Dharmendra Pradhan Resignation: धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को सौंपा इस्तीफा, NEET विवाद और जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के बीच कहा- युवाओं के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता
इस्तीफे में छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था पर जताई चिंता, विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं
Dharmendra Pradhan Resignation: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में सामने आई अनियमितताओं और दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले एक महीने से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे अनिश्चितकालीन छात्र आंदोलन के बीच उन्होंने यह बड़ा कदम उठाया। धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपना पत्र साझा करते हुए स्पष्ट किया कि यह फैसला उनके व्यक्तिगत सम्मान या प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि देश की युवा शक्ति और उनके भविष्य की सुरक्षा का सवाल है।
उन्होंने पत्र में लिखा कि जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में बने हालात का राष्ट्र-विरोधी तत्व अनुचित लाभ न उठा सकें, देश की एकता अक्षुण्ण रहे और किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य कानूनी दांव-पेंचों में न उलझे, इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया है।
Dharmendra Pradhan Resignation: इस्तीफे की घोषणा और पत्र का मूल भाव
धर्मेंद्र प्रधान ने देश के युवाओं को संबोधित करते हुए अपने पत्र की शुरुआत की। उन्होंने उल्लेख किया कि वे पिछले चार दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के कार्यों से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि एक पारदर्शी, समावेशी और सुदृढ़ शिक्षा व्यवस्था ही किसी भी राष्ट्र की प्रगति का मुख्य आधार होती है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि युवाओं की भावनाओं का सम्मान करना और उनके सपनों को साकार करना सार्वजनिक जीवन की सर्वोच्च नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मंत्रिपरिषद के अपने सहयोगियों तथा शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का धन्यवाद दिया और संकल्प जताया कि वे आगे भी देश की सेवा में पूरी निष्ठा से तत्पर रहेंगे।
नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में गड़बड़ी और प्रशासनिक कार्रवाई
पत्र में 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में आई शिकायतों का उल्लेख करते हुए पूर्व शिक्षा मंत्री ने बताया कि गड़बड़ी की सूचना मिलते ही केंद्र सरकार ने तत्परता दिखाई। मामले की जांच तत्काल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई और मूल परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने का फैसला लिया गया।
21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई और 16 जुलाई को परिणाम घोषित हुए, जिसमें कई वंचित व गरीब मेधावी छात्रों ने सफलता प्राप्त की। इसके अलावा भविष्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अगले वर्ष से नीट-यूजी को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT Mode) में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
‘गुमराह करने की कोशिश और मेरी नैतिक जिम्मेदारी’
धर्मेंद्र प्रधान ने दुख व्यक्त करते हुए लिखा कि परिणाम आने के बाद भी कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों और समूहों ने विद्यार्थियों को गुमराह करने का प्रयास किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले दिन से ही पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी ली थी और वे कभी अपनी जवाबदेही से पीछे नहीं हटे। उनका मुख्य ध्येय यही था कि परीक्षा माफिया के कारण किसी भी प्रतिभाशाली छात्र का नुकसान न हो। हालांकि, पिछले दस दिनों की घटनाओं से व्यथित होकर उन्होंने फैसला किया कि छात्रों का ध्यान पढ़ाई से न भटके और युवा शक्ति भ्रम के जाल में न फंसे, इसलिए इस्तीफा देना ही उचित मार्ग है।
जंतर-मंतर पर आंदोलन और सीजेपी (CJP) की प्रतिक्रिया
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व में छात्र पिछले एक महीने से अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे थे। संगठन ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अपनी ‘गैर-समझौतावादी’ मांग घोषित किया था।
इस्तीफे के बाद सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे “लोकतंत्र और छात्र शक्ति की जीत” करार दिया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन से जुड़ी अन्य दो मांगें—मृतक छात्रों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा और 20 जुलाई की घटना में शामिल पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई—अभी बाकी हैं। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित विभिन्न विपक्षी नेताओं ने युवाओं के संघर्ष की सराहना की और इसे जन दबाव की जीत बताया।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की भावी दिशा
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2026) के क्रियान्वयन, शीर्ष संस्थानों (IITs/IIMs) के विस्तार और डिजिटल लर्निंग पर बल दिया गया था।
नीट विवाद (Dharmendra Pradhan Resignation) के बाद अब केंद्र सरकार परीक्षा तंत्र में ऐतिहासिक सुधारों के लिए कानून और विशेष त्वरित अदालतों (Fast-track courts) के गठन पर विचार कर रही है। इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का प्रभार किसी वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री को सौंपे जाने अथवा आगामी कैबिनेट फेरबदल की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
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