Cockroach Janata Party: जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन जारी, छात्रों ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई; विपक्षी नेताओं ने जताया समर्थन
छात्रों की मांगों के समर्थन में विपक्षी नेता पहुंचे, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज
Cockroach Janata Party: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर युवा और छात्र धरने पर बैठे हैं। सोमवार को संसद की ओर निकाले गए मार्च के दौरान हुई घटनाओं के बाद माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। विपक्षी दलों के बड़े नेता भी मंगलवार को प्रदर्शन स्थल पहुंचे और प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया लेकिन रात में रिहा कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे पीछे नहीं हटेंगे।
प्रदर्शन की शुरुआत और संसद मार्च
सीजेपी ने 20-21 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च निकाला था। नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं के विरोध में यह कदम उठाया गया। हजारों युवा, छात्र और समर्थक जंतर-मंतर पर जमा हुए। बारिश के बावजूद भीड़ बढ़ती गई। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाई और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका।
स्थिति बिगड़ने पर लाठीचार्ज भी हुआ। पुलिस के अनुसार 118 से अधिक जवान घायल हुए और करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। कुछ सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचने की भी खबर है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने बच्चों और महिलाओं पर भी बल प्रयोग किया। अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और वे केवल जंतर-मंतर पर ही प्रदर्शन करेंगे।
अभिजीत दीपके और सीजेपी का सफर
अभिजीत दीपके सीजेपी के संस्थापक हैं। बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे इस युवा ने मई 2026 में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद यह आंदोलन शुरू किया था। मुख्य न्यायाधीश ने कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी, जिसके बाद दीपके ने व्यंग्यात्मक तरीके से कॉकरोच जनता पार्टी नाम से सोशल मीडिया कैंपेन चलाया।
कुछ ही दिनों में इंस्टाग्राम पर करोड़ों फॉलोअर्स जुड़ गए। जून में जंतर-मंतर पर पहला बड़ा प्रदर्शन हुआ और तब से यह आंदोलन जारी है। दीपके का कहना है कि युवा अब डर नहीं रहे। वे परीक्षा लीक, नौकरी की कमी और शिक्षा व्यवस्था की खामियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
विपक्षी नेताओं का जंतर-मंतर पहुंचना
मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, शरद पवार और उद्धव ठाकरे समेत कई विपक्षी नेता जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने छात्रों के साथ एकजुटता जताई। बाद में ये नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए।
राहुल गांधी ने पांच मांगें रखीं। इनमें धर्मेंद्र प्रधान और अमित शाह का इस्तीफा, छात्रों पर हुए हमलों की जांच, संसद में चर्चा, प्रधानमंत्री की माफी और शिक्षा व्यवस्था में सुधार शामिल हैं। पुलिस ने शाम करीब सात बजे नेताओं को हिरासत में लिया। राहुल गांधी को छत्रसाल स्टेडियम और प्रियंका गांधी को मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया। रात नौ बजे के आसपास सभी को रिहा कर दिया गया।
सोनम वांगचुक का अनशन और स्वास्थ्य
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन भी जारी है। वे सीजेपी प्रदर्शन से जुड़े हैं लेकिन उनका अनशन अलग है। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल शिफ्ट किया गया।
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने अस्पताल में उनसे मुलाकात की। वांगचुक छात्रों के मुद्दे पर समर्थन जताते रहे हैं। उनकी हालत को लेकर समर्थक चिंतित हैं।
सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया
दिल्ली पुलिस ने संसद और आसपास के इलाकों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है। बैरिकेडिंग बढ़ा दी गई है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, इसलिए कार्रवाई की गई।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष पर आरोप लगाया है कि वे छात्रों के गुस्से का राजनीतिक फायदा उठा रहे हैं। सरकार का रुख है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के प्रयास चल रहे हैं और लीक की जांच हो रही है। लखनऊ में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस दफ्तर के बाहर प्रदर्शन की योजना बनाई।
Cockroach Janata Party: छात्रों का गुस्सा और मुख्य मुद्दा
जंतर-मंतर पर बैठे छात्र बताते हैं कि नीट सहित कई परीक्षाओं में लीक होने से उनका भविष्य प्रभावित हुआ है। कई अभ्यर्थी बार-बार परीक्षा देने को मजबूर हैं। बेरोजगारी और परीक्षाओं की अनिश्चितता ने युवाओं में आक्रोश पैदा किया है।
कुछ छात्र बीमारी की हालत में भी धरना जारी रखे हुए हैं। सीजेपी का आरोप है कि परीक्षा एजेंसियों में पारदर्शिता की कमी है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हो रही।
आंदोलन की आगे की रणनीति
अभिजीत दीपके ने कहा है कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, प्रदर्शन खत्म नहीं होगा। उन्होंने समर्थकों से अपील की है कि शांति बनाए रखें और केवल जंतर-मंतर पर ही इकट्ठा हों।
सीजेपी देशभर में आंदोलन फैलाने की बात कह रही है। विपक्षी दल भी संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहे हैं। बुधवार को भी प्रदर्शन जारी रहने की संभावना है।
राजनीतिक समीकरण और युवा आवाज
यह प्रदर्शन सिर्फ एक संगठन का नहीं बल्कि युवा पीढ़ी के व्यापक असंतोष को दर्शाता है। सोशल मीडिया से सड़क तक पहुंचा यह आंदोलन अब विपक्षी दलों का समर्थन पा चुका है। सरकार इसे राजनीतिक रंग देने का आरोप लगा रही है तो प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका मुद्दा शिक्षा और रोजगार का है। जंतर-मंतर पर नारे गूंज रहे हैं और छात्र डटे हुए हैं। दिल्ली की सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है।
निष्कर्ष
जंतर-मंतर का यह धरना अब सिर्फ प्रदर्शन नहीं बल्कि युवाओं (Cockroach Janata Party) की आवाज बन चुका है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े छात्र और समर्थक कह रहे हैं कि परीक्षा लीक जैसी घटनाएं देश के भविष्य को नुकसान पहुंचा रही हैं। विपक्षी नेताओं के शामिल होने से मुद्दा और गरमाया है। पुलिस कार्रवाई और नेताओं की हिरासत के बावजूद प्रदर्शन जारी है। आने वाले दिनों में संसद सत्र में इस मुद्दे पर चर्चा होगी या नहीं, यह देखना बाकी है। फिलहाल जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के झंडे लहरा रहे हैं और छात्र अपनी मांगों पर अड़े हैं।
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