Health Tips: तकिया लगाने की आदत बढ़ा सकती है गर्दन और कमर का दर्द, जानें सोने का सही तरीका

Health Tips: तकिया लगाने की आदत और हमारी सेहत पर इसका गहरा असर

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Health Tips: भागदौड़ भरी जिंदगी में दिनभर की थकान के बाद हर व्यक्ति को रात में एक अच्छी और सुकून भरी नींद की जरूरत होती है। हालांकि, कई लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते कि वे सोते समय किस तरह के तकिए का इस्तेमाल कर रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक गलत तकिए पर सोना सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। यदि आपको सुबह उठने के बाद लगातार गर्दन में जकड़न या भारीपन महसूस होता है, तो इसके पीछे आपके तकिए की बनावट या ऊंचाई हो सकती है। सही नींद के लिए शरीर की शारीरिक बनावट और सोने के तरीके के अनुसार सही तकिए का चयन करना बेहद आवश्यक होता है।

Health Tips: गलत तकिए का चुनाव कैसे बिगाड़ सकता है नींद की गुणवत्ता

रात के समय सोते वक्त शरीर की मांसपेशियों को पूरी तरह विश्राम मिलना चाहिए, जिसके लिए सिर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी का संतुलन में रहना जरूरी है। यदि तकिया जरूरत से ज्यादा सख्त, बहुत ऊंचा या अत्यधिक मुलायम है, तो यह प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है। इसका सीधा असर नींद की गुणवत्ता पर पड़ता है और व्यक्ति सुबह तरोताजा महसूस करने के बजाय थका हुआ उठता है। नसों पर पड़ने वाला लगातार दबाव और मांसपेशियों में खिंचाव कई तरह की शारीरिक परेशानियों को जन्म दे सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि समय रहते अपनी इस छोटी सी आदत में सुधार किया जाए ताकि भविष्य में किसी बड़ी समस्या से बचा जा सके।

ज्यादा ऊंचा तकिया इस्तेमाल करने के नुकसान और समस्याएं

कई लोगों को बहुत मोटे या ऊंचे तकिए पर सोने की आदत होती है, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिहाज से बिल्कुल भी उचित नहीं माना जाता है। अधिक ऊंचा तकिया लगाने से सोते समय गर्दन का हिस्सा आगे की तरफ झुक जाता है, जिससे रीढ़ की सीध में बाधा उत्पन्न होती है। इसके परिणामस्वरूप गर्दन की नसों और आसपास की मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव पड़ने लगता है। लंबे समय तक ऐसा करने से सुबह उठते समय तेज सिरदर्द, कंधों में भारीपन और बांहों में सुन्नपन जैसी शिकायतें हो सकती हैं। न्यूरोलॉजिस्ट भी यह मानते हैं कि गलत ऊंचाई वाले तकिए शरीर के पोश्चर को खराब कर देते हैं।

बहुत पतले तकिए के उपयोग से होने वाली परेशानियां

दूसरी तरफ, कुछ लोग बहुत ही पतले या पिचके हुए तकिए का उपयोग करना पसंद करते हैं जो सिर को उचित सहारा नहीं दे पाते हैं। यदि तकिया सिर और गर्दन के बीच के खाली स्थान को ठीक से नहीं भर पाता है, तो रीढ़ की हड्डी का प्राकृतिक आकार प्रभावित होता है। इससे गर्दन की मांसपेशियां रातभर तनाव में रहती हैं ताकि सिर को संतुलित रखा जा सके। सुबह जागने पर इस प्रकार के खिंचाव के कारण गर्दन और पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती है। शरीर को पर्याप्त आराम न मिलने के कारण पूरा दिन सुस्ती और कमजोरी बनी रहती है।

सोने की पोजीशन के हिसाब से तकिए का सही चुनाव

हर व्यक्ति की सोने की शैली अलग होती है, इसलिए सभी के लिए एक ही तरह का तकिया उपयुक्त नहीं हो सकता है। जो लोग सीधे पीठ के बल सोते हैं, उन्हें मध्यम ऊंचाई वाले तकिए का चयन करना चाहिए जो गर्दन को प्राकृतिक सपोर्ट प्रदान करे। इसके विपरीत, करवट लेकर सोने वाले लोगों के लिए थोड़ा अधिक ऊंचा और मजबूत तकिया बेहतर माना जाता है ताकि कंधे और सिर के बीच का अंतर संतुलित हो सके। अपनी स्लीपिंग पोजीशन के अनुसार सही तकिए का चुनाव करने से रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता है और मांसपेशियां सुरक्षित रहती हैं।

Health Tips: समय पर तकिया बदलना क्यों है बेहद जरूरी

अधिकांश लोग एक ही तकिए को कई वर्षों तक लगातार इस्तेमाल करते रहते हैं, जबकि समय के साथ तकिए के अंदर का मैटेरियल अपनी फॉर्म और सपोर्ट करने की क्षमता खो देता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सामान्यतः एक से तीन साल के अंतराल पर अपने पुराने तकिए को बदल देना चाहिए। उपयोग और गुणवत्ता के आधार पर जब तकिया अपनी पुरानी स्थिति में वापस आना बंद कर दे, तब उसे नया ले लेना समझदारी होती है। पुराने और खराब हो चुके तकिए पर सोने से न केवल गर्दन का दर्द बढ़ता है बल्कि एलर्जी और सांस संबंधी समस्याएं होने का खतरा भी काफी हद तक बढ़ जाता है।

एक अच्छी और स्वस्थ जीवनशैली के लिए केवल खानपान ही नहीं बल्कि सोने की आदतें और उपयोग में लाई जाने वाली चीजें भी बहुत मायने रखती हैं। यदि आप सुबह उठने पर अक्सर शरीर में जकड़न या दर्द महसूस करते हैं, तो अपने तकिए की स्थिति की जांच अवश्य करनी चाहिए। सही आकार, उचित ऊंचाई और सही समय पर तकिया बदलने से न केवल गहरी नींद आती है बल्कि रीढ़ और गर्दन की सेहत भी सुरक्षित रहती है। छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर हम कई तरह की शारीरिक अशुद्धियों और असहजता से आसानी से बच सकते हैं।

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