France heat deaths: फ्रांस में गर्मी से हाहाकार, श्मशान में करना पड़ रहा इंतजा
40 डिग्री गर्मी में मौतों का तांडव, श्मशान घाटों पर शवों की लंबी कतारें
France heat deaths: वैश्विक पर्यावरण असंतुलन और ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) का सबसे भयावह और क्रूर चेहरा इस समय पूरे यूरोपीय महाद्वीप में देखने को मिल रहा है। कड़ाके की ठंड और बर्फीले मौसम के लिए जाने जाने वाले यूरोपीय देशों में इस समय प्रचंड और जानलेवा गर्मी की लहर (हीटवेव) ने ऐसा तांडव मचाया है कि स्थितियां पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी हैं। खासकर फ्रांस में हालात इस कदर बेहद चिंताजनक और डरावने हो चुके हैं कि वहां रिकॉर्ड उच्च तापमान ने बड़े पैमाने पर लोगों की जान लेनी शुरू कर दी है। फ्रांस की राजधानी पेरिस से आ रही खबरें रूह कंपा देने वाली हैं, जहां गर्मी से मरने वाले नागरिकों की संख्या इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि वहां के स्थानीय श्मशान घाटों और कब्रिस्तानों में शवों के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को कई-कई घंटों व दिनों का लंबा और कड़ा इंतजार करना पड़ रहा है, जो आधुनिक यूरोपीय इतिहास में एक अभूतपूर्व मानवीय संकट को दर्शाता है।
फ्रांस के राष्ट्रपति और प्रशासन ने बिगड़ते हालातों को देखते हुए पूरे देश में तत्काल प्रभाव से ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल’ (National Health Emergency) घोषित कर दिया है। इस अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदा का सबसे मारक और घातक असर नवजात बच्चों, गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों और अकेले रह रहे बुजुर्गों पर पड़ रहा है। पेरिस की सड़कों पर एंबुलेंसों का सायरन चौबीसों घंटे गूंज रहा है और अस्पतालों के आपातकालीन वेंटिलेटर वार्ड पूरी तरह से फुल हो चुके हैं। आइए आज के इस विस्तृत, कड़क और विशेष अंतरराष्ट्रीय वेदर व पर्यावरणीय बुलेटिन के माध्यम से बहुत ही गहराई से समझने का प्रयास करते हैं कि आखिर फ्रांस और पूरे यूरोप में इस 40 डिग्री तापमान के कारण मौत का ऐसा तांडव क्यों मचा हुआ है, और वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियां इस त्रासदी को कितना ज्यादा बढ़ा रही हैं।
श्मशान घाटों पर शवों की लंबी कतारें और पेरिस में मची अभूतपूर्व तबाही
फ्रांस के कई प्रमुख शहरों में पिछले एक हफ्ते के दौरान तापमान का कांटा लगातार 40 से 41 डिग्री सेल्सियस के बेहद खतरनाक और जानलेवा स्तर के पार बना हुआ है। यूरोपीय वास्तुकला और वहां के नागरिकों का शरीर पीढ़ियों से 20 से 25 डिग्री के ठंडे तापमान में रहने के अभ्यस्त हैं; ऐसे में अचानक आसमान से बरस रही इस कड़क आग के कारण लोगों के शरीर का आंतरिक थर्मल वेंटिलेशन सिस्टम पूरी तरह से चोक हो गया है, जिससे दिल का दौरा पड़ने और ऑर्गन फेलियर से सामूहिक मौतें हो रही हैं। पेरिस के सबसे बड़े श्मशान गृहों की क्षमता इस भारी मृत्यु दर के सामने पूरी तरह कम पड़ चुकी है, जिसके कारण वहां अंतिम संस्कार के लिए कड़े नियमों के तहत लंबी वेटिंग लिस्ट (प्रतीक्षा सूची) जारी करनी पड़ी है।
दुख और शोक संतप्त परिवारों को अपने प्रियजनों के पार्थिव शरीरों के अंतिम संस्कार के लिए तीन से चार दिनों तक का कड़ा इंतजार करना पड़ रहा है, जो उनके मानसिक कष्ट को कई गुना अधिक बढ़ा रहा है। इस भयावह स्थिति से निपटने के लिए फ्रांस सरकार ने युद्धस्तर पर कार्रवाई करते हुए बड़े-बड़े आइस-स्केटिंग रिंक्स, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और कोल्ड-स्टोरेज माकेर्ट्स को अस्थायी शवगृहों (मर्चुरी) में तब्दील करना शुरू कर दिया है ताकि शवों को सुरक्षित रखा जा सके। श्मशान घाटों पर चौबीसों घंटे काम करने के लिए अतिरिक्त प्रशासनिक कर्मचारियों और वॉलंटियर्स की कड़ाई से तैनाती की गई है, लेकिन मौतों का बढ़ता हुआ आंकड़ा सिस्टम की सभी तैयारियों को पूरी तरह से बौना साबित कर रहा है।
स्वास्थ्य आपातकाल के कड़े नियम और अस्पतालों पर बढ़ा अभूतपूर्व दबाव
फ्रांस के प्रधानमंत्री ने कैबिनेट की एक हाई-लेवल इमरजेंसी मीटिंग बुलाने के बाद पूरे देश के सभी चिकित्सा संस्थानों में रेड अलर्ट लागू करते हुए पैरामेडिकल स्टाफ की सभी छुट्टियां कड़ाई से रद्द कर दी हैं। पेरिस, मार्सिले और लियोन जैसे बड़े शहरों के अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, हीट एग्जॉशन और सांस की गंभीर तकलीफ वाले मरीजों की संख्या में 400 प्रतिशत से अधिक का कड़ा उछाल दर्ज किया गया है। डॉक्टरों को अतिरिक्त नाइट शिफ्टों पर लगाया गया है और गैर-जरूरी ऑपरेशन्स को टालकर पूरा फोकस केवल हीटवेव के शिकार लोगों की जान बचाने पर केंद्रित कर दिया गया है।
प्रशासनिक स्तर पर, सरकार ने सभी सरकारी व निजी स्कूलों, कॉलेजों और गैर-जरूरी व्यावसायिक ऑफिसों के कार्य समय में भारी फेरबदल करते हुए लोगों को दोपहर 12:00 बजे से शाम 4:00 बजे के बीच किसी भी हाल में घरों या कूलिंग सेंटर्स से बाहर न निकलने का कड़ा निर्देश जारी किया है। विशेष रूप से अकेले रह रहे वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए सामाजिक कल्याण विभागों ने एक बहुत बड़ा डिजिटल ट्रैकिंग अभियान शुरू किया है, जिसके तहत वॉलंटियर्स घर-घर जाकर बुजुर्गों को ओआरएस (ORS), शुद्ध पेयजल और आवश्यक दवाएं पहुंचा रहे हैं; क्योंकि फ्रांस में एक बहुत बड़ी बुजुर्ग आबादी फ्लैटों में अकेली रहती है, जहां एयर कंडीशनर (AC) न होने के कारण बंद कमरे वेंटिलेशन के अभाव में पूरी तरह से तपने वाले ओवन में बदल चुके हैं जो उनकी असमय मृत्यु का सबसे मुख्य और दर्दनाक कारण बन रहा है।
France heat deaths: यूरोप के अन्य देशों का पूरा हाल और वनों की आग का कड़ा तांडव
फ्रांस की इस भीषण त्रासदी से अलग, संपूर्ण यूरोपीय संघ (EU) इस समय मौसम के इस क्रूर चक्र की चपेट में बुरी तरह झुलस रहा है। स्पेन और पुर्तगाल के दक्षिणी हिस्सों में तापमान 42 डिग्री के पार पहुंच जाने के कारण वहां के शुष्क जंगलों में एक बहुत ही भयानक और अभेद्य ‘वाइल्डफायर’ (जंगल की आग) भड़क उठी है, जिसने देखते ही देखते हजारों हेक्टेयर के हरे-भरे वन क्षेत्र को पूरी तरह से जलाकर खाक कर दिया है और आस-पास के दर्जनों गांवों को कड़ाई से खाली कराना पड़ा है। इटली के प्रसिद्ध शहर रोम और मिलान में भी भीषण उमस और गर्मी के कारण अस्पतालों की ओपीडी पर दबाव चरम स्तर पर पहुंच गया है, जहां बिजली ग्रिडों पर एसी और कूलिंग सिस्टम के अत्यधिक लोड के कारण कई इलाकों में ब्लैकआउट (बिजली गुल) की समस्या खड़ी हो गई है।
मौसम वैज्ञानिकों और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण कूटनीति के विशेषज्ञों ने एक संयुक्त चेतावनी जारी करते हुए साफ कहा है कि यह महा-संकट किसी एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसानी गलतियों के कारण हो रहे ‘क्लाइमेट चेंज’ का एक बहुत ही कड़क और क्रूर परिणाम है। यदि दुनिया की महाशक्तियों ने कार्बन उत्सर्जन को कम करने, पेरिस समझौते के कड़े नियमों को जमीन पर उतारने और हरित पट्टियों (ग्रीन कवर) को बढ़ाने की दिशा में तत्काल कोई ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले सालों में यूरोप के इन ठंडे देशों में भी गर्मी की ये जानलेवा लहरें एक सामान्य वार्षिक घटना बन जाएंगी, जो संपूर्ण मानव सभ्यता के स्वास्थ्य और वैश्विक खुशियों को हमेशा-always के लिए पूरी तरह से नष्ट कर देंगी।
निष्कर्ष: पर्यटन उद्योग पर मार, भारत के लिए सबक और अंतिम नीतिगत मार्ग
इस प्रकार फ्रांस और पूरे यूरोप (France heat deaths) से आ रही ये दिल दहला देने वाली खबरें वास्तव में संपूर्ण वैश्विक समुदाय और विशेष रूप से भारत जैसे विकासशील देशों के लिए भी एक बहुत ही कड़ा, व्यावहारिक और अंतिम सबक हैं। फ्रांस का जो पर्यटन उद्योग (टूरिज्म सेक्टर) वहां की अर्थव्यवस्था की मुख्य रीढ़ माना जाता है, वह इस हीटवेव के कारण पूरी तरह से धराशायी हो चुका है; पेरिस का प्रसिद्ध एफिल टॉवर, लूवर म्यूजियम और शैंप्स-एलिसीस जैसी चमचमाती सड़कें दोपहर के समय पूरी तरह से वीरान और खाली नजर आ रही हैं क्योंकि विदेशी पर्यटक अपनी बुकिंग रद्द कराकर बहुत तेजी से अपने देशों को वापस लौट रहे हैं। भारत के दृष्टिकोण से देखा जाए तो दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के मैदानी इलाकों में भी साल-दर-साल गर्मी का प्रकोप नए रिकॉर्ड बना रहा है; इसलिए हमें भी अपने शहरी नियोजन (अर्बन प्लानिंग) में कड़े बदलाव करते हुए कंक्रीट के जंगलों को रोकने, बड़े पैमाने पर मियावाकी वनीकरण करने और जल संरक्षण के ढांचागत नियमों को कड़ाई से लागू करना होगा ताकि हम अपने नौनिहालों को एक सुरक्षित भविष्य दे सकें।
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