Gold-Silver Price 31 July 2026: सोना ₹1.42 लाख के पार, चांदी में आई गिरावट; जानें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता समेत देशभर के ताजा भाव
सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर, चांदी में नरमी; प्रमुख शहरों में जानें 22 और 24 कैरेट के नए भाव
Gold-Silver Price 31 July 2026: वैश्विक अर्थव्यवस्था में बन रहे नए वित्तीय समीकरणों, अमेरिकी डॉलर के सूचकांक में उतार-चढ़ाव और घरेलू सर्राफा बाजारों में त्योहारी सीजन से ठीक पहले बनी मांग के बीच शुक्रवार 31 जुलाई 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। भारत बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश के प्रमुख बाजारों में 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया है। दूसरी ओर, औद्योगिक मांग में आई हल्की सुस्ती और मुनाफावसूली के कारण चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे एक किलोग्राम चांदी का भाव ₹2.16 लाख के आसपास स्थिर बना हुआ है। आगामी शादी-विवाह के लग्न और सावन-भादों के त्योहारी मौसम से पहले सोने के रिकॉर्ड उच्च स्तर और चांदी में आई गिरावट ने खरीदारों, आम नागरिकों और सर्राफा निवेशकों का ध्यान अपनी ओर मजबूती से खींचा है।
राजधानी दिल्ली और मुंबई में सोने-चांदी की विस्तृत स्थिति
देश की राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में आज 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,42,200 से ₹1,44,100 प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर रही है। वहीं, आभूषण निर्माण में सर्वाधिक इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने का भाव ₹1,30,300 से ₹1,32,100 प्रति 10 ग्राम के बीच दर्ज किया गया है। दिल्ली के प्रमुख ज्वैलर्स का कहना है कि स्थानीय स्तर पर लगने वाले मेकिंग चार्ज और 3 प्रतिशत जीएसटी (GST) के जुड़ने के बाद ग्राहकों के लिए अंतिम शोरूम कीमत में मामूली अंतर आ सकता है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की बात करें तो वहां 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव ₹1,42,100 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की दर ₹1,30,250 प्रति 10 ग्राम के आसपास बनी हुई है। मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य व्यावसायिक शहरों जैसे पुणे और नागपुर में भी सोने की दरें लगभग इसी स्तर पर कायम हैं। दोनों ही महानगरों में चांदी ₹2,16,000 प्रति किलोग्राम के भाव पर उपलब्ध है, जिससे सर्राफा बाजार में खरीदारी को लेकर मिला-जुला माहौल बना हुआ है।
कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद का ताजा भाव
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में सोने-चांदी के भाव राष्ट्रीय औसत के समान ही दर्ज किए गए हैं। कोलकाता के बड़ा बाजार सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, आज वहां 24 कैरेट सोना ₹1,42,150 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,30,200 प्रति 10 ग्राम की दर से बिक रहा है। दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों चेन्नई और बेंगलुरु में भी सोने की कीमतों में स्थिरता के साथ हल्की मजबूती देखी गई है। चेन्नई में 24 कैरेट सोना ₹1,42,800 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि बेंगलुरु में यह ₹1,42,300 प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ है। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में स्थानीय करों और उच्च मांग के कारण 24 कैरेट सोना अन्य महानगरों की तुलना में थोड़ा महंगा ₹1,43,100 प्रति 10 ग्राम के करीब बिक रहा है। दक्षिण भारत के इन सभी राज्यों में चांदी की दरें ₹2,16,500 से ₹2,17,000 प्रति किलोग्राम के दायरे में बनी हुई हैं।
उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य भारत के बाजारों का हाल
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, औद्योगिक नगरी कानपुर और धार्मिक नगरी वाराणसी के सर्राफा बाजारों में 24 कैरेट सोने की दरें ₹1,42,400 प्रति 10 ग्राम के आसपास दर्ज की गई हैं, जबकि 22 कैरेट सोना ₹1,30,500 प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में, जो कि रत्न और आभूषणों का एक बड़ा व्यापारिक केंद्र है, 24 कैरेट सोना ₹1,42,500 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,16,200 प्रति किलोग्राम के स्तर पर बनी हुई है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और इंदौर में भी सोने की दरें ₹1,42,250 प्रति 10 ग्राम के करीब स्थिर हैं। इन सभी राज्यों के क्षेत्रीय बाजारों में परिवहन लागत और स्थानीय व्यापारी संघों के नियमों के कारण मुख्य थोक दरों में ₹200 से ₹500 प्रति 10 ग्राम तक का मामूली अंतर देखा जाना एक सामान्य प्रक्रिया है।
चांदी की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजहें और औद्योगिक मांग
जहाँ एक ओर सोना अपने सर्वकालिक उच्च स्तर के करीब कारोबार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में दर्ज की गई गिरावट निवेशकों के लिए चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है। वैश्विक बाजार में चांदी का औद्योगिक उपयोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, सोलर पैनल निर्माण और ऑटोमोबाइल उद्योग में व्यापक रूप से होता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख औद्योगिक देशों में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ने और सट्टेबाजी आधारित मुनाफावसूली के कारण चांदी के दामों पर दबाव देखा गया है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में चांदी प्रति किलोग्राम ₹2,22,000 के स्तर से फिसलकर ₹2,16,000 के स्तर पर आ गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग में पुनः सुधार आते ही चांदी में एक बार फिर निचले स्तरों से रिकवरी देखने को मिल सकती है।
वैश्विक बाजार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व और एमसीएक्स का गणित
अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार कॉमेक्स (COMEX) में सोने और चांदी के वायदा सौदों में हल्का उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की ब्याज दरों से जुड़ी नीतियों, वैश्विक मुद्रास्फीति की दर और अमेरिकी डॉलर सूचकांक (Dollar Index) की मजबूती का सीधा असर कीमती धातुओं की वैश्विक कीमतों पर पड़ रहा है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता या मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ता है, तो दुनिया भर के केंद्रीय बैंक और बड़े संस्थागत निवेशक सोने को एक ‘सुरक्षित निवेश’ (Safe Haven) मानकर उसमें जमकर खरीदारी करते हैं। भारतीय वायदा बाजार यानी एमसीएक्स (MCX) पर भी अगस्त और अक्टूबर महीने के गोल्ड फ्यूचर्स कांट्रैक्ट्स में मजबूती देखी जा रही है, जबकि सिल्वर कांट्रैक्ट्स में बिकवाली का दबाव बना हुआ है। इसके अतिरिक्त, भारतीय रुपये के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर भी घरेलू स्तर पर आयातित सोने (Gold-Silver Price 31 July 2026) की लागत तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है।
Gold-Silver Price 31 July 2026: निवेशकों और आम खरीदारों के लिए बाजार विशेषज्ञों की सलाह
सर्राफा बाजार के विशेषज्ञों और वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि सोने की कीमतें ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर पर होने के कारण आम खरीदारों को थोक या एकमुश्त खरीदारी करने से बचना चाहिए। जो लोग आगामी शादी-विवाह या त्योहारों के लिए सोने के आभूषण खरीदना चाहते हैं, वे सिस्टमिक बाइंग यानी किश्तों में थोड़ा-थोड़ा करके सोना खरीद सकते हैं। इसके अलावा, चांदी में आई हालिया गिरावट को दीर्घकालिक निवेशक एक अच्छे अवसर के रूप में देख रहे हैं। आम उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे हमेशा बीआईएस हॉलमार्क (BIS Hallmarked) वाले 6 डिजिट HUID कोड युक्त आभूषण ही खरीदें ताकि सोने की शुद्धता से कोई समझौता न हो। आभूषण खरीदते समय मेकिंग चार्ज की दर-तुलना विभिन्न पंजीकृत ज्वैलर्स से अवश्य कर लेनी चाहिए, ताकि अनावश्यक अतिरिक्त खर्चों से बचा जा सके। दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा की दृष्टि से पोर्टफोलियो में 10 से 15 प्रतिशत सोना रखना हमेशा एक संतुलित रणनीति मानी जाती है।
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