1 मई 2026 वैशाख पूर्णिमा: सूर्योदय 05:41 बजे, चंद्रोदय 06:52 बजे, अभिजीत मुहूर्त 11:52 से 12:45 तक, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय
वैशाख पूर्णिमा 2026 पर 1 मई को सूर्योदय सुबह 05:41 बजे और चंद्रोदय शाम 06:52 बजे होगा। जानें अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल, ब्रह्म मुहूर्त और पूजन का शुभ समय।
Vaishakh Purnima 2026: वैशाख पूर्णिमा के पावन अवसर पर 1 मई 2026 को सूर्योदय सुबह 05:41 बजे होगा और सूर्यास्त शाम 06:56 बजे होगा। इस दिन चंद्रमा तुला राशि में विराजमान रहेंगे, जिनका उदय शाम 06:52 बजे होगा। पूर्णिमा तिथि का समापन रात 10:52 बजे होगा, जिसके कारण व्रत और पूजन के लिए यह पूरा दिन अत्यंत उपयुक्त है। विशेष रूप से अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 से दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा, जिसमें किसी भी नए और मांगलिक कार्य की शुरुआत करना श्रेष्ठ फलदायी माना गया है। हालांकि, सुबह 10:39 बजे से राहुकाल प्रारंभ हो जाएगा, जिसमें शुभ कार्यों को वर्जित माना गया है।
Vaishakh Purnima 2026: शुभ मुहूर्त और स्नान-दान का महत्व
वैशाख पूर्णिमा पर स्नान और दान के लिए सबसे उत्तम समय सुबह 05:35 से 07:45 तक रहेगा। इस अवधि में गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान करने से दैहिक और मानसिक शांति मिलती है। आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:15 से 04:58 तक रहेगा, जो मंत्र साधना के लिए सर्वोत्तम है। शाम के समय गोधूलि मुहूर्त (06:55 PM से 07:17 PM) और सायाह्न सन्ध्या (06:56 PM से 08:01 PM) में महालक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करना आर्थिक समृद्धि के द्वार खोलता है। मध्य रात्रि में निशिता मुहूर्त रात 11:57 से 12:39 तक रहेगा, जो तंत्र और गुप्त साधनाओं के लिए विशेष माना जाता है।
Vaishakh Purnima 2026: शहरों के अनुसार राहुकाल और वर्जित समय
पंचांग के अनुसार, राहुकाल के दौरान महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचना चाहिए। 1 मई को दिल्ली में राहुकाल सुबह 10:39 से दोपहर 12:18 तक रहेगा। लखनऊ में यह समय सुबह 10:25 से 12:04 तक, मुंबई में 11:00 AM से 12:36 PM तक और कोलकाता में सुबह 09:57 से 11:34 तक रहेगा। इसके अतिरिक्त, भद्रा काल सुबह 05:41 से 10:00 तक रहेगा, जिसमें मांगलिक कार्य करना अशुभ माना जाता है। वर्ज्य समय सुबह 08:25 से 10:10 तक रहेगा, इसलिए इस अवधि में लंबी दूरी की यात्रा करने से बचना चाहिए। रात 08:00 बजे से ‘बाण रोग’ लगने के कारण सात्विक दिनचर्या का पालन करना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक रहेगा।
निष्कर्ष: बुद्ध पूर्णिमा पर आत्मिक शांति का मार्ग
1 मई 2026 का दिन केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आत्म-साक्षात्कार का अवसर है। भगवान बुद्ध के जन्मोत्सव के रूप में यह दिन हमें शांति और अहिंसा का संदेश देता है। कूर्म जयंती होने के कारण इस दिन भगवान विष्णु के कच्छप अवतार की पूजा करने से घर में स्थिरता और धैर्य का वास होता है। पंचांग के अनुसार समय का सही नियोजन कर आप इस दिन के पूर्ण लाभ उठा सकते हैं। पूर्णिमा की चांदनी में चंद्र देव को अर्घ्य देने से मानसिक तनाव दूर होता है और पारिवारिक सुख-शांति में वृद्धि होती है।
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