दिया ताकि आरोपी किसी भी सूरत में बाहर न भाग सके। साथ ही खतौली कोतवाली पुलिस को सीधे फोन कर तत्काल पुलिस बल भेजने की गुहार लगाई गई।

पुलिस ने मय असलहा और दो जिंदा कारतूसों के साथ दबोचा

सूचना मिलते ही खतौली इंस्पेक्टर दिनेश चंद बघेल भारी पुलिस बल के साथ कुछ ही मिनटों में कॉलेज परिसर पहुंच गए। पुलिस टीम ने सुनियोजित तरीके से घेराबंदी करते हुए आरोपी छात्र को बिना किसी खून-खराबे के अपने नियंत्रण में ले लिया। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से वारदात में प्रयुक्त अवैध तमंचा और दो जिंदा कारतूस बरामद किए गए।

पुलिस तुरंत आरोपी छात्र को अपनी गाड़ी में बैठाकर कोतवाली ले आई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, छात्र को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ हत्या के प्रयास और शस्त्र अधिनियम की सुसंगत कानूनी धाराओं के तहत विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। चूंकि आरोपी छात्र नाबालिग है, इसलिए उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की प्रक्रिया अमल में लाई जा रही है।

वारदात की जड़ में पुरानी रंजिश: कुछ दिन पहले हुई थी मारपीट

प्रारंभिक पुलिस पूछताछ और सहपाठियों के बयानों से यह बात सामने आई है कि यह दुस्साहसिक कदम अचानक नहीं उठाया गया, बल्कि इसके पीछे छात्रों के बीच पनप रहा पुराना विवाद था। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ दिन पहले कॉलेज के बाहर या आसपास किसी बात को लेकर आरोपी छात्र और पीड़ित छात्र के गुट के बीच तीखी नोकझोंक और मारपीट हुई थी।

उस मारपीट की घटना के बाद से ही आरोपी छात्र प्रतिशोध की आग में जल रहा था। उसने अपने अपमान का बदला लेने के लिए यह खूनी योजना बनाई। पुलिस इस बिंदु की भी गहराई से पड़ताल कर रही है कि क्या उस पूर्व विवाद की सूचना कॉलेज प्रबंधन या स्थानीय पुलिस चौकी को दी गई थी, और यदि हां, तो उस समय दोनों पक्षों की काउंसलिंग या निरोधात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

सबसे बड़ा विधिक सवाल: नाबालिग के हाथ में किसने थमाया तमंचा?

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक और गंभीर पहलू यह है कि 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले एक स्कूली छात्र तक घातक अवैध हथियार और कारतूस कैसे पहुंचे। क्या किसी स्थानीय आपराधिक तत्व ने उसे यह हथियार उपलब्ध कराया था, या फिर उसने किसी परिचित के माध्यम से अवैध असलहे की खरीद-फरोख्त की थी?

खतौली इंस्पेक्टर ने स्पष्ट किया है कि पुलिस की जांच का मुख्य केंद्र अब उस हथियार तस्कर या स्रोत का पता लगाना है जिसने एक नाबालिग को हथियार थमाया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हथियार उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति को भी इस आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सेदार मानकर उसके विरुद्ध सख्त कानूनी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में युवाओं और छात्रों के बीच अवैध हथियारों के बढ़ते चलन पर नकेल कसने के लिए यह जांच बेहद निर्णायक साबित हो सकती है।

कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था और मेटल डिटेक्टर की गैरमौजूदगी पर सवाल

इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना ने शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। कॉलेज के मुख्य द्वार पर छात्रों के बस्तों की नियमित जांच न होना और बिना किसी मेटल डिटेक्टर जांच के विद्यार्थियों को सीधे क्लासरूम तक जाने देना सुरक्षा की एक बड़ी चूक माना जा रहा है।

अभिभावकों का कहना है कि यदि छात्र इतना बड़ा हथियार बैग में रखकर क्लासरूम तक ले जाने में सफल हो गया, तो इसका सीधा अर्थ है कि गेट पर सुरक्षा व्यवस्था केवल औपचारिक थी। घटना के बाद से कॉलेज के सैकड़ों छात्र-छात्राओं और उनके परिजनों में गहरा भय व्याप्त है। कई अभिभावकों ने मांग की है कि स्कूलों में प्रवेश के समय बैग्स की अनिवार्य तलाशी और मुख्य द्वारों पर सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन को तत्काल कड़े मानक तय करने चाहिए।

नाबालिग होने के चलते किशोर न्याय अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आरोपी छात्र विधि के उल्लंघन में शामिल बालक (Juvenile in Conflict with Law) की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम के कड़े दिशा-निर्देश लागू होते हैं। पुलिस उसे सामान्य थाने की हवालात में रखने के बजाय बाल कल्याण पुलिस अधिकारी की देखरेख में रखेगी।

औपचारिक पूछताछ और कानूनी औपचारिकताओं के उपरांत उसे मुजफ्फरनगर स्थित जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) के समक्ष पेश किया जाएगा। बोर्ड ही यह तय करेगा कि आरोपी की मानसिक परिपक्वता और अपराध की जघन्यता को देखते हुए उसके मामले की सुनवाई किस स्तर पर की जाएगी। साथ ही उसके परिजनों को भी नोटिस देकर जांच में शामिल किया गया है।

Muzaffarnagar School Firing: समय रहते छात्र विवादों को सुलझाना शैक्षणिक व्यवस्था के लिए अनिवार्य

श्री कुंद-कुंद जैन इंटर कॉलेज में घटी यह घटना एक बड़ा चेतावनी भरा संकेत है कि छात्रों के आपसी झगड़ों, ईगो-क्लैश और धमकियों को कभी भी ‘बच्चों की बात’ मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यदि पहले हुई मारपीट की घटना को गंभीरता से लेकर दोनों छात्रों और उनके माता-पिता को बुलाकर सख्त कदम उठाए गए होते, तो शायद क्लासरूम के भीतर गोलियां चलने की नौबत न आती।

ईश्वर की कृपा और प्रधानाचार्य के धैर्य से एक मासूम की जान बच गई और कोई जनहानि नहीं हुई, किंतु इस घटना ने पूरे समाज, पुलिस और शिक्षा विभाग को झकझोर कर रख दिया है। अब यह पुलिस जांच पर निर्भर करेगा कि वह अवैध हथियारों के नेटवर्क की जड़ तक कब पहुंचती है, वहीं कॉलेज प्रशासन के लिए भी अपने सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह दुरुस्त करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

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