Matka King Review: विजय वर्मा की ‘मटका किंग’ में दिखेगा 60 के दशक का मुंबई, सट्टेबाजी के साम्राज्य और धोखे की दिलचस्प कहानी; जानें कैसी है सीरीज

1960 के मुंबई की सट्टेबाजी पर आधारित ‘मटका किंग’, दमदार एक्टिंग और मजबूत कहानी के साथ कितना करता है एंटरटेन?

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Matka King Review: नागराज पोपटराव मंजुले की नई वेब सीरीज ‘मटका किंग’ प्राइम वीडियो पर रिलीज हो गई है। इस पीरियड क्राइम ड्रामा में विजय वर्मा ने मुख्य भूमिका निभाई है। सीरीज 1960 के दशक के मुंबई की पृष्ठभूमि पर आधारित है और सट्टेबाजी के खेल ‘मटका’ की दुनिया को दिखाती है। कृतिका कामरा, गुलशन ग्रोवर, सई ताम्हणकर और सिद्धार्थ जाधव जैसे कलाकारों के साथ यह सीरीज दर्शकों को लुभाने में कामयाब रही है।

सट्टे का साम्राज्य: कहानी का मुख्य सार

सीरीज की कहानी बृज भट्टी नाम के एक साधारण कपास व्यापारी के इर्द-गिर्द घूमती है। बृज अपनी गर्भवती पत्नी बरखा और छोटे भाई लाछू के साथ मुंबई की एक चाल में रहता है। वह एक कॉटन मिल में मैनेजर के पद पर काम करता है। मिल के मालिक लालजीभाई की मदद से वह ताश पर आधारित एक छोटा सट्टा खेल चलाता है। लेकिन लालजीभाई की बेईमानी के कारण बृज को नौकरी छोड़नी पड़ती है।

अपने भाई की वजह से फंस चुके कर्ज के बोझ से निकलने के लिए बृज अपना खुद का ‘मटका’ खेल शुरू करता है। उसका एकमात्र नियम है ईमानदारी। धीरे-धीरे यह खेल बड़ा होता जाता है और बृज मुंबई के सबसे ताकतवर सट्टेबाजों में शुमार हो जाता है। लेकिन सफलता के साथ-साथ लालच, विश्वासघात और पारिवारिक रिश्तों की उलझनें भी बढ़ती जाती हैं। सीरीज में दिखाया गया है कि पैसा इंसान के चरित्र को कैसे बदल देता है।

पर्दे के पीछे: कुशल लेखन और निर्देशन

नागराज पोपटराव मंजुले ने निर्देशन के साथ-साथ कहानी को भी मजबूती से पेश किया है। 8 एपिसोड की यह सीरीज ज्यादातर तेज रफ्तार से आगे बढ़ती है। हर एपिसोड में क्लिफहैंगर दिया गया है, जिससे दर्शक अगले एपिसोड के लिए उत्सुक रहते हैं। 1960 के दशक के मुंबई की पृष्ठभूमि, चालों की जिंदगी, सट्टेबाजी का माहौल और उस समय की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है।

कुछ जगहों पर कहानी थोड़ी धीमी पड़ जाती है, लेकिन कुल मिलाकर स्क्रिप्ट दमदार है। लेखन में ईमानदारी, लालच, परिवार और सत्ता के बीच के संघर्ष को अच्छी तरह से उकेरा गया है।

सिनेमाई अनुभव: सीरीज का तकनीकी पक्ष

सीरीज का टेक्निकल वर्क शानदार है। बैकग्राउंड म्यूजिक और टाइटल ट्रैक कहानी की थीम से पूरी तरह मेल खाते हैं। किशोर कुमार के गाने ‘जिंदगी एक सफर’ का इस्तेमाल भी बहुत प्रभावशाली है। सिनेमैटोग्राफी ने 1960 के दशक के मुंबई को जीवंत बना दिया है। एक्शन सीन रियल लगते हैं और साउंड डिजाइन ने उन्हें और भी प्रभावी बनाया है।

कॉस्ट्यूम और प्रोडक्शन डिजाइन भी सराहनीय हैं। हर किरदार का लुक उस समय के हिसाब से बिल्कुल सही है।

दमदार अभिनय: किरदारों की बेहतरीन परफॉर्मेंस

विजय वर्मा ने बृज भट्टी का किरदार बखूबी निभाया है। उन्होंने एक साधारण मैनेजर से लेकर ताकतवर सट्टेबाज तक के सफर को बहुत विश्वसनीय तरीके से दिखाया है। उनके चेहरे पर भावों की रेंज देखते ही बनती है। गंभीर, इमोशनल, क्रोधित और महत्वाकांक्षी हर मोड़ पर विजय ने दमदार एक्टिंग की है।

कृतिका कामरा गुलरुख दुबाश के किरदार में खूब जमी हैं। सई ताम्हणकर बरखा भट्टी की भूमिका में अपनी मेहनत दिखाती हैं। वे एक सहयोगी पत्नी के रूप में परिवार के लिए सब कुछ करती नजर आती हैं, लेकिन अपनी पहचान भी बनाना चाहती हैं।

गुलशन ग्रोवर लालजीभाई के नेगेटिव रोल में अपनी मास्टरी दिखाते हैं। सिद्धार्थ जाधव दगडू विचारे के रूप में मराठी लहजे के साथ कमाल करते हैं। भूपेंद्र जादवत लाछू के किरदार में लालच और चालाकी दोनों को अच्छे से पेश करते हैं। सपोर्टिंग कास्ट में भारत जाधव, गिरीश कुलकर्णी, जेमी लीवर और अन्य कलाकारों ने भी अपनी-अपनी भूमिकाओं को मजबूती दी है।

सीरीज की खूबियां: क्या रहा सबसे अच्छा

  • विजय वर्मा की दमदार एक्टिंग

  • 1960 के दशक का मुंबई का खूबसूरत चित्रण

  • क्लिफहैंगर वाले एपिसोड जो दर्शक को बांधे रखते हैं

  • ईमानदारी बनाम लालच का संघर्ष

  • परिवार, विश्वासघात और सत्ता की उलझनें

कुछ कमियां: कहां रह गई कसर

  • कुछ एपिसोड में पेसिंग थोड़ी धीमी

  • कुछ किरदारों की कहानी में गहराई की कमी

  • कुछ सीन ग्रीन स्क्रीन पर शूट किए गए लगते हैं

  • कुछ जगहों पर कहानी थोड़ी अनावश्यक रूप से खिंची हुई लगती है

अंतिम फैसला: स्टार रेटिंग विश्लेषण

कुल मिलाकर ‘मटका किंग’ एक देखने लायक सीरीज है। अगर आपको क्राइम ड्रामा, पीरियड स्टोरी और विजय वर्मा की एक्टिंग पसंद है तो यह सीरीज आपको निराश नहीं करेगी। कुछ छोटी-मोटी कमियों के बावजूद कहानी, एक्टिंग और प्रोडक्शन वैल्यू इसे मजबूत बनाती है।

स्टार रेटिंग: 3.5/5

Matka King Review: निष्कर्ष

‘मटका किंग’ 1960 के दशक के मुंबई की सट्टेबाजी की दुनिया को बहुत खूबसूरती से पेश करती है। विजय वर्मा की जबरदस्त परफॉर्मेंस और मजबूत सपोर्टिंग कास्ट इस सीरीज को देखने लायक बनाते हैं। अगर आप थ्रिल, सस्पेंस और अच्छी एक्टिंग पसंद करते हैं तो ‘मटका किंग’ आपके लिए सही विकल्प है।

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