How to Make Falahari Atta at Home: नवरात्रि व्रत के लिए कुट्टू, सिंगाड़ा, साबूदाना, शकरकंद और राजगिरा का आटा बनाने का आसान तरीका
How to Make Falahari Atta at Home: नवरात्रि व्रत के लिए कुट्टू, सिंगाड़ा, साबूदाना, शकरकंद और राजगिरा का आटा बनाने का आसान तरीका
How to Make Falahari Atta at Home: नवरात्रि के नौ दिनों के व्रत में फलाहारी व्यंजन बनाने के लिए ज्यादातर लोग बाजार से आटा खरीदते हैं। लेकिन थोड़ी-सी मेहनत से घर पर ही शुद्ध और ताजा फलाहारी आटा तैयार किया जा सकता है। कुट्टू, साबूदाना, शकरकंद, राजगिरा और सिंगाड़े का आटा घर पर बनाना मुश्किल नहीं है, बस कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
तैयार आटे को साफ और सूखे एयरटाइट डिब्बे में रखा जा सकता है और जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे व्रत में रोटी, पूरी, पराठे, चीला, पकौड़े और हलवा जैसी कई चीजें बन सकती हैं। इन सभी आटों में पीसने के बाद छानना और मोटे हिस्से को दोबारा पीसना जरूरी बताया गया है। नमी वाली चीजों को पूरी तरह सुखाना भी जरूरी है।
How to Make Falahari Atta at Home: कुट्टू का आटा बनाने की विधि
कुट्टू का आटा बनाने के लिए एक कप साबुत कुट्टू के दाने चाहिए। सबसे पहले दानों को अच्छी तरह साफ करें और उनमें मौजूद कंकड़ या दूसरी अशुद्धियां निकाल दें। अगर दानों को धोते हैं, तो उन्हें पूरी तरह सुखाना जरूरी है।
इसके बाद सूखी कड़ाही में मध्यम आंच पर दानों को तीन से पांच मिनट तक हल्का भून लें। दाने ज्यादा न भुनें, वरना स्वाद बदल सकता है। चाहें तो बिना भूने दानों से भी आटा बनाया जा सकता है। दाने ठंडे होने पर उन्हें मिक्सर में बारीक पीसें, महीन छलनी से छानें और मोटे दाने दोबारा पीस लें। इस आटे से रोटी, पूरी, पराठे और पकौड़े बनाए जा सकते हैं।
सिंगाड़े का आटा कैसे तैयार करें
सिंगाड़े का आटा बनाने के लिए जरूरत के अनुसार कच्चे सिंगाड़े लें। पहले इनके छिलके उतारकर अच्छी तरह धो लें। फिर छोटे टुकड़ों में काटकर साफ प्लेट या ट्रे में फैला दें।
टुकड़ों को धूप में तब तक सुखाएं, जब तक वे पूरी तरह कड़क न हो जाएं। नमी रह जाने पर आटा जल्दी खराब हो सकता है। सूखने के बाद इन्हें ठंडा करके मिक्सर में बारीक पीसें और पाउडर को छलनी से छान लें। मोटे टुकड़े दोबारा पीसे जा सकते हैं। इस आटे से पूरी, हलवा, पराठे और चीला जैसी चीजें बनाई जा सकती हैं।
साबूदाने का आटा बनाने का तरीका
साबूदाने का आटा बनाने के लिए आधा कप साबूदाना चाहिए। मध्यम आंच पर सूखी कड़ाही गर्म करें और उसमें साबूदाना डालकर पांच से दस मिनट तक हल्का भूनें। इसे लगातार चलाते रहें, ताकि दाने जलें नहीं।
जब दाने अच्छी तरह सूख जाएं, तो गैस बंद करके उन्हें पूरी तरह ठंडा होने दें। फिर मिक्सर में बारीक पीसें और छलनी से छान लें। मोटे दाने बचें तो दोबारा पीस लें। एयरटाइट डिब्बे में रखे इस आटे से चीला, थालीपीठ और दूसरी फलाहारी डिश बन सकती हैं।
शकरकंद का आटा कैसे बनता है
शकरकंद का आटा बनाने के लिए जरूरत के अनुसार शकरकंद लें। पहले उन्हें अच्छी तरह धोकर छील लें और पतले, छोटे टुकड़ों में काट लें। इन टुकड़ों को साफ प्लेट या ट्रे में फैलाकर धूप में पूरी तरह सूखने दें।
अगर धूप न हो, तो कम तापमान पर ओवन की मदद से भी इन्हें सुखाया जा सकता है। ध्यान रहे कि टुकड़ों में बिल्कुल नमी न रहे। अच्छी तरह सूखने के बाद ठंडा करके मिक्सर में बारीक पीसें, छानें और साफ, सूखे एयरटाइट डिब्बे में रखें। इस आटे से व्रत में चीला, रोटी और दूसरी फलाहारी रेसिपी बनाई जा सकती हैं।
राजगिरा का आटा बनाने की विधि
राजगिरा यानी रामदाना का आटा बनाने के लिए 500 ग्राम साबुत राजगिरा चाहिए। पहले दानों को अच्छी तरह साफ करें। फिर सूखी कड़ाही गर्म करके उसमें राजगिरा डालें और मध्यम आंच पर तीन से पांच मिनट तक हल्का भूनें।
दानों को लगातार चलाते रहें और ज्यादा न भुनने दें। इसके बाद उन्हें प्लेट में निकालकर पूरी तरह ठंडा होने दें। मिक्सर में थोड़ा-थोड़ा करके बारीक पीसें, महीन छलनी से छानें और मोटे हिस्से को दोबारा पीस लें। इस आटे से व्रत में रोटी, पराठे, चीला और पूरी बनाई जा सकती है।
आटा बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
पांचों आटों में कुछ बातें समान हैं। दानों को साफ करना, भूनने में ज्यादा आंच या समय से बचना और पीसने से पहले ठंडा होने देना जरूरी है। छानने के बाद बचे मोटे हिस्से को दोबारा पीसने से आटा महीन बनता है।
सिंगाड़े और शकरकंद जैसे ताजे कंद वाले आटों में नमी पूरी तरह सुखाना सबसे अहम है। तैयार आटे को हमेशा साफ, सूखे और एयरटाइट डिब्बे में रखें। आटा कितने दिन तक सुरक्षित रहेगा, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है, इसलिए कम मात्रा में बनाना समझदारी होगी।
घर पर फलाहारी आटा बनाकर नवरात्रि के व्रत में शुद्ध और ताजा सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। कुट्टू, राजगिरा और साबूदाना को सूखी कड़ाही में हल्का भूनकर पीसा जाता है, जबकि सिंगाड़े और शकरकंद को पहले टुकड़ों में काटकर पूरी तरह सुखाया जाता है। हर आटे को छानकर मोटे हिस्से को दोबारा पीसना और एयरटाइट डिब्बे में रखना जरूरी है। इनसे रोटी, पूरी, पराठे, चीला, पकौड़े और हलवा जैसे व्यंजन बनाए जा सकते हैं।
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