सतनाली में खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी, 162 किलो संदिग्ध देसी घी जब्त
त्योहारी सीजन में मिलावटखोरी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई।
Haryana News: त्योहारी सीजन के दौरान मिलावटखोरों पर अंकुश लगाने और आमजन के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के सतनाली क्षेत्र में विभाग की एक संयुक्त टीम ने औचक निरीक्षण करते हुए एक खाद्य प्रतिष्ठान से करीब 162 किलोग्राम संदिग्ध और अमानक गुणवत्ता का देसी घी जब्त किया है। विभागीय अधिकारियों ने मौके से घी के नमूने एकत्र कर रासायनिक विश्लेषण हेतु अधिकृत प्रयोगशाला में भेज दिए हैं। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि लैब से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत दोषी पाए जाने पर संबंधित कारोबारी के विरुद्ध सुसंगत कानूनी धाराओं के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
त्योहारों के नजदीक आते ही बाजार में दुग्ध उत्पादों, विशेषकर देसी घी और मिठाइयों की मांग में भारी उछाल आ जाता है। इसी मांग का अनुचित लाभ उठाने के लिए कुछ असामाजिक तत्व अमानक व मिलावटी उत्पादों की आपूर्ति का प्रयास करते हैं। जिला प्रशासन को सतनाली क्षेत्र के एक प्रतिष्ठान में घटिया और संदिग्ध घी के भंडारण की गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना के आधार पर विभाग ने त्वरित संज्ञान लेते हुए छापा मारा। कार्रवाई के दौरान दुकान में रखा घी प्रथम दृष्टया गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा, जिसके बाद पूरे स्टॉक को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया।
Haryana News: डॉ. पुनीत शर्मा के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने की कार्रवाई
सतनाली क्षेत्र में इस व्यापक जांच अभियान को डेजिग्नेटेड ऑफिसर डॉ. पुनीत शर्मा के कुशल नेतृत्व में अंजाम दिया गया। इस संयुक्त कार्रवाई दल में नारनौल के खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. अमित कुमार और चरखी दादरी के खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. रविंदर डाबास प्रमुख रूप से शामिल रहे।
निरीक्षण दल ने संबंधित प्रतिष्ठान के भंडारण कक्ष, निर्माण प्रक्रिया और परिसर में स्वच्छता मानकों की बारीकी से पड़ताल की। जांच के दौरान वहां रखा घी रंग, गंध और बनावट के आधार पर संदिग्ध प्रतीत हुआ। इसके अतिरिक्त संचालक मौके पर उत्पाद की गुणवत्ता और स्रोत से जुड़े अनिवार्य दस्तावेज प्रस्तुत करने में असमर्थ रहा। किसी भी संभावित स्वास्थ्य जोखिम को टालने के लिए अधिकारियों ने 162 किलोग्राम घी को अपने संरक्षण में ले लिया। विभाग का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में केवल शुद्ध और सुरक्षित खाद्य उत्पाद ही आम उपभोक्ताओं तक पहुंचें।
प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए नमूने, रिपोर्ट पर टिकी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तय प्रोटोकॉल का पालन करते हुए अधिकारियों ने जब्त किए गए घी के स्टॉक से विधिवत नमूने सील किए। इन सैंपल्स को जांच और विश्लेषण के लिए राज्य की अधिकृत फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी में प्रेषित कर दिया गया है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, प्रयोगशाला में घी के नमूनों में फैट का स्तर, मिलावटी तेलों की मौजूदगी, रसायनों और प्रिजर्वेटिव्स की सघन जांच की जाएगी। इस मामले में लैब रिपोर्ट ही सबसे अहम कानूनी आधार साबित होगी। यदि जांच में उत्पाद सब-स्टैंडर्ड, मिसब्रांडेड या स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पाया जाता है, तो संबंधित फर्म और उसके संचालक के खिलाफ न्यायालय में अभियोजन दायर किया जाएगा।
खाद्य कारोबारियों को स्वच्छता और मानकों की सख्त हिदायत
इस कार्रवाई के उपरांत खाद्य सुरक्षा विभाग ने जिले के सभी खाद्य कारोबारियों, डेयरी संचालकों और हलवाइयों को सख्त चेतावनी जारी की है। अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि सभी व्यापारी खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (FSSA) का अक्षरशः पालन करें। दुकानों और गोदामों में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए, कच्चे माल की खरीद केवल वैध बिल और लाइसेंस धारक वेंडरों से ही की जाए तथा एक्सपायरी डेट व बैच नंबर स्पष्ट रूप से अंकित हों।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मुनाफे के चक्कर में लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने की किसी भी कोशिश को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी सतनाली, नारनौल, महेंद्रगढ़ और आसपास के ग्रामीण इलाकों में इसी तरह के औचक निरीक्षण लगातार जारी रहेंगे।
Haryana News: शुद्ध देसी घी खरीदते समय उपभोक्ता बरतें यह जरूरी सावधानी
खाद्य सुरक्षा विभाग ने आम जनता को भी खरीदारी के दौरान जागरूक और सतर्क रहने की अपील की है। बाजार से खुला या अत्यधिक सस्ते दामों पर मिलने वाला देसी घी खरीदने से बचें। हमेशा भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से पंजीकृत व प्रमाणित ब्रांड्स का ही चयन करें।
उपभोक्ताओं को डिब्बे या पाउच पर लिखे एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर, निर्माण तिथि, उपयोग की अंतिम तिथि (Best Before) और पोषण संबंधी जानकारी की जांच अवश्य करनी चाहिए। यदि किसी उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो या मिलावट की आशंका नजर आए, तो उपभोक्ता इसकी शिकायत तत्काल खाद्य सुरक्षा विभाग के कार्यालय या संबंधित हेल्पलाइन पर दर्ज करा सकते हैं।
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