Indore News: कन्या भोज के लिए बुलाई गईं 7 बच्चियों से मारपीट का आरोप, पूर्व शिक्षिका के खिलाफ जांच शुरू
इंदौर में कन्या भोज के दौरान सात बच्चियों से मारपीट का आरोप, पुलिस ने जांच शुरू की
Indore News: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से विजयादशमी पर्व के दौरान एक बेहद संवेदनशील और विचलित करने वाला मामला सामने आया है। धार्मिक परंपरा के तहत कन्या भोज के लिए आमंत्रित की गईं सात नाबालिग बच्चियों को कमरे में बंधक बनाकर पीटने और उनके साथ अमानवीय व्यवहार करने का गंभीर आरोप एक सेवानिवृत्त सरकारी शिक्षिका पर लगा है। परिजनों के अनुसार, महिला ने घर से कथित तौर पर पांच सौ रुपये चोरी होने का मनगढ़ंत संदेह जताते हुए मासूम बच्चियों के कपड़े उतरवाकर तलाशी ली और उनके साथ मारपीट की। घटना के बाद रोती-बिलखती बच्चियों ने जब घर पहुंचकर आपबीती सुनाई, तो इलाके में आक्रोश फैल गया। परिजन तत्काल बच्चियों को लेकर संबंधित थाने पहुंचे, जहां पुलिस ने औपचारिक शिकायत दर्ज कर मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है।
Indore News: कन्या भोज के नाम पर बुलाया और लगाया चोरी का आरोप
प्राप्त विवरण के अनुसार, यह शर्मनाक घटना इंदौर के पलासिया थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित शहनाई रेसिडेंसी के एक आवासीय फ्लैट की है। नया बसेरा क्षेत्र की रहने वाली लगभग सात से दस वर्ष आयु वर्ग की सात बच्चियों को विजयादशमी के पावन अवसर पर कन्या भोज कराने, उपहार देने और नकद दक्षिणा देने की बात कहकर आमंत्रित किया गया था। आरोपी महिला की पहचान अनिता मोहता के रूप में हुई है, जो पूर्व में शासकीय विद्यालय में शिक्षिका रह चुकी हैं।
बच्चियों और उनके परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जब सभी बच्चियां महिला के फ्लैट में पहुंचीं, तो उसने अचानक आरोप लगाया कि उसके कमरे में रखे 500 रुपये के दो नोट गायब हैं। बच्चियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने कोई पैसा नहीं छुआ है, किंतु महिला ने उनकी एक न सुनी और आक्रोशित होकर फ्लैट का मुख्य दरवाजा भीतर से बंद कर दिया। आरोप है कि इसके बाद उसने बच्चियों को एक कमरे में कैद कर लिया और उन्हें धमकाना शुरू कर दिया।
बंधक बनाकर मारपीट और अमानवीय व्यवहार का आरोप
थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, आरोपी महिला ने बच्चियों पर चोरी कबूलने का दबाव बनाते हुए उन्हें डंडे और थप्पड़ों से बुरी तरह पीटा। इतना ही नहीं, रुपयों की तलाशी लेने के बहाने बच्चियों के कपड़े उतरवाए गए और उन्हें घंटों तक भय के साए में बंधक बनाकर रखा गया।
मासूम बच्चियों के गिड़गिड़ाने और रोने के बावजूद महिला का दिल नहीं पसीजा। काफी देर तक चले इस मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के बाद जब महिला को उनके पास से कुछ नहीं मिला, तो उसने बच्चियों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देकर घर से बाहर निकाल दिया। इस अमानवीय कृत्य के कारण बच्चियां गहरे मानसिक सदमे में आ गईं और घर पहुंचकर परिजनों के सामने रोने लगीं।
परिजनों का फूटा आक्रोश: थाने पहुंचकर की सख्त कार्रवाई की मांग
घटना की जानकारी मिलते ही नया बसेरा क्षेत्र के सैकड़ों रहवासी और पीड़ित बच्चियों के परिजन एकत्रित हो गए। आक्रोशित परिजन सभी सात बच्चियों को साथ लेकर सीधे एमआईजी और पलासिया थाने पहुंचे और आरोपी पूर्व शिक्षिका के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की।
थाना परिसर में परिजनों ने जमकर विरोध दर्ज कराया और कहा कि धार्मिक अनुष्ठान के नाम पर गरीब बस्तियों की मासूम बच्चियों को बुलाकर इस तरह का बर्बर व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने परिजनों को शांत कराया और निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया। पुलिस अधिकारियों ने बाल कल्याण समिति (CWC) और महिला जांच अधिकारियों की निगरानी में सभी पीड़ित बच्चियों के विस्तृत बयान दर्ज किए हैं।
पूर्व शिक्षिका से पूछताछ: हिरासत और कानूनी धाराएं
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी महिला अनिता मोहता को पूछताछ के लिए थाने तलब किया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, महिला पूर्व में नया बसेरा क्षेत्र के ही एक सरकारी स्कूल में करीब 10 से 12 वर्षों तक अध्यापन कार्य करा चुकी है, जिसके चलते वह बस्ती के परिवारों और बच्चों से पूर्व-परिचित थी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बच्चियों के शारीरिक परीक्षण (मेडिकल जांच) की प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम यानी पॉक्सो व जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की सुसंगत धाराओं के तहत दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या महिला पहले भी इस तरह के संदेहास्पद व्यवहार में संलिप्त रही है।
Indore News: सामाजिक चेतना और बाल सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
विजयादशमी और नवरात्रि जैसे पावन अवसरों पर कन्या पूजन की सनातन परंपरा बालिकाओं को देवी स्वरूप मानकर उनके सम्मान और आदर का संदेश देती है। ऐसे पावन पर्व पर एक शिक्षित और पूर्व शिक्षिका द्वारा मासूम बच्चियों के साथ इस प्रकार का क्रूरतापूर्ण बर्ताव समाज के लिए चिंता का विषय है।
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए प्रशासन से आरोपी महिला पर त्वरित दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर बिना किसी दबाव के वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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