Electronic Skin Self Healing Technology: इलेक्ट्रॉनिक स्किन का कमाल, खुद टूटकर जुड़ जाएगी यह स्मार्ट तकनीक, जानिए पूरी खबर

Electronic Skin Self Healing Technology: इलेक्ट्रॉनिक स्किन का कमाल, खुद टूटकर जुड़ जाएगी यह स्मार्ट तकनीक, जानिए पूरी खबर

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Electronic Skin Self Healing Technology: विज्ञान और तकनीक की दुनिया में लगातार ऐसे नए आविष्कार हो रहे हैं जो इंसानी जिंदगी को और अधिक सुविधाजनक बना रहे हैं। इसी कड़ी में सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के वैज्ञानिकों ने एक बेहद अनूठा और चमत्कारिक आविष्कार किया है। शोधकर्ताओं ने एक ऐसी खास इलेक्ट्रॉनिक स्किन विकसित की है जो कटने या फटने के बाद खुद-ब-खुद ठीक हो जाती है। आज के समय में स्मार्टवॉच, वर्चुअल रियलिटी ग्लव्स और फिटनेस ट्रैकर जैसे वियरेबल गैजेट्स हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि, इन सभी गैजेट्स के सामने सबसे बड़ी समस्या इनके हार्डवेयर का जल्दी खराब होना और रिसाइक्लिंग से जुड़ी चुनौतियां थीं। इस नई तकनीक के आने से वियरेबल इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि यह नई सामग्री न केवल लचीली है बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है। प्रतिष्ठित जर्नल नेचर सस्टेनेबिलिटी में इस शोध के नतीजे प्रकाशित होने के बाद से पूरी दुनिया के वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान इस ओर आकर्षित हुआ है।

Electronic Skin Self Healing Technology: वियरेबल इलेक्ट्रॉनिक्स के सामने खड़ी होती हैं बड़ी चुनौतियां

आधुनिक दौर में फिटनेस ट्रैकर, स्मार्ट हेल्थ सेंसर और विभिन्न प्रकार के वियरेबल डिवाइस लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इन तमाम गैजेट्स को शरीर की लगातार होने वाली हरकतों के साथ मुड़ना और खिंचना पड़ता है, जिसके लिए इनमें बेहद मुलायम और लचीले मटेरियल का उपयोग किया जाता है। इसके बावजूद लगातार मुड़ने, खिंचने और पड़ने वाले दबाव के कारण इनके अंदर मौजूद बेहद पतले मेटल सर्किट अपनी तय जगह से अलग होने लगते हैं। कई बार मामूली कट या जरा सी दरार भी पूरे सेंसर को बेकार कर देती है, जिससे डिवाइस को ठीक कराना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, अधिकांश फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक मटेरियल पेट्रोलियम बेस्ड प्लास्टिक से बनाए जाते हैं, जिन्हें इस्तेमाल के बाद रिसाइकिल करना बेहद कठिन काम होता है। यही कारण है कि वैज्ञानिक लंबे समय से किसी ऐसे स्थायी और टिकाऊ विकल्प की तलाश में थे जो इन सभी समस्याओं का एक साथ सटीक समाधान दे सके।

नए मटेरियल ने सुलझाई वियरेबल गैजेट्स की कई समस्याएं

इन्हीं तमाम तकनीकी समस्याओं और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने एक नई सामग्री तैयार की है, जिसे इंट्रिंसिकली डायनामिक बायोसबस्ट्रेट यानी आईडीबीएस नाम दिया गया है। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा मजबूत बेस तैयार करना था जो लचीला होने के साथ-साथ खराब होने पर खुद की मरम्मत भी कर सके। इस विशेष मटेरियल को बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने दो प्राकृतिक तत्वों का चयन किया है, जिनमें पहला लिपोइक एसिड है जो जीवित कोशिकाओं में पाया जाता है। वहीं, दूसरा महत्वपूर्ण घटक फाइटिक एसिड है, जो प्राकृतिक रूप से बीजों और अनाजों में प्रचुर मात्रा में मौजूद रहता है। इन दोनों नेचुरल मटेरियल को किसी भी खतरनाक सॉल्वेंट या अलग केमिकल कैटेलिस्ट के बिना केवल गर्म करके एक विशेष नेटवर्क तैयार किया गया है। इसमें अलग-अलग प्रकार के रासायनिक बॉन्ड मौजूद होते हैं, जो इस पूरी सामग्री को बेहद अनूठी और उपयोगी गुणवत्ता प्रदान करते हैं।

कट लगने के बाद अपने आप ठीक हो जाती है तकनीक

इस नई सामग्री की सबसे बड़ी और हैरान करने वाली विशेषता इसकी सेल्फ-हिलिंग यानी खुद को ठीक करने की अद्भुत क्षमता है। जब किसी कारणवश इस मटेरियल को नुकसान पहुंचता है, तो इसके कुछ आंतरिक बॉन्ड टूट जाते हैं, लेकिन खास बात यह है कि वे अपने आप दोबारा जुड़ जाते हैं। इसी रासायनिक प्रक्रिया के जरिए यह सामग्री अपनी मजबूती का एक बड़ा हिस्सा बहुत कम समय में दोबारा हासिल कर लेती है। प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों के दौरान इस मटेरियल के एक वर्जन को उसकी मूल लंबाई से आठ गुना से भी ज्यादा तक खींचकर परखा गया था। इसे बुरी तरह से नुकसान पहुंचाने के बाद भी इसने कमरे के सामान्य तापमान पर करीब छह घंटे के भीतर अपनी ताकत का अस्सी प्रतिशत से अधिक हिस्सा वापस पा लिया था। इसके अलावा सबसे दिलचस्प बात यह रही कि नुकसान और ठीक होने के इस पूरे चक्र को पांच बार दोहराए जाने के बावजूद यह मटेरियल अपनी नब्बे प्रतिशत से ज्यादा मजबूती बरकरार रखने में सफल रहा।

Electronic Skin Self Healing Technology: मेटल सर्किट को मजबूती से जोड़े रखने की क्षमता

वियरेबल इलेक्ट्रॉनिक्स की सफलता के लिए केवल लचीलापन ही पर्याप्त नहीं होता है, बल्कि इलेक्ट्रिकल सिग्नल पहुंचाने वाले मेटल कंडक्टर का बेस मटेरियल से मजबूती से जुड़े रहना भी जरूरी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस नए बायोसबस्ट्रेट ने आमतौर पर उपयोग किए जाने वाले अन्य फ्लेक्सिबल मटेरियल के मुकाबले मेटल के साथ कहीं अधिक मजबूत बॉन्ड का निर्माण किया है। इस बेहतरीन पकड़ के कारण बार-बार मुड़ने या खिंचने के बावजूद इलेक्ट्रॉनिक सर्किट के अपनी जगह से अलग होने की संभावना न के बराबर हो जाती है। शोधकर्ताओं की टीम ने इस उन्नत सामग्री का उपयोग करके कई उपयोगी प्रोटोटाइप भी सफलतापूर्वक तैयार किए हैं। इनमें ऐसी खास इलेक्ट्रॉनिक स्किन शामिल है जो तापमान, सांस से पैदा होने वाली नमी और शरीर की सामान्य गतिविधियों को बेहद बारीकी से माप सकती है। इसके साथ ही ऐसे इलेक्ट्रोड भी बनाए गए हैं जो इंसान के दिल की धड़कन और मांसपेशियों की गतिविधियों को सटीक रूप से रिकॉर्ड करने की क्षमता रखते हैं।
भविष्य की तकनीक के लिहाज से यह आविष्कार इलेक्ट्रॉनिक कचरे को कम करने और टिकाऊ गैजेट्स के निर्माण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है। जिस प्रकार से यह नई सामग्री प्राकृतिक तत्वों के मेल से तैयार की गई है और उपयोग के बाद रिसाइकिल होने की क्षमता रखती है, उससे पर्यावरण संरक्षण को भी बड़ा बल मिलेगा। आने वाले समय में जब यह तकनीक व्यावसायिक रूप से बाजार में उतरेगी, तो हमारे स्मार्ट उपकरणों की उम्र और उनकी कार्यक्षमता में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा। वैज्ञानिक अब इस तकनीक को और अधिक उन्नत बनाने पर काम कर रहे हैं ताकि इसे रोजमर्रा के उपभोक्ता उत्पादों में आसानी से एकीकृत किया जा सके। इस पूरी प्रगति ने यह साबित कर दिया है कि प्रकृति और विज्ञान का सही तालमेल भविष्य की सबसे बड़ी तकनीकी चुनौतियों का बहुत ही सरल और प्रभावी समाधान ढूंढ सकता है।

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