JSSC JE Paper Leak: JSSC JE 2022 पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई, SIT ने परीक्षा एजेंसी के डायरेक्टर अरुण कुमार को मुंबई से किया गिरफ्तार

JSSC JE 2022 पेपर लीक में SIT की कार्रवाई, मुंबई से परीक्षा एजेंसी के डायरेक्टर गिरफ्तार

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JSSC JE Paper Leak: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की जूनियर इंजीनियर परीक्षा 2022 के बहुचर्चित पेपर लीक मामले में विशेष जांच टीम (SIT) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस पूरे घोटाले के मुख्य आरोपियों में शामिल परीक्षा संचालन एजेंसी बाइनसिस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अरुण कुमार को एसआईटी ने मुंबई से गिरफ्तार कर लिया है। परीक्षा रद्द होने के करीब चार साल बाद हुई यह गिरफ्तारी पूरे पेपर लीक सिंडिकेट के खिलाफ चल रही जांच में एक अहम मोड़ मानी जा रही है। अरुण कुमार मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले हैं और काफी समय से फरार चल रहे थे। इस मामले में पुलिस पूर्व में भी पांच आरोपियों को जेल भेज चुकी है।

JSSC JE Paper Leak: 3 जुलाई 2022 को हुई थी परीक्षा, आंसर की लीक होने पर हुई एफआईआर

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने 3 जुलाई 2022 को जूनियर इंजीनियर (डिप्लोमा स्तर) के कुल 2,279 पदों पर भर्ती के लिए राज्यभर में प्रतियोगी परीक्षा आयोजित की थी। हालांकि, परीक्षा वाले दिन ही पहली पाली का प्रश्नपत्र और उसकी आंसर की सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई थी। बड़े पैमाने पर धांधली और लीक की पुष्टि होने के बाद आयोग ने निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इस परीक्षा को तुरंत रद्द कर दिया था। इसके बाद अभ्यर्थी मिथिलेश कुमार महतो की लिखित शिकायत के आधार पर 14 जुलाई 2022 को नामकुम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420, 467, 468, 120बी के साथ-साथ आईटी एक्ट की धारा 66 और बिहार परीक्षा संचालन अधिनियम की धारा 10 के तहत केस दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड पुलिस ने एक उच्चस्तरीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया था। शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया था कि परीक्षा का ठेका लेने वाली नई दिल्ली स्थित एजेंसी ‘बाइनसिस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड’ और उसके शीर्ष अधिकारियों की इस लीक में सीधी संलिप्तता थी।

मुंबई से ऐसे हत्थे चढ़ा फरार डायरेक्टर अरुण कुमार

एसआईटी लगातार फरार आरोपियों की तलाश में अलग-अलग राज्यों में दबिश दे रही थी। तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचनाओं के आधार पर एसआईटी ने 10 अगस्त 2026 को मुंबई में छापेमारी कर अरुण कुमार को धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जांच अधिकारियों ने बताया कि अरुण कुमार एजेंसी में मैनेजर-कम-डायरेक्टर के रूप में काम संभाल रहे थे और परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता बनाए रखने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार थे।

जांच में यह बात भी सामने आई थी कि पटना के कुछ केंद्रों और सेफ हाउस में दर्जनों अभ्यर्थियों को जुटाकर परीक्षा से पहले ही लीक प्रश्नपत्र और उनके उत्तर रटवाए गए थे। इस पूरी साजिश की पटकथा एजेंसी के भीतर ही तैयार की गई थी। अरुण कुमार की गिरफ्तारी से अब जांच अधिकारियों को सिंडिकेट के अन्य वित्तीय लेन-देन और इसमें शामिल मुख्य सरगनाओं तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

अब तक पांच आरोपी जा चुके हैं जेल, कई कड़ियों का हुआ पर्दाफाश

पेपर लीक की जांच के दौरान एसआईटी अब तक पांच अन्य प्रमुख अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। इनमें परीक्षा एजेंसी का मैनेजर कृष्ण कुमार, पूर्व उम्मीदवार रंजीत मंडल, दीपक कुमार, अभिषेक कुमार और दीपक श्रीवास्तव शामिल हैं। जांच में सामने आया कि यह गिरोह केवल एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि बिहार, झारखंड और दिल्ली तक फैले एक संगठित नेटवर्क के जरिए काम कर रहा था।

एजेंसी के अंदरूनी सूत्र और बाहर के दलाल मिलकर मोटी रकम के बदले अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र मुहैया कराते थे। चार साल बाद कंपनी के डायरेक्टर की गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि एसआईटी ने डिजिटल साक्ष्यों, बैंक खातों की जांच और गवाहों के बयानों को मजबूती से जोड़कर कानूनी शिकंजा कसा है।

JSSC JE Paper Leak: अभ्यर्थियों के आक्रोश और प्रशासनिक जांच की वर्तमान स्थिति

परीक्षा रद्द होने के बाद से ही झारखंड के हजारों अभ्यर्थियों में गहरा असंतोष और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था। छात्र लगातार परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने और दोषियों की जल्द गिरफ्तारी को लेकर सड़कों पर आंदोलन कर रहे थे। ऐसे में एसआईटी की इस बड़ी कार्रवाई को छात्रों के लगातार बढ़ते दबाव और प्रशासनिक मुस्तैदी का नतीजा माना जा रहा है।

फिलहाल अरुण कुमार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उनसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस लीक से कितने पैसों की अवैध कमाई की गई थी और क्या इसमें कोई प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल था। झारखंड के युवाओं और छात्र संगठनों की मांग है कि केस का स्पीडी ट्रायल कराकर सभी दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जाए, ताकि भविष्य में राज्य की भर्ती प्रक्रियाओं की साख को दोबारा बहाल किया जा सके।

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