Manipur Census Suspended: अमित शाह की उच्चस्तरीय बैठक के बाद केंद्र का बड़ा निर्णय, NRC लागू करने की मांग बनी वजह

अमित शाह की बैठक के बाद फैसला, NRC और जनसांख्यिकीय चिंताओं के बीच प्रक्रिया टली

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Manipur Census Suspended: केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर के संवेदनशील राज्य मणिपुर में प्रस्तावित राष्ट्रीय जनगणना प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। यह ऐतिहासिक और रणनीतिक निर्णय नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय सुरक्षा एवं प्रशासनिक समीक्षा बैठक के उपरांत लिया गया।
राज्य में 1 सितंबर 2026 से मकान सूचीकरण (हाउस लिस्टिंग) का पहला चरण शुरू होना निर्धारित था। हालांकि, राज्य के विभिन्न नागरिक समाज संगठनों, प्रमुख जातीय समुदायों और राजनीतिक दलों द्वारा पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने की तीव्र मांग तथा मणिपुर उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेशों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने इस प्रक्रिया को फिलहाल टालने पर सहमति जताई।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक में स्पष्ट किया गया कि मणिपुर की जनता की क्षेत्रीय आकांक्षाओं, संवेदनशील जनसांख्यिकीय चिंताओं और सामाजिक सौहार्द को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह स्थगन किया गया है। इस महत्वपूर्ण बैठक में मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन तथा गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों के शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे।

Manipur Census Suspended: क्यों उठी 1951 को आधार वर्ष मानकर सत्यापन की मांग?

मणिपुर में प्रस्तावित जनगणना के विरुद्ध राज्यव्यापी असंतोष और विरोध प्रदर्शनों का मुख्य कारण अवैध विदेशी घुसपैठ का अंदेशा था। मैतेई, पंगल और नागा समुदायों के संयुक्त प्रतिनिधियों तथा 14 प्रमुख नागरिक समाज संगठनों (CSOs) ने केंद्र से दो-टूक मांग की थी कि जनगणना से पहले 1951 को आधार वर्ष (Cut-off Year) मानते हुए एनआरसी को अद्यतन किया जाए।
नागरिक संगठनों और स्थानीय विधायकों का तर्क था कि 2023 की जातीय हिंसा के बाद से राज्य में हजारों लोग विस्थापित होकर राहत शिविरों में रह रहे हैं और कई पहाड़ी तथा घाटी क्षेत्रों में प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह बहाल नहीं हो पाया है। इसके अलावा, पड़ोसी देश म्यांमार में जारी गृहयुद्ध के चलते सीमा पार से बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासियों के राज्य में प्रवेश करने की गंभीर चिंताएं हैं। संगठनों का कहना था कि वास्तविक नागरिकों की पहचान तय किए बिना सीधे जनगणना कराने से अवैध प्रवासियों को स्थायी नागरिकता और संपत्ति अधिकारों का अनुचित आधार मिल सकता है, जिससे मूल निवासियों के अस्तित्व पर जनसांख्यिकीय संकट गहरा जाएगा।

मणिपुर उच्च न्यायालय का अंतरिम निर्देश और याचिकाओं पर रुख

केंद्र सरकार के इस निर्णय से पूर्व मणिपुर उच्च न्यायालय ने भी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निर्णायक हस्तक्षेप किया था। मुख्य न्यायाधीश एम. सुंदर और न्यायमूर्ति ए. गुनेश्वर शर्मा की विशेष खंडपीठ ने कांग्लेइपाक स्टूडेंट्स एसोसिएशन (KSA) तथा 14 नागरिक समाज संगठनों के संयोजक शांता नहाकपम द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई की।
अदालत ने अपने स्पष्ट निर्देशों में 1 सितंबर से 30 सितंबर तक चलने वाली हाउस लिस्टिंग कवायद को अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया था। इससे पूर्व 17 अगस्त से शुरू होने वाली स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) प्रक्रिया भी जमीनी बहिष्कार के कारण आगे नहीं बढ़ सकी थी। विभिन्न जिलों में गणना कर्मियों के प्रशिक्षण शिविरों के बहिष्कार और न्यायालय के कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया था कि जमीनी सहमति के बिना जनगणना कराना कानून-व्यवस्था को गंभीर संकट में डाल सकता है।

मुख्यमंत्री ने जताया केंद्र का आभार, नागरिक समाज से की सहयोग की अपील

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने केंद्र सरकार के इस संवेदनशील कदम का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र ने राज्य की जनता की आवाज को सुना है और उनकी चिंताओं का पूर्ण सम्मान किया है।
मुख्यमंत्री ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व, भाजपा विधायकों के प्रतिनिधिमंडल और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों की सराहना की, जिन्होंने दिल्ली पहुंचकर राज्य की जमीनी हकीकत से गृह मंत्रालय को अवगत कराया था। उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों और नागरिक मंचों से आह्वान किया कि वे किसी भी प्रकार के तनाव या गतिरोध को त्यागकर प्रशासन के साथ सार्थक बातचीत जारी रखें ताकि राज्य में स्थायी शांति, विस्थापितों के पुनर्वास और सुरक्षित भविष्य की रूपरेखा तैयार की जा सके।

Manipur Census Suspended: समीक्षा बैठक का निष्कर्ष और आगे की प्रशासनिक दिशा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में आंतरिक सुरक्षा के संपूर्ण परिदृश्य, भारत-म्यांमार सीमा की सुरक्षा, बायोमेट्रिक कैप्चरिंग की प्रगति और विस्थापितों की सुरक्षित वापसी पर गहन चर्चा हुई। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने माना कि जब तक सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध आव्रजन पर प्रभावी नियंत्रण और जनसांख्यिकीय स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक ऐसी व्यापक गणना से सामाजिक अविश्वास बढ़ सकता है।
जनगणना स्थगित होने से राज्य में अनावश्यक तनाव टल गया है। अब राज्य और केंद्र सरकार का पूरा ध्यान कानून-व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य करने, राहत शिविरों में रह रहे परिवारों को उनके मूल गांवों में बसाने और सीमाओं की सुरक्षा को अभेद्य बनाने पर केंद्रित रहेगा। नागरिकता के सत्यापन और शांति बहाली के बाद ही भविष्य में जनगणना को लेकर नए सिरे से विचार किया जाएगा।

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