Lucknow Trauma Center: लखनऊ में बनेगा 350 बेड का लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

लोहिया संस्थान में 350 बेड का लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर, गंभीर मरीजों को मिलेगा बेहतर इलाज

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Lucknow Trauma Center: राजधानी लखनऊ समेत पूरे उत्तर प्रदेश के गंभीर रोगियों और सड़क हादसों में घायल होने वाले लोगों को त्वरित एवं विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS) के शहीद पथ स्थित परिसर के पास 350 बेड की क्षमता वाला अत्याधुनिक लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर स्थापित किया जाएगा।

लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने इसके लिए गोमती नगर विस्तार के सेक्टर-7 में मातृ एवं शिशु अस्पताल के ठीक सामने लगभग 16,603 वर्ग मीटर भूमि आवंटित कर दी है। इस परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद राजधानी में गंभीर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की क्षमता में अभूतपूर्व विस्तार होगा।

Lucknow Trauma Center: शहीद पथ पर बनेगा 350 बेड का आधुनिक ट्रॉमा सेंटर

गोमती नगर विस्तार सेक्टर-7 में शहीद पथ के किनारे आवंटित 16,603.34 वर्ग मीटर भूमि पर इस विशाल ट्रॉमा सेंटर का निर्माण किया जाएगा। इस स्थान पर पूर्व में प्रस्तावित फ्लावर वैली को अन्यत्र स्थानांतरित कर भूमि का भू-उपयोग सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के रूप में परिवर्तित किया गया है।

लोहिया संस्थान के निदेशक प्रो. सीएम सिंह के अनुसार जमीन के संस्थान के नाम औपचारिक हस्तांतरण के बाद निर्माण कार्य की प्रक्रिया तेजी से शुरू की जाएगी। निर्माण कार्य प्रारंभ होने के बाद 24 माह के भीतर इस संपूर्ण परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

केजीएमयू और पीजीआई पर घटेगा मरीजों का भारी दबाव

वर्तमान में पूरे प्रदेश से लखनऊ रेफर होने वाले जटिल हादसों और गंभीर रोगियों के लिए किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) स्थित लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर ही प्रमुख सहारा बना हुआ है। वहां 450 बेड की क्षमता के सापेक्ष प्रतिदिन तीन से चार गुना अधिक मरीजों का अत्यधिक दबाव रहता है, जिसके चलते मरीजों को स्ट्रेचर या फर्श पर इंतजार करना पड़ता है।

संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) में भी 156 बेड का एपेक्स ट्रॉमा सेंटर संचालित है। अब लोहिया संस्थान में 350 बेड का नया लेवल-1 सेंटर खुलने से गंभीर मरीजों को बेड की अनुपलब्धता से बड़ी राहत मिलेगी और आपातकालीन स्थिति में समय पर उपचार संभव हो सकेगा।

लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर और ‘गोल्डन आवर’ की अहमियत

सड़क दुर्घटना, सिर में गंभीर चोट (हेड इंजरी), गोली लगने अथवा बहु-अंग क्षति (मल्टीपल ऑर्गन ट्रॉमा) जैसे मामलों में हादसे के पहले एक घंटे यानी ‘गोल्डन आवर’ में विशेषज्ञ चिकित्सा मिलना जीवन रक्षा के लिए सर्वाधिक निर्णायक होता है।

लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर में चौबीसों घंटे ट्रॉमा सर्जन, न्यूरोसर्जन, ऑर्थोपेडिक सर्जन, प्लास्टिक सर्जन, एनेस्थेटिस्ट और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों की समर्पित टीम मौजूद रहती है। इसके साथ ही आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, 24 घंटे पैथोलॉजी और अत्याधुनिक रेडियोलॉजी जांच (जैसे तत्काल सीटी स्कैन और एमआरआई) की सुविधाएं एक ही छत के नीचे बिना किसी देरी के उपलब्ध कराई जाती हैं।

1,010 बेड का नया सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और क्रिटिकल केयर यूनिट

लोहिया संस्थान का यह विस्तार केवल ट्रॉमा सेंटर तक ही सीमित नहीं है। शहीद पथ परिसर में ही 1,010 बेड के सात मंजिला नए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के निर्माण को भी कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है।

इसके अतिरिक्त संस्थान में 100 बेड की एडवांस क्रिटिकल केयर मेडिसिन यूनिट का भवन भी लगभग तैयार हो चुका है। यह प्रस्तावित ट्रॉमा सेंटर नए अस्पताल परिसर के ठीक सामने बनेगा, जिससे गंभीर मरीजों को आपातकालीन विभाग से सीधे संबंधित सुपर स्पेशियलिटी विभागों में स्थानांतरित करने में अत्यधिक सुगमता होगी।

प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी मेडिकल संस्थान बनेगा लोहिया

वर्तमान समय में लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में कुल 1,250 बेड की क्षमता संचालित है।

निर्माणाधीन 1,010 बेड के नए अस्पताल, 100 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट और 350 बेड के इस नए ट्रॉमा सेंटर के पूर्ण होते ही संस्थान में कुल बेडों की संख्या बढ़कर 2,710 हो जाएगी। इसके साथ ही लोहिया संस्थान 4,400 बेड वाले केजीएमयू के बाद उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी चिकित्सा संस्थान बन जाएगा।

Lucknow Trauma Center: निष्कर्ष

शहीद पथ पर 350 बेड के लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर की स्थापना लखनऊ और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लाखों नागरिकों के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य सौगात है। प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़े शहीद पथ के मुहाने पर इस केंद्र की मौजूदगी से दूर-दराज के जिलों से आने वाली एंबुलेंस को शहर के भीतरी ट्रैफिक में फंसे बिना तत्काल विश्वस्तरीय इमरजेंसी उपचार मिल सकेगा, जिससे सड़क हादसों में होने वाली असामयिक मौतों को रोकने में मदद मिलेगी।

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