भारत में पहला बैरियर-फ्री MLFF टोल सिस्टम शुरू: सूरत के चोरयासी टोल प्लाजा पर बिना रुके 100 किमी/घंटा की रफ्तार से गुजर सकेंगे वाहन, फास्टैग और ANPR से होगा ऑटोमैटिक टोल कटौती
NHAI ने गुजरात के सूरत में चोरयासी टोल प्लाजा पर देश का पहला बैरियर-फ्री मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोल सिस्टम शुरू कर दिया। अब वाहनों को टोल के लिए रुकना नहीं पड़ेगा।
MLFF Toll System India: भारत के सड़क बुनियादी ढांचे और डिजिटल परिवहन के क्षेत्र में 1 मई 2026 का दिन एक ऐतिहासिक मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गया है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने गुजरात के सूरत के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-48 (NH-48) पर स्थित चोरयासी टोल प्लाजा पर देश का पहला बैरियर-फ्री मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोल सिस्टम आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया है। यह क्रांतिकारी तकनीक टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों और भौतिक बाधाओं को पूरी तरह समाप्त कर देती है। अब वाहन चालकों को टोल भुगतान के लिए अपनी गाड़ी रोकने या गति धीमी करने की आवश्यकता नहीं होगी। गाड़ियां 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सीधे गुजर सकेंगी और सड़क के ऊपर लगे हाई-टेक सेंसर व कैमरे स्वचालित रूप से टोल की कटौती कर लेंगे। यह कदम न केवल यात्रियों का कीमती समय बचाएगा, बल्कि ईंधन की खपत और प्रदूषण को कम करने में भी निर्णायक भूमिका निभाएगा।
MLFF Toll System India: MLFF तकनीक, कैसे काम करता है बिना रुकावट वाला टोल सिस्टम?
मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग समाधान है जो पारंपरिक टोल बूथों की जगह ‘गैंट्री’ (सड़क के ऊपर लगा एक ढांचा) का उपयोग करता है। इस गैंट्री पर कई उच्च-क्षमता वाले सेंसर, रडार और हाई-रेजॉल्यूशन कैमरे लगे होते हैं। जैसे ही कोई वाहन इस ढांचे के नीचे से गुजरता है, RFID सेंसर वाहन में लगे फास्टैग को मिलीसेकंड के भीतर स्कैन कर लेते हैं। पूरी प्रक्रिया इतनी निर्बाध होती है कि चालक को यह महसूस भी नहीं होता कि उसका टोल कट चुका है। यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों में यह तकनीक पहले से ही सफल रही है और अब सूरत के माध्यम से भारत ने भी इस वैश्विक मानक को अपना लिया है।
सूरत का चोरयासी टोल प्लाजा इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए एक रणनीतिक चुनाव है। दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर का हिस्सा होने के कारण यहाँ से प्रतिदिन हजारों की संख्या में भारी वाहन और निजी कारें गुजरती हैं। NHAI के आंकड़ों के अनुसार, यहाँ आने वाले 85 प्रतिशत से अधिक वाहन पहले से ही फास्टैग से लैस हैं, जो इस नई तकनीक के सफल परीक्षण के लिए एक आदर्श स्थिति प्रदान करता है। इस सिस्टम के लागू होने से अब पीक आवर्स के दौरान होने वाले ट्रैफिक जाम से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी, जिससे रसद (Logistics) की आवाजाही तेज और सस्ती होगी।
MLFF Toll System India: ANPR और फास्टैग, तकनीक का दोहरा सुरक्षा चक्र
MLFF सिस्टम केवल फास्टैग पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) तकनीक से भी लैस है। यदि किसी वाहन में फास्टैग नहीं है या उसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं है, तो गैंट्री पर लगे शक्तिशाली कैमरे 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर भी नंबर प्लेट की स्पष्ट फोटो खींच लेते हैं। यह डेटा सीधे ‘वाहन’ डेटाबेस से जुड़ा होता है, जिससे वाहन स्वामी की पहचान हो जाती है। इसके बाद टोल की राशि सीधे उनके लिंक किए गए खाते से काट ली जाती है या पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भुगतान का डिजिटल चालान भेज दिया जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी वाहन बिना टोल दिए सिस्टम से बचकर न निकल सके।
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि MLFF सिस्टम के कई व्यापक लाभ हैं। समय की बचत के अलावा, यह ईंधन की बर्बादी को 10 से 15 प्रतिशत तक कम कर सकता है क्योंकि इंजनों को टोल पर बार-बार चालू और बंद करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक अनुमान के मुताबिक, यदि इसे देशभर के प्रमुख राजमार्गों पर लागू कर दिया जाए, तो भारत अपनी वार्षिक लॉजिस्टिक्स लागत में लगभग 25,000 करोड़ रुपये की बचत कर सकता है। यह न केवल अर्थव्यवस्था को गति देगा बल्कि ‘ग्रीन हाईवे’ के संकल्प को भी मजबूती प्रदान करेगा।
भविष्य की राह: GPS आधारित टोलिंग की ओर बढ़ते कदम
सूरत में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट भारत के टोलिंग सिस्टम के भविष्य की केवल एक झांकी है। सरकार का अंतिम लक्ष्य GPS आधारित टोलिंग सिस्टम की ओर बढ़ना है, जहाँ टोल प्लाजा जैसी किसी भी भौतिक संरचना की आवश्यकता ही नहीं होगी। GPS आधारित सिस्टम में वाहन द्वारा तय की गई वास्तविक दूरी के आधार पर टोल काटा जाएगा, जिसे ‘पे-एज-यू-यूज़’ मॉडल कहा जाता है। MLFF तकनीक इस बड़े बदलाव के लिए एक महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रही है। इससे उन छोटे रूट वाले यात्रियों को भी लाभ होगा जो वर्तमान में पूरे टोल प्लाजा की राशि देने को मजबूर होते हैं।
अगले दो वर्षों में NHAI की योजना देश के 50 सबसे व्यस्त टोल प्लाजा को MLFF तकनीक से लैस करने की है। दिल्ली-जयपुर, बेंगलुरु-मैसूर और यमुना एक्सप्रेसवे जैसे व्यस्त मार्गों को इस सूची में प्राथमिकता दी जा रही है। 2027 तक भारत के शीर्ष 100 टोल प्लाजा पर बिना रुके यात्रा का सपना हकीकत में बदलने की उम्मीद है। सूरत से शुरू हुई यह तकनीक अंततः पूरे भारत के राजमार्गों को स्मार्ट, तेज और विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में एक बड़ा क्रांतिकारी कदम साबित होगी।
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