Joint Pain Causes: क्या कम उम्र में ही सताने लगा है जोड़ों का दर्द? बुढ़ापे से पहले आपकी ये 5 खराब आदतें बना रही हैं आपको लाचार

Joint Pain Causes: युवाओं में क्यों बढ़ रहा जोड़ों का दर्द?

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Joint Pain Causes: आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी और आधुनिक लाइफस्टाइल में स्वास्थ्य से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली समस्या सामने आ रही है। देश भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा जारी रिपोर्टों के अनुसार, जोड़ों का दर्द (जॉइंट पेन) अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गया है। आज के समय में महज 25 से 30 साल के युवा भी घुटनों, कमर और गर्दन के दर्द से बुरी तरह परेशान हैं। कम उम्र में जोड़ों के इस दर्द की मुख्य वजह कोई जेनेटिक बीमारी नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की 5 बेहद खराब आदतें हैं। ये गलतियां धीरे-धीरे हमारे जोड़ों के कार्टिलेज को डैमेज कर रही हैं, जिससे ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा पैदा हो रहा है। यदि समय रहते इन संकेतों को समझकर अपनी आदतों में सुधार नहीं किया गया, तो जवानी में ही शरीर पूरी तरह कमजोर हो सकता है।

Joint Pain Causes: आदतों का कार्टिलेज पर सीधा प्रहार, कैसे शुरू होती है जोड़ों की बर्बादी?

जब युवा उम्र में लोग अपनी सेहत को नजरअंदाज करते हैं, तो इसका सबसे बुरा असर उनके जोड़ों के बीच मौजूद सुरक्षात्मक परत यानी ‘कार्टिलेज’ पर पड़ता है। कार्टिलेज का मुख्य काम हड्डियों को आपस में टकराने से रोकना और उन्हें सुचारू रूप से काम करने में मदद करना होता है।

हमारी गलत आदतों के कारण इन कार्टिलेज में धीरे-धीरे टूट-फूट शुरू हो जाती है और वहां खतरनाक सूजन बढ़ने लगती है। जब यह सूजन लंबे समय तक ठीक नहीं होती, तो यह जोड़ों को स्थाई रूप से जाम कर देती है। चिकित्सा विज्ञान में इसी स्थिति को ऑस्टियोआर्थराइटिस कहा जाता है, जिसका इलाज बेहद पेचीदा और खर्चीला होता है।

1. घंटों एक ही जगह और एक ही पोजीशन में बैठे रहना

आजकल की डिजिटल और डेस्क जॉब वाली लाइफस्टाइल में लोग एक ही जगह पर लगातार कई घंटों तक बैठे रहते हैं। चाहे ऑफिस में कंप्यूटर के सामने 8 घंटे काम करना हो या फिर घर पर सोफे पर बैठकर लगातार मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल करना हो, यह आदत रीढ़ और घुटनों के लिए जहर के समान है।

विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों और मेडिकल रिसर्च में यह पाया गया है कि लगातार एक ही पोजीशन में बैठे रहने से हमारे जोड़ों के आसपास का ब्लड सर्कुलेशन (रक्त संचार) बेहद धीमा हो जाता है। इसके कारण जोड़ों को चिकनाई देने वाले ‘सिनोवियल फ्लूइड’ का नेचुरल फ्लो कम हो जाता है। जब जोड़ों को पर्याप्त चिकनाई नहीं मिलती, तो घुटनों, कमर और गर्दन में तेज जकड़न होने लगती है और हड्डियां घिसने लगती हैं।

2. फिजिकल एक्टिविटी से पूरी तरह दूरी बना लेना

आज के समय में युवाओं ने पैदल चलना या शारीरिक मेहनत करना लगभग बंद ही कर दिया है। जब हमारे शरीर को नियमित रूप से हिलने-डुलने या मूवमेंट करने का मौका नहीं मिलता है, तो शरीर की मांसपेशियां (मसल्स) धीरे-धीरे बेहद कमजोर और निष्क्रिय होने लगती हैं।

मेडिकल रिसर्च साफ इशारा करती हैं कि जब मांसपेशियां कमजोर होती हैं, तो शरीर का पूरा वजन संभालने का दबाव सीधे तौर पर घुटनों और कूल्हों (हिप जॉइंट्स) पर आ जाता है। फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण जॉइंट्स बहुत जल्दी खराब हो जाते हैं। इस गंभीर स्थिति से बचने के लिए युवाओं को अपनी डेली रूटीन में लाइट एक्सरसाइज, मॉर्निंग वॉक, स्ट्रेचिंग और योग जैसी आदतों को तुरंत शामिल करना चाहिए।

3. शरीर का बढ़ता वजन और मोटापे को न रोक पाना

गलत खान-पान और जंक फूड के अत्यधिक सेवन के कारण आज का हर दूसरा युवा मोटापे या बढ़े हुए वजन की समस्या से जूझ रहा है। जब आपके शरीर का वजन उसकी सामान्य क्षमता से अधिक हो जाता है, तो इसका सबसे पहला और सीधा कड़ा प्रहार आपके निचले जोड़ों पर होता है।

वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, जब आपका वजन बढ़ा हुआ होता है, तो चलते या दौड़ते समय आपके हर एक कदम के साथ घुटनों और टखनों (एंकल्स) पर सामान्य से कई गुना अधिक दबाव पड़ता है। यह अतिरिक्त प्रेशर कार्टिलेज को बहुत तेजी से घिसने और फाड़ने का काम करता है। यही कारण है कि मोटापे से पीड़ित युवाओं में ऑस्टियोआर्थराइटिस और क्रोनिक जॉइंट पेन का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में बहुत ज्यादा देखा जाता है।

4. गलत पोश्चर और खराब बॉडी मैकेनिक्स अपनाना

बैठते, खड़े होते या चलते समय अपने शरीर के पोश्चर (मुद्रा) पर ध्यान न देना भी जोड़ों को समय से पहले बूढ़ा बना रहा है। हर समय आगे की तरफ झुककर बैठना, गर्दन को मोबाइल की तरफ झुकाए रखना, या खड़े होते समय किसी एक पैर पर पूरा वजन डालकर खड़े होना, आपके जोड़ों पर असमान प्रेशर डालता है।

मेडिकल फिजियोथेरेपी के सिद्धांतों के अनुसार, अगर आपका बॉडी पोश्चर हमेशा ही गलत रहता है, तो इससे आपके पूरे कंकाल तंत्र (नेचुरल स्केलेटल स्ट्रक्चर) का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके कारण जोड़ों में अचानक तेज दर्द, लिगामेंट में खिंचाव और सूजन की गंभीर दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। इससे बचने के लिए हमेशा रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और जमीन से कोई भी भारी सामान उठाते समय घुटनों को मोड़कर सही कूटनीतिक तकनीक का इस्तेमाल करें।

5. Joint Pain Causes: लगातार ठंडा माहौल और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)

आजकल लोग ऑफिस से लेकर घर तक हर समय एयर कंडीशनर (AC) के अत्यधिक ठंडे माहौल में रहना पसंद करते हैं। जब आप लंबे समय तक ऐसे बहुत ठंडे माहौल में रहते हैं, तो आपके शरीर को आवश्यक प्राकृतिक गर्माहट नहीं मिल पाती है। गर्माहट की कमी के कारण जोड़ों की नसें सिकुड़ जाती हैं और वहां जकड़न व दर्द की समस्या दोगुनी रफ्तार से बढ़ जाती है।

इसके अलावा, दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना यानी डिहाइड्रेशन भी इसका एक बड़ा छुपा हुआ कारण है। वैज्ञानिक रिसर्च के मुताबिक, जब शरीर पूरी तरह हाइड्रेटेड रहता है, तभी जोड़ों में सिनोवियल फ्लूइड यानी ग्रीस की क्वालिटी अच्छी बनी रहती है। पानी की कमी सीधे तौर पर इस फ्लूइड को सुखा देती है, जिससे जोड़ों की फ्लेक्सिबिलिटी (लचीलापन) खत्म हो जाती है और मामूली मूवमेंट करने पर भी हड्डियों में रगड़ और तेज दर्द का अहसास होने लगता है।

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