Women Reservation Bill 2026: महिला आरक्षण पर सरकार का बड़ा दांव, आधी रात को जारी हुआ ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का नोटिफिकेशन; लोकसभा में आज होगी वोटिंग, परिसीमन पर रार जारी

नारी शक्ति वंदन अधिनियम आधी रात लागू, लोकसभा में आज वोटिंग, विपक्ष का परिसीमन मुद्दे पर विरोध जारी

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Women Reservation Bill 2026: महिला आरक्षण कानून को लागू करने और परिसीमन आयोग की स्थापना के उद्देश्य से लाए गए तीन विधेयकों पर संसद में बहस चल रही है, लेकिन सरकार ने आधी रात को बड़ा कदम उठाते हुए 2023 का नारी शक्ति वंदन अधिनियम पूरे देश में लागू कर दिया है। केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन में यह जानकारी दी गई है।

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब लोकसभा में इस पर जोरदार बहस जारी है। कल देर रात तक चर्चा चली और आज भी दिनभर बहस होगी। शाम को करीब 4 बजे वोटिंग होने की संभावना है।

आधी रात का फैसला: अधिसूचना और कानूनी प्रक्रिया

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा 16 अप्रैल को पेश किए गए प्रस्ताव पर विचार करते हुए सरकार ने रात करीब 1:20 बजे के आसपास महिला आरक्षण अधिनियम 2023 को प्रभावी रूप से लागू करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। हालांकि, संसद में इस कानून में संशोधन करने और इसे 2029 में लागू करने पर चर्चा अभी भी जारी है।

सरकार का कहना है कि यह अधिनियम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करता है। नोटिफिकेशन के साथ ही कानून की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

संसदीय कार्यसूची: तीन महत्वपूर्ण विधेयक

सरकार ने तीन प्रमुख बिल पेश किए हैं:

  1. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026

  2. परिसीमन विधेयक, 2026

  3. केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक, 2026

इन तीनों बिलों का मकसद 2023 के महिला आरक्षण कानून को पूरी तरह ऑपरेशनलाइज करना है।

विपक्ष का रुख: कड़ा विरोध और मांगें

विपक्ष महिला आरक्षण बिल का समर्थन कर रहा है, लेकिन परिसीमन और जनगणना के आधार पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर बिल लाकर ओबीसी महिलाओं का हक मार रही है।

विपक्ष की मुख्य मांगें:

  • महिला आरक्षण मौजूदा लोकसभा के आधार पर 2029 में लागू किया जाए।

  • परिसीमन 2026 की जनगणना के बाद किया जाए।

  • छोटे राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व कम न हो।

नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हम महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार की चालाकी से सहमत नहीं हैं। विपक्ष ने एकजुट होकर विरोध करने का फैसला किया है।

विधायी प्रभाव: प्रस्तावित मुख्य बदलाव

  1. महिला आरक्षण संशोधन: लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

  2. परिसीमन विधेयक: लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों का पुनर्गठन होगा।

  3. केंद्र शासित प्रदेश संशोधन: केंद्र शासित प्रदेशों में भी आरक्षण लागू होगा।

इन बिलों के पास होने से लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और राजनीतिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा।

विशेष सत्र: महत्वपूर्ण दिन और समय

16 से 18 अप्रैल तक चलने वाला यह विशेष सत्र देश की राजनीतिक दिशा तय करने वाला है। लोकसभा में 17 अप्रैल को चर्चा के बाद वोटिंग होगी। राज्यसभा में 18 अप्रैल को चर्चा और वोटिंग होगी।

सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। विपक्ष भी बिल पर मजबूती से बहस करने वाला है।

विशेषज्ञ राय: राजनीतिक विश्लेषण और असर

विशेषज्ञों का कहना है कि महिला आरक्षण बिल पास होने से 2029 के चुनावों में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी। इससे राजनीतिक दलों की रणनीति भी बदल जाएगी। परिसीमन के मुद्दे पर दक्षिण भारतीय राज्यों का विरोध खासा महत्वपूर्ण है क्योंकि उनकी आबादी कम बढ़ रही है।

लोकतांत्रिक सुधार: महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी

महिलाएं देश की आधी आबादी हैं। उनका राजनीति में ज्यादा प्रतिनिधित्व लोकतंत्र को मजबूत बनाएगा। कई महिला संगठन इस बिल का स्वागत कर रही हैं।

सत्र का शेड्यूल: आगामी कार्यक्रम का विवरण

  • 16 अप्रैल: बिल पेश, चर्चा शुरू

  • 17 अप्रैल: लोकसभा में चर्चा और वोटिंग

  • 18 अप्रैल: राज्यसभा में चर्चा और वोटिंग

सरकार और विपक्ष दोनों अपनी बात मजबूती से रखेंगे।

Women Reservation Bill 2026: निष्कर्ष

17 अप्रैल 2026 को संसद का विशेष सत्र जारी है। सरकार ने आधी रात को महिला आरक्षण कानून 2023 को लागू कर दिया है। लोकसभा में आज वोटिंग होने वाली है। विपक्ष परिसीमन के मुद्दे पर विरोध कर रहा है। यह सत्र देश की राजनीति में नया मोड़ साबित हो सकता है।

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