टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में दो महिलाओं समेत 4 और गिरफ्तार, कुल 7 आरोपी पुलिस की गिरफ्त में

टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग मामले में दिल्ली पुलिस ने दो महिलाओं समेत 4 संदिग्ध पकड़े

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Tiger Shroff Firing Case: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ के वाहन पर मुंबई के जुहू इलाके में हुई अंधाधुंध गोलीबारी के मामले में सुरक्षा और जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ रही है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक सुनियोजित अंतरराज्यीय अभियान के तहत हमले के लिए अवैध हथियारों की तस्करी और लॉजिस्टिक्स आपूर्ति करने के आरोप में दो महिलाओं सहित चार और संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, इन चारों पर हमले में इस्तेमाल किए गए आधुनिक हथियारों की खेप दिल्ली-हरियाणा क्षेत्र से मुंबई तक पहुंचाने और शूटरों को हैंडओवर करने का गंभीर आरोप है। पटियाला हाउस कोर्ट से तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड प्राप्त होने के बाद चारों आरोपियों को आगे की गहन पूछताछ के लिए मुंबई क्राइम ब्रांच के हवाले कर दिया गया है। राजस्थान के कोटा से पकड़े गए तीन मुख्य हमलावरों के बाद अब इस बहुचर्चित गोलीबारी कांड में सलाखों के पीछे पहुंचे आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर सात हो गई है।

Tiger Shroff Firing Case: दिल्ली और हरियाणा से दबोचे गए चार नए आरोपी

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों की पहचान कुणाल (21) और सुमित (19) तथा दो युवतियों राधा (23) और बबीता (23) के रूप में की गई है। प्राथमिक जांच रिपोर्टों के अनुसार, कुणाल और सुमित हरियाणा के सोनीपत जिले के निवासी हैं, जबकि राधा और बबीता उत्तर प्रदेश के रहने वाली हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, हथियारों की तस्करी के लिए महिलाओं का सहारा इसलिए लिया गया ताकि अंतरराज्यीय सीमाओं, रेलवे स्टेशनों और जांच चौकियों पर सुरक्षा बलों को किसी प्रकार का संदेह न हो। राधा और बबीता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से उस समय पकड़ा गया जब वे दादर-हरिद्वार एक्सप्रेस के जरिए मुंबई से लौट रही थीं, जबकि कुणाल और सुमित को हरियाणा के सोनीपत से स्पेशल सेल की टीमों ने घेराबंदी करके दबोचा।

दिल्ली से दादर तक हथियारों की आपूर्ति: कूरियर मॉड्यूल का खुलासा

जांच एजेंसियों द्वारा तैयार किए गए क्राइम सीन और मूवमेंट चार्ट के अनुसार, इस पूरे हमले के पीछे एक सुनियोजित ‘कूरियर और लॉजिस्टिक्स मॉड्यूल’ काम कर रहा था। बताया गया है कि 17 अक्टूबर को दोनों युवतियां हथियारों से भरा बैग लेकर मुंबई पहुंची थीं और दादर रेलवे स्टेशन के पास एक होटल में रुकी थीं। योजना के मुताबिक, वहां एक स्थानीय हैंडलर अथवा नाबालिग लड़के ने राधा से संपर्क कर हथियारों का वह बैग प्राप्त किया, जिसे बाद में मोटरसाइकिल सवार हमलावरों तक पहुंचाया गया।

हमले के तुरंत बाद, विदेश में बैठे आपराधिक नेटवर्क के हैंडलर अनिल पंडित ने सोनीपत निवासी कुणाल से संपर्क किया और उसे सूचित किया कि गोलीबारी के बाद शूटर मुंबई में फंस गए हैं, इसलिए उनके सुरक्षित भागने (एग्जिट रूट) की तत्काल व्यवस्था की जाए। हालांकि, मुंबई पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की चौकसी के चलते हमलावर योजना के अनुसार छिप नहीं सके। पुलिस अब यह पड़ताल कर रही है कि इन चारों आरोपियों को इस खतरनाक काम के बदले कितना आर्थिक लाभ पहुंचाया गया था और क्या वे पहले भी किसी बड़े आपराधिक सिंडिकेट के लिए हथियार ढोने का काम कर चुके हैं।

अदालत से 3 दिन की ट्रांजिट रिमांड: मुंबई क्राइम ब्रांच करेगी आमने-सामने पूछताछ

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चारों संदिग्धों को राष्ट्रीय राजधानी की संबंधित अदालत में पेश कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसके बाद मामले की मूल विवेचना कर रही महाराष्ट्र पुलिस की विशेष जांच टीम ने अदालत से आरोपियों की हिरासत की मांग की। अदालत ने सभी कानूनी पहलुओं की समीक्षा के उपरांत मुंबई पुलिस को तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर दी।

मुंबई लाए जाने के बाद इन चारों नए आरोपियों को कोटा से गिरफ्तार किए गए तीनों मुख्य शूटरों के आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी। मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस संयुक्त पूछताछ से हथियारों के मूल स्रोत, वित्तीय लेन-देन के डिजिटल रिकॉर्ड, स्थानीय पनाहगाहों और हमले की अंतिम योजना तैयार करने वाले मास्टरमाइंड्स तक पहुंचने में अहम सुराग हाथ लग सकते हैं।

कोटा से पकड़े गए थे तीन शूटर: अब तक 7 गिरफ्तारियां

इससे पहले घटना के महज 48 घंटों के भीतर संयुक्त पुलिस अभियान के तहत राजस्थान के कोटा से तीन मुख्य शूटरों को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से दो हरियाणा और एक बिहार का रहने वाला बताया गया है। तकनीकी सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने इन शूटरों को राजस्थान की सीमा पर भागते समय धर दबोचा था।

अब हथियार सप्लायरों की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में कुल सात आरोपी पुलिस गिरफ्त में आ चुके हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि यह घटना किसी स्थानीय रंजिश का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके तार सीमा पार और विदेशों में बैठे संगठित अपराध सिंडिकेट्स के साथ जुड़े हुए हैं।

18 अक्टूबर का घटनाक्रम: जुहू में टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई थी फायरिंग

यह सनसनीखेज घटना 18 अक्टूबर की शाम लगभग सात बजे मुंबई के पॉश उपनगरीय इलाके जुहू स्थित पुष्पा नरसी पार्क के पास घटित हुई थी। अभिनेता टाइगर श्रॉफ जब अपनी लग्जरी बीएमडब्ल्यू कार से गुजर रहे थे, तभी एक मोटरसाइकिल पर सवार तीन अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने उनके वाहन को निशाना बनाकर कई राउंड गोलियां दागीं।

गोलीबारी के इस जानलेवा हमले में अभिनेता टाइगर श्रॉफ बाल-बाल बच गए और उन्हें कोई गोली नहीं लगी, हालांकि कांच टूटने से उन्हें हल्की खरोंचें आईं। दुर्भाग्यवश, वाहन चला रहे उनके निजी चालक फिरदौस इब्राहिम बलोच के बाएं हाथ में गोली लग गई और पास में मौजूद एक राहगीर उमेश चौहान भी गोली लगने से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत नानावटी व कूपर अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई है।

Tiger Shroff Firing Case: लॉरेंस बिश्नोई गैंग का कथित दावा और जांच का बढ़ता दायरा

घटना के कुछ ही घंटों बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट और कथित ऑडियो क्लिप के जरिए लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े गैंगस्टर अनिल पंडित और हरमन संधू ने इस हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। पोस्ट में अभिनेता को सलमान खान के साथ काम न करने की दी गई पुरानी चेतावनी की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया था।

मुंबई पुलिस कमिश्नर और राज्य के शीर्ष गृह अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 15 विशेष टीमों का गठन किया है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर किए गए दावों की फोरेंसिक पुष्टि की जा रही है और बॉलीवुड से जुड़े अन्य कलाकारों की सुरक्षा की भी व्यापक समीक्षा की गई है। स्पेशल सेल और मुंबई पुलिस की यह संयुक्त कार्रवाई दर्शाती है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां फिल्म जगत में दहशत फैलाने वाले किसी भी गिरोह के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए पूरी मुस्तैदी से काम कर रही हैं।

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