अदाणी समूह की बड़ी तैयारी, कॉपर प्लांट की क्षमता होगी दोगुनी; दुनिया का सबसे बड़ा स्मेल्टर बनाने का लक्ष्य

मुंद्रा में कॉपर स्मेल्टर की क्षमता 10 लाख टन करने की योजना, जानें निवेश और विस्तार की पूरी जानकारी

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Adani Kutch Copper: अदाणी समूह की प्रमुख फ्लैगशिप कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की अनुषंगी इकाई कच्छ कॉपर लिमिटेड (KCL) ने भारत को धातु और खनन क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने गुजरात के मुंद्रा में स्थित अपने अत्याधुनिक कॉपर स्मेल्टर प्लांट की उत्पादन क्षमता को मौजूदा 5 लाख मीट्रिक टन सालाना से बढ़ाकर दोगुना यानी 10 लाख मीट्रिक टन सालाना (1 MTPA) करने की व्यापक विस्तार योजना तैयार की है। लगभग 1.2 अरब डॉलर (करीब 10,000 करोड़ रुपये) के कुल निवेश से विकसित हो रही इस परियोजना के दूसरे चरण के पूरा होते ही मुंद्रा स्थित यह संयंत्र दुनिया का सबसे बड़ा ‘सिंगल-लोकेशन कस्टम कॉपर स्मेल्टर’ बन जाएगा। कंपनी ने अपनी पहली सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट जारी करते हुए औद्योगिक विस्तार के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, शून्य अपशिष्ट जल और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग पर कड़ा रुख रेखांकित किया है।

 Adani Kutch Copper: कच्छ कॉपर की क्षमता दोगुनी करने की रणनीति और घरेलू मांग

भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में आधुनिक बुनियादी ढांचे, विद्युत पारेषण लाइनों, सौर व पवन ऊर्जा उपकरणों तथा इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के तीव्र विस्तार के चलते तांबे की मांग में अभूतपूर्व उछाल आया है। वर्तमान में देश तांबे की अपनी अधिकांश जरूरतों के लिए भारी आयात पर निर्भर है, जिससे मूल्यवान विदेशी मुद्रा बाहर जाती है।
कच्छ कॉपर लिमिटेड का यह क्षमता विस्तार घरेलू बाजार में तांबे की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने और भारत को एक प्रमुख धातु निर्यातक केंद्र के रूप में स्थापित करने की रणनीतिक योजना का हिस्सा है। 10 लाख टन की पूर्ण क्षमता हासिल करने के बाद यह इकाई न केवल घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को निरंतर कच्चा माल उपलब्ध कराएगी, बल्कि उच्च-गुणवत्ता वाले कॉपर कैथोड, रॉड्स और संबंधित सह-उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करेगी।

दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन कॉपर स्मेल्टर बनने की ओर कदम

मुंद्रा परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका रणनीतिक भौगोलिक स्थान और विश्वस्तरीय बंदरगाह से सीधा जुड़ाव है। एकल स्थान पर 10 लाख टन तांबा शोधन की क्षमता हासिल करने के बाद यह संयंत्र तांबे को प्रोसेस करने के मामले में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बन जाएगा।
तांबा आधुनिक युग की ‘धातुओं की रीढ़’ मानी जाती है, क्योंकि यह ऊर्जा संक्रमण और हरित प्रौद्योगिकी के हर पहलू का अनिवार्य घटक है। एक पारंपरिक ईंधन वाली कार की तुलना में एक इलेक्ट्रिक वाहन में लगभग चार गुना अधिक तांबे का उपयोग होता है, जबकि पवन चक्कियों और सौर पैनल्स में पारेषण के लिए भारी मात्रा में तांबे की जरूरत होती है। मुंद्रा में इस मेगा स्मेल्टर की क्षमता वृद्धि भारत के राष्ट्रीय ऊर्जा लक्ष्यों और औद्योगिक आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन साधने में गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

115 मेगावाट हरित ऊर्जा से संचालित होगा संयंत्र

पर्यावरणीय चिंताओं और कार्बन फुटप्रिंट को न्यूनतम रखने के उद्देश्य से कच्छ कॉपर ने अपने परिचालन में 115 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा को एकीकृत करने की योजना बनाई है। भारी धातु शोधन उद्योग परंपरागत रूप से अत्यधिक ऊर्जा-गहन माने जाते हैं, ऐसे में इतनी बड़ी मात्रा में सौर और पवन ऊर्जा का उपयोग एक महत्वपूर्ण डीकार्बोनाइजेशन पहल है।
कंपनी की पहली सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार, परिचालन में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने से उत्पादन के दौरान होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भारी कमी आएगी। यह कदम अदाणी समूह के उस दीर्घकालिक दृष्टिकोण के अनुकूल है, जिसके तहत समूह अपनी सभी विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स इकाइयों को पर्यावरणीय, सामाजिक और प्रशासनिक (ESG) मानकों पर खरा उतारने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।

जल संरक्षण, शून्य तरल निर्वहन और 99.8% सल्फर रिकवरी तकनीक

संवेदनशील तटीय पारिस्थितिकी को ध्यान में रखते हुए कच्छ कॉपर ने अपने संयंत्र में जल प्रबंधन का कड़ा मॉडल लागू किया है। संयंत्र के कुल औद्योगिक परिचालन में लगभग 100 प्रतिशत शुद्धिकृत समुद्री पानी (डिसैलिनेटेड सी-वॉटर) का उपयोग किया जाता है, जिससे स्थानीय भूमिगत जल स्रोतों या मीठे पानी के जलाशयों पर कोई अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता।
इसके साथ ही, संयंत्र पूरी तरह से ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ (ZLD) नीति पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि शोधन प्रक्रिया के दौरान निकलने वाले किसी भी दूषित जल को बाहर प्रकृति में नहीं छोड़ा जाता बल्कि उसे पूरी तरह रिसाइकिल कर पुनः उपयोग में लाया जाता है। वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कंपनी ने उन्नत फ्लैश स्मेल्टिंग तकनीक का उपयोग किया है, जिसके जरिए 99.8 प्रतिशत सल्फर उत्सर्जन को अवशोषित कर उच्च गुणवत्ता वाले सल्फ्यूरिक एसिड और फॉस्फोरिक उर्वरकों में परिवर्तित किया जा रहा है।

 Adani Kutch Copper: 1.2 अरब डॉलर का भारी निवेश और स्थानीय रोजगार सृजन

इस मेगा इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट में अदाणी समूह द्वारा किए जा रहे 1.2 अरब डॉलर के भारी निवेश से गुजरात के कच्छ क्षेत्र में व्यापक सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नींव पड़ रही है। इस परियोजना के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव से इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स और संबद्ध विनिर्माण क्षेत्रों में हजारों कुशल और अर्ध-कुशल रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं।
कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से मुंद्रा और आसपास के ग्रामीण अंचलों में उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं, आधुनिक प्राथमिक शिक्षा, पेयजल उपलब्धता और युवाओं के लिए कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचे का यह विकास औद्योगिक प्रगति के साथ जन-कल्याण के समावेशी मॉडल को प्रस्तुत करता है।

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