Kolkata SIR Protest: दिल्ली के बाद अब कोलकाता में भी आंदोलन की तैयारी, 13 अक्टूबर को नागरिक सम्मेलन

मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण पर कोलकाता में 13 अक्टूबर को नागरिक सम्मेलन, जानें पूरा मामला

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Kolkata SIR Protest: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उपजे भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद अब इस आंदोलन की आंच पश्चिम बंगाल तक पहुंच गई है। विपक्षी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने मतदाता सूची संशोधन की निष्पक्षता और संवैधानिक वैधता पर सवाल खड़े करते हुए कोलकाता में बड़े पैमाने पर लामबंदी शुरू कर दी है। 13 अक्टूबर को कोलकाता में आयोजित होने वाला राज्यस्तरीय नागरिक सम्मेलन इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर धार देने की दिशा में एक अहम रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जिसमें चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और नागरिकों के मताधिकार की रक्षा पर गंभीर मंथन होगा।

Kolkata SIR Protest: 13 अक्टूबर को ‘सिटिजंस फोरम वेस्ट बंगाल’ का नागरिक सम्मेलन

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के विरोध का नेतृत्व मुख्य रूप से ‘सिटिजंस फोरम वेस्ट बंगाल’ द्वारा किया जा रहा है। इस मंच के बैनर तले माकपा के वरिष्ठ नेता और प्रख्यात अधिवक्ता विकासरंजन भट्टाचार्य तथा पूर्व केंद्रीय संस्कृति सचिव व पूर्व सांसद जवाहर सरकार जैसे प्रमुख चेहरे सक्रिय हैं।
आयोजकों के अनुसार 13 अक्टूबर को आयोजित होने वाले इस नागरिक सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता और हाशिए पर खड़े नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है। इस सम्मेलन में पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा और अभिनेता प्रकाश राज जैसे प्रमुख सार्वजनिक व्यक्तित्वों के शामिल होने की संभावना जताई गई है, जिससे यह आयोजन देशव्यापी बौद्धिक और नागरिक विमर्श का केंद्र बन सकता है।

एसआईआर प्रक्रिया पर विपक्ष और नागरिक समाज के गंभीर आक्षेप

विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की आड़ में मतदाता सूची के सत्यापन को नागरिकता जांच के अप्रत्यक्ष माध्यम में बदला जा रहा है। विकासरंजन भट्टाचार्य ने चिंता व्यक्त की है कि यदि सत्यापन के कठोर और जटिल नियम थोपे गए, तो इससे गरीब, प्रवासी मजदूर, अल्पसंख्यक और वंचित तबके के वास्तविक नागरिक अपने बुनियादी मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।
वहीं जवाहर सरकार ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से सार्वजनिक स्पष्टीकरण मांगा है कि अब तक की गई इस व्यापक और खर्चीली प्रक्रिया के दौरान कितने कथित अवैध मतदाताओं या घुसपैठियों की आधिकारिक पहचान की गई है। आलोचकों का कहना है कि किसी भी नागरिक को बिना पर्याप्त सुनवाई और ठोस साक्ष्यों के मतदाता सूची से बाहर करना संविधान के अनुच्छेद 326 का उल्लंघन है।

क्या है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और आयोग का विधिक तर्क?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग द्वारा संचालित एक विशेष प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन, सटीक और त्रुटिहीन बनाने के लिए घर-घर जाकर सत्यापन किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य मृत मतदाताओं, स्थानांतरित हो चुके व्यक्तियों और दोहरे नामों को सूची से हटाना तथा 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए पात्र नागरिकों के नाम जोड़ना होता है।
चुनाव आयोग और इस प्रक्रिया के समर्थकों का तर्क है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूची की शुद्धता सबसे पहली आवश्यकता है। चुनाव मशीनरी का दावा है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के तहत की जाती है, जिसका मकसद किसी वास्तविक नागरिक का नाम काटना नहीं बल्कि चुनावी शुचिता बनाए रखना है।

दिल्ली आंदोलन की पृष्ठभूमि और कोलकाता में राजनीतिक प्रभाव

कोलकाता में हो रहा यह विरोध प्रदर्शन दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्र संगठनों द्वारा जंतर-मंतर पर किए गए हालिया प्रदर्शनों, गिरफ्तारियों और सुप्रीम कोर्ट में हुई विशेष सुनवाइयों से सीधा जुड़ा हुआ है। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बाद अब विपक्षी खेमा कोलकाता जैसे राजनीतिक रूप से जागरूक केंद्र से इस आवाज को और मुखर करना चाहता है।
पश्चिम बंगाल में चूंकि मतदाता पहचान और नागरिकता का मुद्दा पहले से ही राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील रहा है, इसलिए 13 अक्टूबर का यह सम्मेलन आगामी राज्य विधानसभा और स्थानीय चुनावों के राजनीतिक समीकरणों को भी गहराई से प्रभावित कर सकता है।

Kolkata SIR Protest: मतदाता सूची में नाम कटने पर पुनरावेदन और विधिक अधिकार

एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान यदि किसी वास्तविक नागरिक का नाम मतदाता सूची से छूट गया है या त्रुटिवश हटा दिया गया है, तो उसे कानूनी रूप से दोबारा शामिल कराने के स्पष्ट नियम मौजूद हैं। संबंधित नागरिक चुनाव आयोग के मतदाता पोर्टल (Voters’ Service Portal) या वोटर हेल्पलाइन ऐप के जरिए ऑनलाइन फॉर्म 6 भरकर अपना नाम दर्ज करा सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, अपने क्षेत्र के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क कर पहचान पत्र, निवास प्रमाण और आयु संबंधी दस्तावेजों के साथ भौतिक रूप से भी आवेदन जमा किया जा सकता है। नागरिक समाज के संगठनों ने भी लोगों से अपील की है कि वे समय रहते मतदाता सूची में अपने नाम की स्थिति की जांच कर लें ताकि मतदान के लोकतांत्रिक अधिकार की रक्षा की जा सके।

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