MGNREGA का अंत, VB-G RAM G की शुरुआत: 1 जुलाई से ग्रामीण रोजगार में ऐतिहासिक बदलाव, 125 दिन की गारंटी
मनरेगा समाप्त, नई योजना में 125 दिन रोजगार गारंटी, स्मार्ट कार्ड और डिजिटल पारदर्शिता
MGNREGA: केंद्र सरकार ग्रामीण भारत में रोजगार की दिशा बदलने जा रही है। 1 जुलाई 2026 से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को पूरी तरह समाप्त कर नई योजना VB-G RAM G लागू कर दी जाएगी। इस नई योजना का पूरा नाम विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) है। सरकार का मानना है कि यह बदलाव पारदर्शिता, दक्षता और गांवों के समग्र विकास को नई ऊंचाई देगा।
यह फैसला ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संसद की स्थायी समिति को दी गई जानकारी में सामने आया है। 25 राज्यों ने पहले ही अपनी हिस्सेदारी का फंड जारी कर दिया है और पूरे देश में योजना को लागू करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
VB-G RAM G क्या है और क्यों लाई जा रही है नई योजना?
VB-G RAM G योजना मनरेगा की जगह लेगी। मनरेगा 2005 में शुरू हुई थी और पिछले दो दशकों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का मुख्य सहारा रही है। नई योजना को विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप तैयार किया गया है। सरकार का दावा है कि इसमें पुरानी कमियों को दूर किया गया है और आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखा गया है।
नई योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिनों का रोजगार मिलेगा, जो मनरेगा के 100 दिनों से ज्यादा है। इससे गरीब परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। योजना में पानी संरक्षण, ग्रामीण सड़क निर्माण, आजीविका बढ़ाने वाले प्रोजेक्ट और जलवायु परिवर्तन से निपटने वाले कामों पर विशेष जोर दिया जाएगा।
125 दिन रोजगार की गारंटी: ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत
नई योजना का सबसे बड़ा फायदा 125 दिनों की रोजगार गारंटी है। कई राज्यों में मनरेगा के तहत 100 दिन का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पाता था। अब अतिरिक्त 25 दिन की गारंटी से ग्रामीण मजदूरों को साल भर ज्यादा काम और आय मिल सकेगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना के तहत मजदूरी सीधे बैंक खातों में 15 दिनों के अंदर जमा करनी होगी। देरी होने पर मुआवजा भी दिया जाएगा। इससे मजदूरों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और भ्रष्टाचार की संभावना भी कम होगी।
स्मार्ट जॉब कार्ड: फर्जीवाड़े पर लगाम
VB-G RAM G में पुराने जॉब कार्ड की जगह स्मार्ट रोजगार कार्ड जारी किए जाएंगे। इनमें फेस रिकग्निशन, बायोमेट्रिक और डिजिटल ट्रैकिंग जैसी आधुनिक तकनीकें शामिल होंगी। इससे फर्जी नामों पर काम दिखाने और घोटालों को रोका जा सकेगा।
जिन लोगों का ई-केवाईसी पहले से पूरा है, उनके पुराने कार्ड कुछ समय के लिए वैध रहेंगे। नए कार्ड जारी होने तक किसी भी मजदूर को रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा। यह कूटनीतिक व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने और लक्षित लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने में मदद करेगी।
गांवों की जरूरत के अनुसार काम: विकसित ग्राम पंचायत प्लान
नई योजना में हर गांव का विकास स्थानीय जरूरतों के आधार पर होगा। ग्राम पंचायत स्तर पर विकसित ग्राम पंचायत प्लान तैयार किए जाएंगे, जिन्हें ग्राम सभा की मंजूरी लेनी होगी।
कामों में पानी की सुरक्षा, जल संरक्षण संरचनाएं, ग्रामीण कनेक्टिविटी, कृषि आधारित आजीविका और मौसम आपदाओं से बचाव जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। इससे न सिर्फ रोजगार मिलेगा बल्कि गांवों का दीर्घकालिक विकास भी सुनिश्चित होगा।
केंद्र और राज्यों की साझेदारी: फंडिंग का नया मॉडल
योजना में खर्च का बोझ केंद्र और राज्य सरकारें साझा उठाएंगी। सामान्य राज्यों में अनुपात 60:40 रहेगा, जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए 90:10 का फॉर्मूला लागू होगा।
सरकार का अनुमान है कि इस योजना पर सालाना करीब 1.51 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। कई राज्यों ने अपना हिस्सा पहले ही जारी कर दिया है, जिससे जुलाई से सुचारू शुरुआत की उम्मीद है।
MGNREGA: मनरेगा के अधूरे काम नहीं होंगे प्रभावित
सरकार ने आश्वासन दिया है कि मनरेगा के तहत चल रहे या अधूरे प्रोजेक्ट्स को नई योजना में निर्बाध रूप से शामिल किया जाएगा। मजदूरों को कोई परेशानी नहीं होगी। पुरानी योजना के नियम, अधिसूचनाएं और दिशानिर्देश 1 जुलाई से खत्म हो जाएंगे, लेकिन काम जारी रहेंगे।
यह सुनिश्चित करने के लिए संक्रमण काल को पूरी तरह सहज बनाया गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा है कि मजदूरों को उनका रोजगार बिना किसी रुकावट के मिलता रहेगा।
विशेषज्ञों की नजर में फायदे और चुनौतियां
विशेषज्ञों का कहना है कि 125 दिनों की गारंटी और डिजिटल निगरानी से योजना ज्यादा प्रभावी बनेगी। फेस रिकग्निशन और स्मार्ट कार्ड से भ्रष्टाचार कम होगा और वास्तविक लाभार्थी तक पहुंच आसान होगी।
हालांकि कुछ विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं कि राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। इसके साथ ही नई तकनीकी व्यवस्था को लागू करने में ग्रामीण क्षेत्रों में कूटनीतिक चुनौतियां आ सकती हैं। सरकार को व्यापक जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण पर जोर देना होगा ताकि योजना का पूरा फायदा जमीन पर पहुंचे।
MGNREGA: ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
VB-G RAM G योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली साबित हो सकती है। ज्यादा रोजगार दिनों से स्थानीय खपत बढ़ेगी, छोटे व्यापारियों को फायदा होगा और पलायन कम हो सकता है।
पानी संरक्षण और जलवायु अनुकूल कामों से कृषि उत्पादकता बढ़ेगी और गांव आत्मनिर्भर बनेंगे। यह योजना विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
तैयारी और लागू करने की कूटनीतिक रणनीति
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सभी राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया है। आवश्यक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है।
1 जुलाई से योजना शुरू होने के बाद नियमित समीक्षा होगी ताकि किसी भी कमी को तुरंत दूर किया जा सके। पंचायत स्तर पर अधिकारियों को नई प्रक्रिया की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है।
उपभोक्ताओं और मजदूरों के लिए आवश्यक सलाह
ग्रामीण मजदूरों को यह सलाह दी जा रही है कि वे अपने आवश्यक दस्तावेजों से जुड़े ई-केवाईसी को जल्द से जल्द पूरा कर लें। नई योजना के बारे में पंचायत कार्यालय से जानकारी लें और उपलब्ध कामों में हिस्सा लें।
जो परिवार पहले मनरेगा से जुड़े थे, उन्हें नई योजना में स्वतः शामिल किया जाएगा। अपनी आय बढ़ाने के लिए वे विभिन्न स्किल विकास कार्यक्रमों से भी जुड़ सकते हैं।
निष्कर्ष
1 जुलाई 2026 से शुरू होने वाली VB-G RAM G योजना ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में एक नया अध्याय है। 125 दिन की रोजगार गारंटी, स्मार्ट टेक्नोलॉजी और लक्षित विकास कार्यों के साथ यह योजना पुरानी कमियों को दूर कर गांवों को नई दिशा देगी। सरकार का पूरा फोकस पारदर्शिता, दक्षता और स्थायी विकास पर है।
अगर योजना को सही तरीके से लागू किया गया तो करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ेगी और भारत के गांव विकसित भारत के सपने को साकार करने में योगदान देंगे। अभी पूरा ध्यान इस संक्रमण काल को सुचारू बनाने पर है, जो आने वाले दिनों में ग्रामीण भारत की सूरत बदलने वाली साबित हो सकती है।
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