INDIA Alliance Rift: बैठक से पहले AAP और कांग्रेस आमने-सामने, संजय सिंह के बयान पर भड़की कांग्रेस; गरमाया सियासी माहौल
30 सितंबर की बैठक से पहले संजय सिंह के आरोपों पर कांग्रेस ने दिया जवाब, AAP बैठक से दूर
INDIA Alliance Rift: राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में 30 सितंबर 2026 को आहूत विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की अहम रणनीतिक बैठक से ऐन पहले घटक दलों के बीच अंतर्कलह और कटुता खुलकर सतह पर आ गई है। चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध संभावित कदमों पर साझा रणनीति बनाने के लिए बुलाई गई इस बैठक से पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कांग्रेस की कार्यशैली पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने सहयोगियों का सम्मान करने के बजाय उनके साथ अविश्वास और टकराव का माहौल पैदा कर रही है।
संजय सिंह के इस तल्ख हमले के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने मोर्चा संभालते हुए जवाबी पलटवार किया, जिससे विपक्षी खेमे में घमासान मच गया। इस सार्वजनिक खींचतान के बीच आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस संयुक्त बैठक का पूरी तरह बहिष्कार कर रही है, क्योंकि वह अब इस गठबंधन का हिस्सा नहीं है।
संजय सिंह का कांग्रेस पर तीखा हमला: बीजेपी से लड़ाई है या सहयोगियों से?
संजय सिंह ने कांग्रेस की क्षेत्रीय रणनीति पर सवाल उठाते हुए उत्तर प्रदेश का उदाहरण दिया, जहां वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से रस्साकशी के संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के प्रति कांग्रेस का रवैया भ्रम पैदा करने वाला है। कभी कांग्रेस के नेता 150 सीटों की मांग करते हैं, कभी 200 सीटों पर दावेदारी ठोकते हैं और कभी सभी 403 सीटों पर अकेले लड़ने की बात करते हैं।
संजय सिंह ने सवालिया लहजे में कहा कि कांग्रेस को यह तय करना चाहिए कि उसकी वास्तविक चुनावी लड़ाई भारतीय जनता पार्टी से है या फिर समाजवादी पार्टी जैसे मजबूत विपक्षी सहयोगियों से। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि कांग्रेस का यही टकराववादी रवैया दिल्ली, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भी देखा गया है, जहां वह क्षेत्रीय ताकतों को दबाने और कमजोर करने का प्रयास करती रही है।
INDIA Alliance Rift: संजय सिंह के बयानों में गंभीरता नहीं, सपा संग गठबंधन मजबूत
संजय सिंह के बयानों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी संजय सिंह की बातों को कोई गंभीरता या महत्व नहीं देती। गौतम ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन अटूट है और दोनों दल आगामी विधानसभा चुनाव पूरी एकजुटता के साथ मिलकर लड़ेंगे।
गौतम ने आम आदमी पार्टी के ट्रैक रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर आप की प्रतिबद्धता को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में सीट बंटवारे को लेकर शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद चल रहा है और बाहर से किसी तीसरे दल को गठबंधन में दरार डालने की कोशिश करने की आवश्यकता नहीं है।
AAP ने किया बैठक का बहिष्कार, लेकिन महाभियोग पर समर्थन की बात
आम आदमी पार्टी ने नई दिल्ली में हो रही इंडिया गठबंधन की इस महत्वपूर्ण बैठक से पूरी तरह दूरी बना ली है। संजय सिंह ने पार्टी के रुख को दोहराते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी पहले ही सार्वजनिक मंचों से यह स्पष्ट कर चुकी है कि वह अब ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा नहीं है, इसलिए इस प्रकार की किसी औपचारिक गठबंधन बैठक में जाने का कोई विधिक या राजनीतिक औचित्य नहीं बनता।
हालांकि उन्होंने यह रणनीतिक स्पष्टीकरण भी दिया कि यदि विपक्षी दल संसद के आगामी सत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाते हैं, तो आम आदमी पार्टी अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर उस प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन करेगी। इसका तात्पर्य यह है कि आप ने खुद को गठबंधन के संगठनात्मक ढांचे से तो अलग कर लिया है, किंतु संसद में मुद्दा-आधारित विपक्ष की भूमिका में वह साथ खड़ी दिखाई दे सकती है।
अखिलेश यादव की व्यक्तिगत गैरमौजूदगी और सपा का रुख
बैठक के राजनीतिक महत्व के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का स्वयं उपस्थित न होना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। पार्टी सूत्रों और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के अनुसार अखिलेश यादव की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से दूरभाष पर विस्तृत चर्चा हुई थी। पूर्व-निर्धारित कार्यक्रमों, संगठनात्मक व्यस्तताओं और राज्यसभा से जुड़े घटनाक्रमों के कारण वे स्वयं दिल्ली नहीं आ सके हैं।
समाजवादी पार्टी ने स्पष्ट किया है कि बैठक में पार्टी का अधिकृत उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहा है। सपा नेताओं ने यह भी रेखांकित किया कि अखिलेश यादव की अनुपस्थिति को गठबंधन से अलगाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यद्यपि उत्तर प्रदेश में सीटों के आगामी तालमेल को लेकर दोनों दलों के प्रांतीय कार्यकर्ताओं में बयानबाजी जारी है, किंतु शीर्ष स्तर पर दोनों दल अभी एक-दूसरे को साधे हुए हैं।
30 सितंबर की बैठक का मुख्य एजेंडा: चुनाव आयोग और SIR पर साझा घेराबंदी
30 सितंबर की इस बैठक का प्राथमिक उद्देश्य चुनावी प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग को घेरने की साझा रूपरेखा तय करना है। बैठक के एजेंडे में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया, ईवीएम-वीवीपीएटी की कार्यप्रणाली और चुनाव आयोग की निष्पक्षता से जुड़े सवाल प्रमुखता से शामिल हैं।
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, वामपंथी दलों, राजद, झामुमो और राकांपा (शरद पवार गुट) के शीर्ष रणनीतिकार इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि क्या इन मुद्दों को लेकर राष्ट्रव्यापी संयुक्त रैलियां और आंदोलन किए जाएं। बैठक में संसद के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की कानूनी व्यवहार्यता और विपक्षी एकजुटता के संख्याबल पर भी गंभीर चर्चा होने की संभावना है।
INDIA Alliance Rift: क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई में उलझता विपक्षी गठबंधन
नई दिल्ली की बैठक से ठीक पहले उपजा यह विवाद इस कड़वी राजनीतिक सच्चाई को उजागर करता है कि राष्ट्रीय स्तर पर सत्ताधारी दल के विरुद्ध एक मंच पर आने का दावा करने वाले दलों के बीच राज्य स्तर पर तीव्र अंतर्विरोध मौजूद हैं। जब तक सीटों के बंटवारे और क्षेत्रीय दलों के प्रभाव क्षेत्र को लेकर पारदर्शी सहमति नहीं बनती, तब तक गठबंधन के भीतर इस तरह की बयानबाजी बार-बार सामने आती रहेगी।
आम आदमी पार्टी की दूरी और कांग्रेस-सपा के बीच आंतरिक शक्ति-संतुलन की खींचतान यह दर्शाती है कि आगामी महीनों में चुनावी रणनीति को अमलीजामा पहनाना विपक्षी दलों के लिए आसान नहीं होगा। 30 सितंबर की बैठक से चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का साझा प्रस्ताव भले ही पारित हो जाए, किंतु गठबंधन की आंतरिक एकता को बनाए रखना शीर्ष नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा।
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