Gold-Silver Price Today: सोना और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत

Gold-Silver Price Today: वैश्विक तनाव कम होने से MCX पर सोने और चांदी के भाव फिसले

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Gold-Silver Price Today: भारतीय सर्राफा बाजार में बुधवार का दिन कीमती धातुओं के लिए भारी गिरावट का रहा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में तेज दबाव देखा गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कम होते भूराजनैतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित सकारात्मक कूटनीतिक संकेतों के कारण सोने की सुरक्षित निवेश के रूप में मांग अचानक घट गई है। निवेशकों के लिए यह दिन सतर्क रहने वाला रहा, क्योंकि वायदा कारोबार में सोने और चांदी के भाव अपनी ऊंचाइयों से फिसलते हुए दिखाई दिए।

Gold-Silver Price Today: सोने के भाव में तेज गिरावट का दौर

MCX पर सोने की कीमतों ने बुधवार सुबह कारोबार के दौरान गिरावट की तस्वीर पेश की। अगस्त डिलीवरी वाला सोना वायदा लगभग 790 रुपये यानी करीब 0.51 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,52,301 रुपये प्रति 10 ग्राम तक लुढ़क गया। कारोबार के दौरान सोना 1,52,501 रुपये के आसपास बना रहा। हालांकि दिन की शुरुआत में इसमें कुछ हलचल जरूर देखी गई और यह 1,53,179 रुपये के उच्चतम स्तर तक पहुंचा था, लेकिन ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली हावी हो गई और भाव नीचे आ गए।

सोना फिलहाल 1,52,000 से 1,52,500 रुपये के अहम सपोर्ट जोन के आसपास टिका हुआ है। बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि भाव 1,53,500 रुपये के रेजिस्टेंस स्तर को तोड़कर ऊपर जाते हैं, तो इसमें 1,55,500 रुपये तक की बढ़त की उम्मीद की जा सकती है। इसके विपरीत, यदि सोना 1,52,000 रुपये के महत्वपूर्ण समर्थन स्तर को तोड़ता है, तो बाजार में बड़ी बिकवाली शुरू हो सकती है और दाम 1,50,000 रुपये तक फिसल सकते हैं।

चांदी में भी कमजोरी का रुख

सोने की तरह ही चांदी की चमक भी बाजार में फीकी पड़ती दिखी। जुलाई डिलीवरी वाली चांदी वायदा में 195 रुपये की गिरावट दर्ज की गई, जिससे इसका भाव 2,49,910 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। चांदी ने दिन के दौरान 2,48,777 रुपये का निचला स्तर भी छुआ। हालांकि बाजार की अस्थिरता के बावजूद चांदी का भाव एक दायरे में कारोबार करता रहा।

चांदी के लिए 2,49,000 से 2,50,000 रुपये का दायरा फिलहाल एक मुख्य आधार बना हुआ है। यदि चांदी 2,52,000 रुपये के रेजिस्टेंस जोन को पार कर जाती है, तो इसमें फिर से तेजी की संभावना बनेगी। वहीं, यदि चांदी का भाव 2,48,000 रुपये से नीचे जाता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ने से कीमतें 2,45,500 रुपये तक गिर सकती हैं।

भूराजनैतिक तनाव का कम होना है मुख्य वजह

कीमती धातुओं में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव का कम होना माना जा रहा है। आमतौर पर जब दुनिया में किसी तरह का युद्ध या तनाव होता है, तो निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित ठिकाना मानकर इसमें भारी निवेश करते हैं। लेकिन जैसे ही स्थिति सामान्य होने के संकेत मिलते हैं, निवेशक सोने से पैसा निकालकर अन्य जोखिम भरे बाजारों में लगाने लगते हैं।

इस घटनाक्रम का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी स्पष्ट दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 79 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गया है, वहीं अमेरिका का वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी करीब एक प्रतिशत गिरकर 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। क्रूड और गोल्ड में एक साथ गिरावट यह संकेत दे रही है कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों का भरोसा जोखिम भरी परिसंपत्तियों की ओर बढ़ रहा है।

Gold-Silver Price Today: निवेशकों के लिए क्या हैं आगे की राह?

बाजार में जारी इस गिरावट के बीच आम निवेशकों के मन में यह सवाल है कि क्या यह खरीदारी का सही समय है? विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक कीमती धातुएं अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल को नहीं तोड़तीं, तब तक घबराहट में बिकवाली करने से बचना चाहिए। सोने के लिए 1,52,000 रुपये का स्तर एक लक्ष्मण रेखा जैसा है। जब तक सोना इसके ऊपर बना हुआ है, तब तक लंबी अवधि के निवेशकों को डरने की जरूरत नहीं है।

साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स पर सोने का भाव 4,348 डॉलर प्रति औंस के आसपास है, जो डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों के साथ बदलता रहता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बाजार की हर छोटी हलचल पर नजर रखें और एक साथ पूरा निवेश करने के बजाय छोटे-छोटे टुकड़ों में निवेश करने की रणनीति अपनाएं।

Gold-Silver Price Today: बाजार का निष्कर्ष

फिलहाल भारतीय कमोडिटी बाजार अंतरराष्ट्रीय संकेतों के दबाव में है। सोने और चांदी की कीमतों का भविष्य काफी हद तक वैश्विक भूराजनैतिक स्थिति और डॉलर की चाल पर निर्भर करेगा। आने वाले कुछ दिन बाजार में काफी हलचल भरे रह सकते हैं, जहां 1,52,000 रुपये का सोना और 2,48,000 रुपये की चांदी निर्णायक साबित होगी। निवेशकों को सलाह है कि वे बाजार के बड़े सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों को ध्यान में रखते हुए ही अपनी आगे की निवेश रणनीति तय करें। सुरक्षित निवेश के दौर में गिरावट का मतलब हमेशा नुकसान नहीं होता, बल्कि यह सही समय पर सही फैसले लेने का एक मौका भी हो सकता है।

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