LPG Production: त्योहारों से पहले सरकार ने बढ़ाया LPG उत्पादन, Gulf Supply Disruption के बीच घरेलू जरूरतों पर फोकस
त्योहारी मांग के बीच सरकारी रिफाइनरियों ने LPG उत्पादन बढ़ाया, घरेलू आपूर्ति को दी प्राथमिकता
LPG Production: देश में आगामी त्योहारी सीजन के दस्तक देते ही रसोई गैस यानी एलपीजी (LPG) की मांग में तेजी का दौर शुरू हो गया है। नवरात्र, दशहरा, धनतेरस और दीपावली जैसे प्रमुख पर्वों के दौरान घरों में खान-पान और अन्य आयोजनों के चलते गैस सिलेंडरों की दैनिक खपत काफी बढ़ जाती है। इसी बीच पश्चिम एशिया और खाड़ी (Gulf) क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री परिवहन में उत्पन्न गंभीर लॉजिस्टिक्स बाधाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए कमर कस ली है। घरेलू उपभोक्ताओं को त्योहारों के दौरान किसी भी प्रकार की किल्लत का सामना न करना पड़े, इसके लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन में भारी बढ़ोतरी की गई है।
प्राप्त आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर 2026 में भारतीय तेल रिफाइनरियों से घरेलू एलपीजी का उत्पादन बढ़कर लगभग 44 हजार टन प्रतिदिन के स्तर तक पहुंच चुका है। उत्पादन का यह स्तर अगस्त 2026 के औसत उत्पादन की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में जारी गतिरोध के बीच आयात पर तात्कालिक निर्भरता को कम करना और घरेलू स्तर पर गैस की उपलब्धता को पूरी तरह स्थिर बनाए रखना है।
LPG Production: त्योहारी सीजन में मांग और खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति की चिंताएं
भारत में सितंबर के अंत से लेकर नवंबर के मध्य तक का समय सामाजिक और धार्मिक आयोजनों से भरा रहता है। आमतौर पर इन महीनों में रसोई गैस की घरेलू मांग अपने चरम पर पहुंच जाती है, जिसके साथ ही आने वाली सर्दियों की आहट भी ऊर्जा खपत को बढ़ा देती है। हालांकि हालिया बाजार विश्लेषणों के अनुसार इस वर्ष कुल एलपीजी मांग पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत कम रहने का अनुमान है, जिसका मुख्य कारण औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों की सुस्त बहाली माना जा रहा है। इसके बावजूद लगभग 30 करोड़ से अधिक घरेलू परिवारों के लिए सिलेंडरों की नियमित डिलीवरी सुनिश्चित करना पेट्रोलियम मंत्रालय के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।
इस त्योहारी मांग के बीच सबसे बड़ी चुनौती बाहरी आपूर्ति स्रोतों से जुड़ी है। भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करके पूरा करता है। आयातित गैस का एक बहुत बड़ा हिस्सा पारंपरिक रूप से सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे खाड़ी देशों से आता है। इन देशों से भारत आने वाले एलपीजी टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे संकरे समुद्री गलियारे से होकर गुजरना पड़ता है। हाल के दिनों में इस समुद्री क्षेत्र में उपजे तनाव और नौवहन बाधाओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को झकझोर कर रख दिया है, जिसके चलते कार्गो की रवानगी और आवागमन में अप्रत्याशित देरी दर्ज की जा रही है।
C3 और C4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम के अधिकतम उपयोग का निर्देश
वैश्विक स्तर पर आयात में आए व्यवधान से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने घरेलू रिफाइनरियों को एलपीजी का अधिकतम निष्कर्षण करने के कड़े निर्देश दिए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तकनीकी दिशा-निर्देशों के तहत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी रिफाइनरियों को C3 और C4 हाइड्रोकार्बन धाराओं का पूरा उपयोग एलपीजी बनाने में करने का आदेश दिया गया है।
रिफाइनिंग प्रक्रिया के दौरान निकलने वाले प्रोपेन, ब्यूटेन, प्रोपिलीन और ब्यूटीन जैसे प्रमुख घटकों को अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों में डायवर्ट करने के बजाय सीधे एलपीजी ब्लेंडिंग में झोंका जा रहा है। सरकार ने पूर्व में भी इसी प्रकार की तकनीकी व्यवस्था लागू करके उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की थी। मौजूदा दौर में उत्पादन को 44 हजार टन प्रतिदिन तक पहुंचाना इसी तकनीकी अनुकूलन का परिणाम है, ताकि यदि खाड़ी देशों से आने वाले जहाजों में कुछ दिनों का विलंब भी हो, तो भी भारतीय बफर स्टॉक पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
आयात स्रोतों में विविधता: अमेरिका, नॉर्वे और रूस से बढ़े कार्गो
खाड़ी देशों के किसी एक समुद्री मार्ग पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम को कम करने के लिए भारत ने अपनी आयात रणनीति में रणनीतिक बदलाव किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने अब अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस जैसे गैर-पारंपरिक भौगोलिक क्षेत्रों से एलपीजी कार्गो हासिल करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इन देशों से आने वाले जहाज वैकल्पिक और सुरक्षित समुद्री मार्गों का उपयोग करते हैं, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट का असर कम हो जाता है।
आंकड़ों के अनुसार भारतीय ऊर्जा टोकरी में अमेरिकी एलपीजी की हिस्सेदारी में अप्रत्याशित उछाल देखा गया है। पिछले वर्ष जहां कुल भारतीय एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी मात्र 6 प्रतिशत के आसपास थी, वहीं हाल के महीनों में यह तेजी से बढ़कर 20 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर गई है। भारतीय तेल विपणन कंपनियां अब अमेरिकी ऊर्जा उत्पादकों के साथ दीर्घकालिक (Long-Term) आपूर्ति समझौतों पर भी गंभीरता से विचार कर रही हैं। इससे भारत को खाड़ी के क्षेत्रीय तनावों से अलग हटकर एक स्थिर और विश्वसनीय आपूर्ति विकल्प उपलब्ध हो सकेगा।
खाड़ी कार्गो का समायोजन और व्यावसायिक बनाम घरेलू प्राथमिकता
सितंबर माह के दौरान खाड़ी क्षेत्र में हुए घटनाक्रमों के कारण बीपीसीएल के एक और आईओसीएल के दो निर्धारित कार्गो का उठान प्रभावित हुआ था। इसके बावजूद अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) जैसी प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता कंपनियों ने भारत को आश्वस्त किया है कि वे अक्टूबर माह की अपनी संविदात्मक प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह निभाएंगी और आपूर्ति श्रृंखला को पटरी पर बनाए रखेंगी।
इधर घरेलू मोर्चे पर सरकार ने स्पष्ट नीति अपनाई है जिसके तहत गैर-घरेलू या वाणिज्यिक एलपीजी की तुलना में घरेलू उपभोक्ताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। पूर्व में आपूर्ति पर आए दबाव के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडरों की रीफिलिंग के लिए तय की गई प्रतीक्षा अवधि को 45 दिनों से घटाकर अब 25 दिन कर दिया गया है। तेल कंपनियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे वितरकों के स्तर पर ब्लैक मार्केटिंग रोकें और बुकिंग प्रणाली को पारदर्शी बनाए रखें ताकि त्योहारों के दौरान किसी भी उपभोक्ता को सिलेंडर के लिए भटकना न पड़े।
LPG Production: ऊर्जा सुरक्षा की भावी दिशा और बाजार संतुलन
वर्तमान एलपीजी परिदृश्य ने भारत को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा केवल आयात पर आधारित नहीं हो सकती। घरेलू रिफाइनरियों की उत्पादन क्षमता का पूर्ण दोहन, गैर-खाड़ी देशों से आपूर्ति के नए रास्ते खोलना और रणनीतिक गैस भंडारण का बेहतर प्रबंधन ही दीर्घकालिक स्थिरता का मार्ग है। आने वाले शीतकालीन महीनों में जब वैश्विक बाजारों में हीटिंग की मांग के कारण गैस की कीमतें चढ़ सकती हैं, तब भारत की यह अग्रिम तैयारी देश के करोड़ों परिवारों को रसोई गैस के संकट से बचाने में ढाल का कार्य करेगी।
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