Stock Market: नवरात्रि 2025 से 2026 तक 11% टूटा निफ्टी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार बेहाल

विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली और कच्चे तेल की महंगाई से दबाव में रहा शेयर बाजार, जानें पूरी वजह

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Stock Market: भारतीय शेयर बाजार के लिए संवत और नवरात्रि चक्र के लिहाज से बीता एक वर्ष बेहद चुनौतीपूर्ण और उठापटक भरा साबित हुआ है। नवरात्रि 2025 से लेकर शारदीय नवरात्रि 2026 के बीच के इस पूरे कालखंड में दलाल स्ट्रीट के बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 में लगभग 11 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। भारत की मजबूत जीडीपी वृद्धि, नियंत्रित राजकोषीय घाटे और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) के लगातार समर्थन के बावजूद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की आक्रामक बिकवाली, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल में उछाल ने घरेलू इक्विटी बाजार की कमर तोड़ दी। इस नकारात्मक माहौल में निफ्टी के 50 में से 31 दिग्गज शेयरों ने निवेशकों को भारी नुकसान कराया, जबकि चुनिंदा बुनियादी रूप से मजबूत कंपनियों ने विपरीत परिस्थितियों में भी उल्लेखनीय रिटर्न देकर अपनी चमक बिखेरी।

Stock Market: वैश्विक भू-राजनीतिक संकट और कच्चे तेल का दबाव बना प्रमुख कारण

नवरात्रि 2025 से 2026 के दौरान बाजार की धारणा को सबसे ज्यादा नुकसान पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात ने पहुंचाया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं गहरा गईं। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, जिसके चलते तेल की बढ़ती कीमतों ने सीधे तौर पर देश के आयात बिल, चालू खाता घाटे (CAD) और मुद्रास्फीति के अनुमानों पर प्रतिकूल असर डाला।
कच्चे तेल की महंगाई के साथ-साथ अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में देरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स में आए उछाल ने उभरते बाजारों से पूंजी को सुरक्षित अमेरिकी परिसंपत्तियों की ओर मोड़ने का काम किया। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये पर लगातार बने दबाव ने अंतरराष्ट्रीय फंड्स के मुनाफे को कम किया, जिसके चलते बड़े फंड हाउसों ने भारतीय इक्विटी से जोखिम कम करते हुए नकदी जुटाने को प्राथमिकता दी।

विदेशी निवेशकों (FPI) की रिकॉर्ड बिकवाली और घरेलू संस्थागत निवेशकों का सहारा

शेयर बाजार में लगातार बने दबाव का सबसे प्रमुख तकनीकी कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी पूंजी निकासी रही। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग ₹3.04 लाख करोड़ की शुद्ध निकासी कर डाली है। इससे पहले वर्ष 2025 में भी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने करीब ₹1.66 लाख करोड़ मूल्य के शेयरों की भारी बिकवाली की थी।
लगातार दो वर्षों में विदेशी पूंजी का यह प्रचंड बहिर्गमन ऐतिहासिक स्तर पर रहा है। हालांकि, इस भारी बिकवाली के बीच घरेलू म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियों और खुदरा निवेशकों (SIP रूट के जरिए) ने अभूतपूर्व मजबूती दिखाई और लगभग ₹4 लाख करोड़ से अधिक की शुद्ध खरीदारी करके बाजार को भीषण क्रैश से संभाले रखा। इसके बावजूद, वैश्विक फंड्स के भारी सेलिंग वॉल्यूम के सामने घरेलू खरीदारी केवल बाजार को सीमित दायरे में ही थाम सकी और सूचकांक को गिरावट से नहीं बचा पाई।

दिग्गज लार्जकैप्स में 30% तक की भारी गिरावट से निवेशक पस्त

इस एक वर्ष की मंदी का सबसे बड़ा प्रभाव उन लार्जकैप शेयरों पर पड़ा जो पारंपरिक रूप से विदेशी निवेशकों के पसंदीदा रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक निफ्टी 50 के कुल 50 शेयरों में से 31 शेयरों ने नकारात्मक रिटर्न दिया, जिसमें आईटी, एफएमसीजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर के ब्लूचिप शेयर सबसे आगे रहे।
दिग्गज एफएमसीजी कंपनी आईटीसी, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, प्रमुख टेक दिग्गज इंफोसिस, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयरों में 30 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त वित्तीय और ऑटो क्षेत्र के अन्य दिग्गजों—एचडीएफसी बैंक, एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस, मारुति सुजुकी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मैक्स हेल्थकेयर में 22 से 29 प्रतिशत तक की तेज कमजोरी देखी गई। इन बड़े शेयरों के धराशायी होने से पोर्टफोलियो निवेशकों की संपत्ति में भारी सेंध लगी।

मंदी के भंवर में भी चमके ये चुनिंदा शेयर, श्रीराम फाइनेंस टॉप गेनर

गिरावट के इस व्यापक दौर में भी कुछ चुनिंदा कंपनियों ने मजबूत बैलेंस शीट और घरेलू मांग के दम पर शानदार प्रदर्शन दर्ज किया। निफ्टी 50 के सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले शेयरों में श्रीराम फाइनेंस शीर्ष पर रहा, जिसके शेयरों ने पिछले एक वर्ष में करीब 49 प्रतिशत की जोरदार तेजी दर्ज की।
कंज्यूमर और कमोडिटी क्षेत्र से टाइटन कंपनी, अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड और मेटल दिग्गज हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के शेयरों में 21 से 27 प्रतिशत तक की ठोस बढ़त दर्ज की गई। बैंकिंग और एफएमसीजी क्षेत्र से भारतीय स्टेट बैंक (SBI), एक्सिस बैंक और नेस्ले इंडिया ने भी चुनौतीपूर्ण बाजार में निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न प्रदान किया। यह रुख दर्शाता है कि संकट के समय में भी मजबूत अर्निंग विजिबिलिटी और सेक्टर-विशिष्ट तेजी वाले शेयर खुद को सुरक्षित रखने में कामयाब रहे।

Stock Market: दूसरी तिमाही के नतीजे और आगे की बाजार दिशा

दलाल स्ट्रीट के जानकारों के अनुसार आने वाले महीनों में बाजार की रिकवरी काफी हद तक कॉरपोरेट कंपनियों के दूसरी तिमाही (Q2 FY27) के वित्तीय नतीजों और कच्चे तेल के रुख पर टिकी होगी। यदि कंपनियों की आय वृद्धि में सुधार दिखता है और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला शुरू होता है, तो विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली की रफ्तार धीमी हो सकती है।
वर्तमान परिदृश्य में निवेशकों को अत्यधिक आक्रामक दांव लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से उच्च गुणवत्ता वाले लार्जकैप शेयरों में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) जारी रखने और रक्षात्मक क्षेत्रों में जोखिम को संतुलित रखने की सलाह दी जा रही है।

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