Google CSAM Reporting: बाल यौन शोषण मामलों की जानकारी सीधे I4C को देने की तैयारी
Meta के बाद Google ने भी भारत में CSAM मामलों की जानकारी सीधे I4C को देने का प्रस्ताव रखा
Google CSAM Reporting: इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में भारत सरकार की सख्त कूटनीति और नियामक दबाव का बड़ा असर देखने को मिला है। वैश्विक सर्च इंजन और प्रौद्योगिकी दिग्गज गूगल (Google) ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को आधिकारिक घोषणा करते हुए सहमति जताई है कि वह अपने विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर पाए जाने वाले बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) से जुड़े मामलों की रिपोर्ट अब सीधे भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंपेगा। यह ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव केंद्र सरकार द्वारा सोशल मीडिया और तकनीकी कंपनियों पर बनाए जा रहे निरंतर विधिक दबाव और पिछले सप्ताह मेटा (Meta) द्वारा उठाए गए समान कदम के तुरंत बाद सामने आया है।
कंपनी अब तक ऐसी सभी अंतरराष्ट्रीय शिकायतों को वाशिंगटन स्थित एक अमेरिकी गैर-लाभकारी संगठन को प्रेषित करती थी, जिसके चलते भारत की स्थानीय जांच एजेंसियों तक जानकारी पहुंचने में कई दिनों या हफ्तों का विलंब हो जाता था। गूगल का यह निर्णय देश में ऑनलाइन बाल सुरक्षा को संस्थागत रूप से मजबूत करने और आपातकालीन परिस्थितियों में पीड़ित बच्चों को त्वरित विधिक सुरक्षा दिलाने की दिशा में एक युगांतकारी मोड़ साबित होगा।
Google CSAM Reporting: पुरानी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में क्या थी तकनीकी खामी
विगत कई वर्षों से गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट जैसी सभी बहुराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियां अपने वैश्विक प्लेटफॉर्म्स पर संदिग्ध बाल यौन शोषण सामग्री का पता चलने पर उसकी रिपोर्ट अमेरिका स्थित ‘नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन’ (NCMEC) को अनिवार्य रूप से भेजती रही हैं। NCMEC एक केंद्रीय नोडल अंतरराष्ट्रीय संस्था के रूप में कार्य करता है, जो इन डिजिटल रिपोर्ट्स की प्राथमिक समीक्षा करने के उपरांत उन्हें संबंधित देशों के दूतावासों या नामित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अग्रेषित करता है।
भारतीय गृह मंत्रालय और सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों का लंबे समय से यह तर्क था कि इस त्रिपक्षीय व्यवस्था में अत्यधिक बहुमूल्य समय व्यर्थ हो जाता है। जब कोई बच्चा किसी वास्तविक शारीरिक खतरे, ब्लैकमेलिंग अथवा डिजिटल उत्पीड़न के चरम संकट का सामना कर रहा होता है, तो सुदूर अमेरिका से होकर आने वाली सूचनाएं जमीनी पुलिस को त्वरित छापा मारने या पीड़ित को बचाने का अवसर नहीं देतीं। भारत सरकार ने तकनीकी कंपनियों के समक्ष दृढ़ता से यह पक्ष रखा कि भारत से संबंधित आईपी एड्रेस, भारतीय उपयोगकर्ताओं और भारत में घटित अपराधों का डेटा सीधे देश की आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा किया जाना चाहिए ताकि अपराधी को डिजिटल साक्ष्य मिटाने का समय न मिल सके।
मेटा के अभूतपूर्व कदम के बाद गूगल पर बढ़ा रणनीतिक दबाव
गूगल का यह ताजा फैसला उस घटनाक्रम के बाद आया है जब पिछले सप्ताह फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की मूल कंपनी मेटा ने घोषणा की थी कि वह बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सभी संवेदनशील मामलों की जानकारी सीधे भारतीय साइबर अपराध पोर्टल को भेजेगी। मेटा को भारत में अपने प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक विज्ञापनों और एआई-जनित बाल शोषण सामग्री के कथित प्रसार को लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) तथा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की कड़ी संवीक्षा का सामना करना पड़ा था।
मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग द्वारा वैश्विक स्तर पर मांगी गई सार्वजनिक माफी और भारतीय संसदीय व विधिक समितियों के कड़े रुख के बाद मेटा ने भारत के पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की धारा 19 के अनुरूप अपनी रिपोर्टिंग नीति को बदलते हुए सीधे भारतीय तंत्र को अपनाने का लिखित आश्वासन दिया था। गूगल के लिए भी भारत उपयोगकर्ताओं के आधार पर विश्व का सबसे बड़ा एकल बाजार है, जहां उसका वीडियो प्लेटफॉर्म यूट्यूब और एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम करोड़ों नागरिकों द्वारा उपयोग किया जाता है। ऐसे में घरेलू बाजार में विधिक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए गूगल के पास सरकार के इस तार्किक अनुरोध को स्वीकार करने के अतिरिक्त कोई अन्य विकल्प नहीं था।
गृह मंत्रालय के I4C पोर्टल से सीधे जुड़ेगा गूगल का सुरक्षा तंत्र
भारत सरकार के साथ चल रही उच्च-स्तरीय वार्ताओं के संदर्भ में गूगल के आधिकारिक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि कंपनी बच्चों के यौन शोषण से जुड़े डिजिटल कंटेंट को पहचानने, रोकने, तत्काल हटाने और विधिक एजेंसियों को रिपोर्ट करने में भारी तकनीकी निवेश करती है। प्रवक्ता के अनुसार, भारत सरकार के साथ निरंतर संवाद के तहत कंपनी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (I4C) को सीधे प्रासंगिक और तकनीकी डेटा साझा करने का आधिकारिक प्रस्ताव सौंपा है।
I4C देश भर में ऑनलाइन अपराधों, बाल पोर्नोग्राफी और वित्तीय साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए राष्ट्रीय नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है। नई व्यवस्था के तहत जैसे ही गूगल के स्वचालित एल्गोरिदम अथवा सुरक्षा समीक्षक यूट्यूब, गूगल ड्राइव अथवा अन्य सेवाओं पर किसी भारतीय खाते से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री को चिन्हित करेंगे, उसकी डिजिटल फिंगरप्रिंट, अपलोडर का मेटाडेटा और घटना से जुड़े सभी साक्ष्य सीधे I4C के साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज करा दिए जाएंगे।
भारतीय जांच एजेंसियों और पीड़ितों को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ
सीधी रिपोर्टिंग की इस नई व्यवस्था से भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अभूतपूर्व परिचालन गति प्राप्त होगी। अब तक राज्य पुलिस बलों को NCMEC से आई4सी और फिर जिला पुलिस स्तर तक रिपोर्ट पहुंचने की लंबी प्रक्रिया में हफ्तों तक प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। इस देरी के कारण कई बार अपराधी अपने मोबाइल हैंडसेट, सिम कार्ड और डिजिटल लॉग्स को नष्ट करने में सफल हो जाते थे।
सीधे डिजिटल लिंक स्थापित होने से राज्य पुलिस की विशेष किशोर पुलिस इकाइयां (SJPU) और साइबर क्राइम थाने कुछ ही घंटों के भीतर संबंधित संदिग्ध के आईपी एड्रेस को लोकेट कर सकेंगे और पीड़ित बच्चे की पहचान कर उसे तत्काल सुरक्षित वातावरण में पहुंचा सकेंगे। यह त्वरित व्यवस्था ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री बनाने और उसका व्यापार करने वाले डार्कनेट और टेलीग्राम सिंडिकेट्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाएगी।
पॉक्सो कानून और मध्यस्थ दिशानिर्देशों का कड़ा संदेश
भारत सरकार ने पिछले कुछ महीनों में स्पष्ट विधिक संदेश दिया है कि देश में परिचालन करने वाले किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए बच्चों की सुरक्षा का सिद्धांत गैर-परक्राम्य (Non-Negotiable) है। सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act, 2012) के कड़े प्रावधान किसी भी मध्यस्थ को बाल शोषण के मामलों में मूकदर्शक बने रहने या विदेशी कानूनों की आड़ लेने की अनुमति नहीं देते।
गूगल और मेटा द्वारा भारत के विधिक क्षेत्राधिकार के प्रति दिखाई गई यह जवाबदेही यह सिद्ध करती है कि अब वैश्विक टेक कंपनियों को भारतीय कानून और संप्रभुता के अनुसार अपने वैश्विक परिचालन मानकों को पुनर्गठित करना ही होगा। सरकार अब माइक्रोसॉफ्ट और अन्य क्लाउड व मैसेजिंग प्रदाताओं के साथ भी इसी प्रकार के सीधे समन्वय प्रोटोकॉल स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
Google CSAM Reporting: निष्कर्ष
गूगल का बाल यौन शोषण सामग्री की रिपोर्ट सीधे भारत सरकार के I4C पोर्टल को सौंपने का निर्णय डिजिटल इंडिया के इतिहास में बाल अधिकारों की सुरक्षा का एक अत्यंत सशक्त अध्याय है। मेटा और गूगल जैसी महाशक्तियों द्वारा देश के विधिक ढांचे को स्वीकार करना यह रेखांकित करता है कि भारत अब केवल एक विशाल उपभोग बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक तकनीकी मानकों और जवाबदेही को तय करने वाला एक निर्णायक नियामक भी है। आने वाले दिनों में जब यह व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी, तब तकनीकी निगरानी और त्वरित पुलिस कार्रवाई का यह तालमेल ऑनलाइन दुनिया को बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और भयमुक्त बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होगा।
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