Delhi Air Pollution: दशहरा के बाद दिल्ली की हवा होगी खराब, 21 अक्टूबर से बढ़ेगा प्रदूषण; जानें AQI का हाल
दशहरा के बाद दिल्ली-NCR की हवा बिगड़ने का अनुमान, जानें AQI, प्रदूषण के कारण और बचाव के उपाय
Delhi Air Pollution: दशहरा और विजयादशमी उत्सव के संपन्न होते ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और पूरे एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने की आशंका गहरा गई है। अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में तापमान में आ रही क्रमिक गिरावट, मंद पड़ती सतही हवाएं और उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली वायु धाराओं के कारण वायुमंडल में प्रदूषक तत्वों का जमाव तेज होने लगा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मौसम पूर्वानुमान एजेंसियों के अनुसार, पिछले सौ दिनों से संतोषजनक या मध्यम श्रेणी में बनी दिल्ली की आबोहवा बुधवार, 21 अक्टूबर से आधिकारिक तौर पर ‘खराब’ (Poor) श्रेणी में प्रवेश कर सकती है। आने वाले दिनों में यह स्थिति श्वसन तंत्र के रोगियों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियां खड़ी कर सकती है।
Delhi Air Pollution: दशहरा के बाद क्यों बिगड़ने लगती है दिल्ली की आबोहवा? मौसमी और स्थानीय कारक
अक्टूबर के उत्तरार्ध में दिल्ली के वायुमंडल में मौसमी बदलाव का दौर आरंभ हो जाता है, जिसे ‘विंटर इनवर्जन’ (शीतकालीन तापीय व्युत्क्रमण) की शुरुआत कहा जाता है। इस अवधि में रात के तापमान में गिरावट के कारण ठंडी हवा भारी होकर जमीन के करीब बैठ जाती है, जिससे धूल और धुएं के सूक्ष्म कण ऊपर वायुमंडल में फैलने के बजाय सतह के निकट ही फंस जाते हैं। विजयादशमी पर पुतला दहन और आतिशबाजी से निकलने वाला धुआं स्थानीय स्तर पर सूक्ष्म कणों (PM2.5 और PM10) की सांद्रता को तात्कालिक रूप से बढ़ा देता है।
इसके अतिरिक्त, हवा की गति घटकर दस किलोमीटर प्रति घंटे से नीचे चले जाने और वेंटिलेशन इंडेक्स (वायु प्रसार क्षमता) के छह हजार वर्ग मीटर प्रति सेकंड से कम हो जाने से प्रदूषक कणों का फैलाव पूरी तरह रुक जाता है। दिल्ली की अपनी आंतरिक भौगोलिक स्थिति और चारों तरफ से घिरे होने के कारण वाहनों से निकलने वाली जहरीली गैसें, अनियंत्रित निर्माण कार्यों की उड़ती धूल और सड़कों की गर्द मिलकर एक घनी धुंध की चादर तैयार कर देती हैं।
21 अक्टूबर से ‘खराब’ श्रेणी में AQI: अर्ली वार्निंग सिस्टम की चेतावनी
वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली (Air Quality Early Warning System – AQEWS) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) पुणे के आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 179 दर्ज किया गया था, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। हालांकि, बुधवार 21 अक्टूबर से हवा की रफ्तार और मंद पड़ने के चलते यह आंकड़ा दो सौ के पार पहुंचकर ‘खराब’ श्रेणी में जाने का स्पष्ट पूर्वानुमान जताया गया है।
प्रदूषण निगरानी स्टेशनों के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कई अति-संवेदनशील औद्योगिक और घनी आबादी वाले हॉटस्पॉट्स जैसे आनंद विहार, वजीरपुर, जहांगीरपुरी, बवाना और मुंडका में सुबह और देर रात के समय स्थानीय स्तर पर AQI तीन सौ के करीब भी पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह चालू सीजन का पहला ऐसा चरण होगा जब राष्ट्रीय राजधानी लगातार कई दिनों तक खराब वायु गुणवत्ता का सामना करेगी।
वाहनों का उत्सर्जन और पड़ोसी राज्यों में पराली का दोहरा संकट
IITM के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) द्वारा जारी उत्सर्जन विश्लेषण के मुताबिक, दिल्ली के अपने आंतरिक प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे प्रमुख बनी हुई है। राजधानी की सड़कों पर रोजाना दौड़ने वाले लाखों चौपहिया, दोपहिया और व्यावसायिक डीजल वाहनों से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड वातावरण को अत्यधिक दूषित कर रहे हैं।
इसके साथ ही, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्रों में धान की कटाई के बाद रबी फसलों की बुवाई के लिए पराली जलाने (खेतों में आग लगाने) की घटनाओं में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। जब भी हवा का रुख उत्तर-पश्चिम की ओर होता है, तो इन खेतों का धुआं दिल्ली के वायुमंडल में प्रवेश कर PM2.5 के स्तर को खतरनाक ऊंचाई पर पहुंचा देता है। आगामी दिनों में पराली के धुएं की हिस्सेदारी दिल्ली की हवा में तीन गुनी तक बढ़ने का अनुमान है।
AQI की श्रेणियां और स्वास्थ्य पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के वायु गुणवत्ता सूचकांक पैमाने के तहत शून्य से 50 के बीच AQI को ‘अच्छा’, 51 से 100 को ‘संतोषजनक’, 101 से 200 को ‘मध्यम’, 201 से 300 को ‘खराब’, 301 से 400 को ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच को ‘गंभीर’ श्रेणी में वर्गीकृत किया जाता है।
जब सूचकांक 200 के पार ‘खराब’ स्तर पर पहुंचता है, तो वातावरण में तैरने वाले अति-सूक्ष्म कण सीधे सांस नली के जरिए फेफड़ों और रक्तप्रवाह में प्रवेश करने लगते हैं। इसके प्रभाव से स्वस्थ व्यक्तियों में भी आंखों में जलन, गले में खराश, लगातार खांसी और सिरदर्द की शिकायतें शुरू हो जाती हैं। दमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों में सांस फूलने और अस्थमा अटैक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) और प्रशासनिक तैयारियां
दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने बिगड़ती स्थिति को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के पहले चरण को सख्ती से लागू करने की रूपरेखा तैयार कर ली है। इसके तहत सभी बड़े निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन का संचालन अनिवार्य किया गया है और निर्माण सामग्री को ढककर रखने के निर्देश दिए गए हैं। सड़कों से धूल उड़ाने से रोकने के लिए मैकेनाइज्ड स्वीपिंग और पानी के छिड़काव की गति तेज की जा रही है।
प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) के बिना चलने वाले वाहनों के खिलाफ सघन चालान अभियान शुरू किया जा रहा है और अंतरराज्यीय सीमाओं पर प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाणिज्यिक वाहनों की निगरानी बढ़ा दी गई है। सरकारी विभागों को सार्वजनिक परिवहन के अधिकतम उपयोग, मेट्रो के अतिरिक्त फेरे बढ़ाने और निजी संस्थानों को पचास प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की सुविधा पर विचार करने के सुझाव दिए जा रहे हैं।
Delhi Air Pollution: बढ़ते प्रदूषण से खुद को और परिवार को सुरक्षित रखने के जरूरी उपाय
बढ़ते वायु प्रदूषण के इस दौर में नागरिकों को अपने दैनिक व्यवहार में एहतियाती कदम उठाने की सख्त सलाह दी जाती है। सुबह और देर शाम के समय जब हवा में प्रदूषकों की सघनता सबसे अधिक होती है, उस दौरान पार्कों में भारी वर्कआउट, दौड़ लगाने या तेज वॉक करने से परहेज करें और इनडोर व्यायाम को प्राथमिकता दें। बाहर निकलते समय साधारण कपड़े के मास्क के बजाय एन-95 (N-95) मास्क का उपयोग करें जो सूक्ष्म PM2.5 कणों को रोकने में सक्षम होता है।
घरों के भीतर वायु गुणवत्ता बेहतर रखने के लिए खिड़कियों को दोपहर के समय ही खोलें जब धूप खिली हो, और संभव हो तो एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। शरीर से विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने के लिए दिनभर में पर्याप्त गुनगुना पानी पिएं, तुलसी-अदरक का काढ़ा लें और भाप का नियमित उपयोग करें। अपनी ओर से प्रदूषण कम करने के लिए निजी वाहनों के बजाय मेट्रो या इलेक्ट्रिक बसों का उपयोग करें, कारपूलिंग अपनाएं और कहीं भी खुले में कचरा या पत्ते जलाने से बचें।
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