JPSC Recruitment Scam: JPSC कथित भर्ती घोटाले में बड़ा खुलासा, अभय तिवारी के बयान से चेयरमैन से कोचिंग संचालक तक नेटवर्क के आरोप

अभय तिवारी के बयान में JPSC अधिकारियों, एजेंसी और कोचिंग संचालक के नाम सामने आए

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JPSC Recruitment Scam: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती परीक्षाओं में हुए कथित बड़े घोटाले की जांच कर रही सीआईडी (CID) की कार्रवाई में एक नया मोड़ सामने आया है। गिरफ्तार आरोपी अभय तिवारी से हुई पूछताछ के दौरान कथित तौर पर जेपीएससी भर्ती प्रक्रिया में फैले एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। सीआईडी के समक्ष दिए गए बयानों के अनुसार, यह नेटवर्क केवल स्थानीय एजेंटों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें आयोग के उच्च पदस्थ अधिकारी, परीक्षा आयोजित कराने वाली आउटसोर्सिंग एजेंसी के प्रतिनिधि और कोचिंग संचालक भी सक्रिय रूप से शामिल थे। आरोप है कि अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की वसूली कर साक्षात्कार (Interview) में मनचाहे अंक दिलवाए जाते थे और चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया जाता था।

JPSC Recruitment Scam: पूछताछ में सामने आए प्रमुख नाम

सीआईडी द्वारा की गई गहन पूछताछ में अभय तिवारी ने आयोग और परीक्षा प्रणाली से जुड़े कई प्रमुख लोगों की भूमिका का उल्लेख किया। इनमें जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते सहित आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. जमाल अहमद और डॉ. एनिमा हसदा का नाम शामिल है।

इसके अतिरिक्त, परीक्षा संचालित करने वाली कंपनी TDPL के निदेशक रामवीर सिंह, परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और पतंजलि कोचिंग के संचालक रवि कुमार का नाम भी बयानों में दर्ज किया गया है। उल्लेखनीय है कि अभय तिवारी स्वयं TDPL कंपनी में पूर्व में मार्केटिंग मैनेजर के रूप में कार्य कर चुके हैं और बाद में गोड्डा में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) के पद पर कार्यरत थे।

बयान के अनुसार, अभ्यर्थियों को जोड़ने का काम बिचौलियों के माध्यम से किया जाता था, जिसमें आदित्य पांडे नामक व्यक्ति की भूमिका अभ्यर्थियों को नेटवर्क तक पहुंचाने में दर्ज की गई है। इसके पश्चात रामवीर सिंह के माध्यम से आयोग के सदस्यों एवं अध्यक्ष से संपर्क साधा जाता था ताकि साक्षात्कार बोर्ड में अधिक अंक आवंटित कराए जा सकें। इसके बदले प्रति अभ्यर्थी से औसतन 15 लाख रुपये तक की मांग की जाती थी।

चयनित अधिकारियों और एजेंट नेटवर्क का उल्लेख

अभय तिवारी के बयानों में तीन चयनित अधिकारियों—पुलिस अधीक्षक रोबिन कुमार, पुलिस उपाधीक्षक शैलेश सिंह और डिप्टी जेलर राजेश कुमार रजक के मामलों का भी विवरण दिया गया है। बयान के मुताबिक, इन अभ्यर्थियों के लिए कोडरमा निवासी लालू यादव ने बिचौलिए के रूप में काम किया था। आरोप है कि लालू यादव इन अभ्यर्थियों को नेटवर्क से जोड़ा और तत्पश्चात रामवीर सिंह के माध्यम से डॉ. अजीता भट्टाचार्य के इंटरव्यू बोर्ड में इनकी सेटिंग कराई गई।

इसी प्रकार, पुलिस उपाधीक्षक के रूप में चयनित मनीष कुमार और एक अन्य अभ्यर्थी गौतम कुमार के संदर्भ में भी क्रमशः रामवीर सिंह और कोचिंग संचालक रवि कुमार के माध्यम से प्रक्रियाओं को प्रभावित करने का दावा किया गया है।

साक्षात्कार बोर्ड (Interview Board) में सेटिंग की कार्यप्रणाली

सीआईडी को दिए गए विवरण के अनुसार, जिस अभ्यर्थी का जिस सदस्य अथवा अधिकारी के साथ सौदा तय होता था, उसे उसी विशिष्ट इंटरव्यू बोर्ड में भेजने की व्यवस्था की जाती थी।

  • कोड-डिकोड व्यवस्था: साक्षात्कार से एक दिन पूर्व रामवीर सिंह के माध्यम से कोड-डिकोड की प्रक्रिया पूरी की जाती थी।

  • बोर्ड आवंटन: साक्षात्कार के दिन संबंधित अभ्यर्थी को पूर्व-निर्धारित योजना के अनुसार तत्कालीन अध्यक्ष या संबंधित सदस्य के बोर्ड में भेजा जाता था ताकि उन्हें अधिक से अधिक अंक दिए जा सकें।

  • पारदर्शिता का हनन: इस सुनियोजित व्यवस्था के कारण मेधावी और योग्य अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित होते थे और अनुचित लाभ लेने वाले अभ्यर्थी सूची में ऊपर आ जाते थे।

लेन-देन और वित्तीय हस्तांतरण का तरीका

पूछताछ के दौरान वित्तीय लेन-देन के तरीकों का भी विवरण सामने आया है:

  • मध्यस्थों की भूमिका: डॉ. अजीता भट्टाचार्य से जुड़ी कथित राशि उनके व्यक्तिगत सहायक (PA) ब्रजराम (निवासी मोरहाबादी) के माध्यम से पहुंचाई जाती थी।

  • अन्य माध्यम: तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते तक राशि पहुंचाने के लिए धर्मेंद्र नामक व्यक्ति के इस्तेमाल की बात कही गई है। वहीं, डॉ. जमाल अहमद के संदर्भ में हजारीबाग के स्थानीय एजेंटों के माध्यम से व्यवस्था बनाने का उल्लेख है।

  • विशेष परीक्षाओं का संदर्भ: सीडीपीओ (CDPO) परीक्षा के मामले में भी अभ्यर्थियों से प्रति सीट 10 लाख से 15 लाख रुपये तक का रेट तय होने और बिचौलियों के माध्यम से राशि के लेन-देन का दावा किया गया है।

आयोग के पूर्व अधिकारियों पर कार्रवाई और जांच का दायरा

मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में ही जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, आयोग के तीन पूर्व सदस्यों—डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. एनिमा हसदा और डॉ. जमाल अहमद—ने अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया था। सीआईडी ने इन पूर्व सदस्यों को पूछताछ के लिए समन जारी किया है और अभय तिवारी द्वारा दिए गए बयानों के तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।

JPSC Recruitment Scam: निष्कर्ष और आगे की राह

सीआईडी की जांच का दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है। आउटसोर्सिंग एजेंसी TDPL, बिचौलियों, कोचिंग संस्थानों और आयोग के पूर्व पदाधिकारियों के आपसी गठजोड़ की गहनता से पड़ताल की जा रही है।

राज्य में प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों में इस प्रकार के प्रकरणों को लेकर भारी असंतोष देखने को मिला है। युवाओं और छात्र संगठनों द्वारा दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई और चयन प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है। वर्तमान में अभय तिवारी द्वारा दिए गए बयान जांच प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिनकी कानूनी एवं तथ्यात्मक पुष्टि सीआईडी द्वारा एकत्र किए जा रहे साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

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