क्या आपको भी होती है सुबह उठते ही जोड़ों में जकड़न? इसे हल्के में न लें, यह अर्थराइटिस का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है, जानें बचाव के तरीके।

रुमेटाइड और ऑस्टियोआर्थराइटिस के बीच अंतर को पहचानें; सही खान-पान और एक्सरसाइज से पाएं राहत।

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Arthritis symptoms: हर सुबह की शुरुआत अगर ताजगी की बजाय जोड़ों के दर्द और अकड़न से हो, तो यह शरीर का एक चेतावनी संदेश है जिसे नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है। लाखों भारतीय इस समस्या को रोजमर्रा की थकान समझकर टाल देते हैं, लेकिन यह लापरवाही आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है। चिकित्सा विज्ञान में सुबह उठने के बाद जोड़ों में होने वाली जकड़न को मॉर्निंग स्टिफनेस कहते हैं। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब रात भर शरीर निष्क्रिय रहने के कारण जोड़ों के बीच मौजूद सिनोवियल फ्लूइड गाढ़ा हो जाता है। यह सिनोवियल फ्लूइड जोड़ों के लिए प्राकृतिक लुब्रिकेंट का काम करता है। स्वस्थ शरीर में जैसे ही हलचल शुरू होती है, यह फ्लूइड सामान्य हो जाता है। लेकिन जब जोड़ों में सूजन या कोई बीमारी हो, तो यह जकड़न घंटों तक बनी रहती है।

रात में तापमान कम होने से जोड़ों के ऊतक सिकुड़ते हैं और दबाव बढ़ता है जिससे सुबह अकड़न महसूस होती है। गलत मुद्रा में सोने से मांसपेशियों पर अनावश्यक खिंचाव पड़ता है जो जोड़ों को प्रभावित करता है। उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों का कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगता है जिससे हड्डियां सीधे रगड़ खाने लगती हैं। इसके अलावा शरीर में पानी की कमी भी जोड़ों के प्राकृतिक लुब्रिकेशन को कमजोर करती है। रुमेटाइड अर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून रोग है जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली भूल से अपने ही जोड़ों पर आक्रमण कर देती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी भारत में बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रही है और महिलाओं में इसके मामले अपेक्षाकृत अधिक देखे जाते हैं। इस बीमारी में हाथों और पैरों के छोटे जोड़ों में सूजन, लालिमा और गर्माहट महसूस होती है। सुबह की जकड़न आधे घंटे से अधिक बनी रहे तो यह रुमेटाइड अर्थराइटिस का संकेत हो सकता है।

Arthritis symptoms: विभिन्न प्रकार के अर्थराइटिस और उनके विशिष्ट लक्षण

ऑस्टियोआर्थराइटिस को वियर एंड टियर अर्थराइटिस भी कहा जाता है। यह मुख्यतः घुटनों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है और उम्र के साथ इसकी संभावना बढ़ती जाती है। इस बीमारी में सुबह की जकड़न आमतौर पर 15 से 20 मिनट में कम हो जाती है जो इसे रुमेटाइड अर्थराइटिस से अलग पहचानने में मदद करती है। अधिक वजन, शारीरिक श्रम और पुरानी चोट इस रोग के खतरे को बढ़ाते हैं। वहीं फाइब्रोमायल्गिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें जोड़ों की जकड़न के साथ पूरे शरीर में व्यापक दर्द, लगातार थकान और नींद में गड़बड़ी जैसे लक्षण एक साथ दिखाई देते हैं। रुमेटोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी में मांसपेशियों के विशेष संवेदनशील बिंदुओं पर हल्का दबाव देने पर भी तीव्र दर्द होता है। यह बीमारी अक्सर लंबे समय तक गलत पहचान ली जाती है क्योंकि इसके लक्षण अन्य रोगों जैसे लग सकते हैं।

सुबह की जकड़न से राहत पाने के लिए बिस्तर से उठने से पहले ही उंगलियों, कलाइयों और पैरों को धीरे-धीरे हिलाना शुरू करें। इस हल्की स्ट्रेचिंग से रक्त संचार बेहतर होता है और जोड़ों को जागने का समय मिलता है। गरम पानी से स्नान करना या प्रभावित क्षेत्र पर हीटिंग पैड का उपयोग करना मांसपेशियों की अकड़न को प्रभावी रूप से कम करता है। फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह पर नियमित व्यायाम करने से जोड़ों की लचीलापन बनाए रखने में मदद मिलती है। आहार विशेषज्ञों के अनुसार सूजनरोधी गुणों से भरपूर भोजन जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। हल्दी और अदरक में प्राकृतिक सूजनरोधी तत्व होते हैं। अखरोट और अलसी में ओमेगा थ्री फैटी एसिड होता है जो जोड़ों की सूजन को नियंत्रित करता है। विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा हड्डियों और जोड़ों की मजबूती के लिए जरूरी है और पर्याप्त पानी पीने से जोड़ों का लुब्रिकेशन बना रहता है।

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