Childhood Junk Food Effect: सावधान! बचपन में खाया जंक फूड हमेशा के लिए बदल देता है दिमाग की बनावट, रिसर्च में बड़ा खुलासा

Childhood Junk Food Effect: 'नेचर कम्युनिकेशंस' की स्टडी में खुलासा, बचपन का फास्ट फूड हमेशा के लिए बिगाड़ देता है मस्तिष्क की बनावट।

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Childhood Junk Food Effect: पिज्जा, बर्गर, चिप्स और कोल्ड ड्रिंक्स जैसी चीजें आज बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। माता-पिता अक्सर बच्चों की जिद के आगे घुटने टेक देते हैं, लेकिन यह लाड-प्यार आपके बच्चे के भविष्य को हमेशा के लिए अंधकार में धकेल रहा है। एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक शोध में बेहद चौंकाने वाला और डराने वाला खुलासा हुआ है। इस रिसर्च के मुताबिक, बचपन में बहुत अधिक मात्रा में जंक फूड या बिना पोषक तत्वों वाले खाने का सेवन करने से दिमाग की बनावट यानी उसकी संरचना हमेशा के लिए बदल जाती है। सबसे परेशान करने वाली बात यह है कि अगर कोई व्यक्ति बड़ा होने के बाद अपनी इस आदत को सुधार भी ले और पूरी तरह सेहतमंद खाना (हेल्दी डाइट) अपना ले, तब भी बचपन में दिमाग को हो चुके नुकसान की पूरी भरपाई नहीं की जा सकती।

Childhood Junk Food Effect: नेचर कम्युनिकेशंस की स्टडी ने दुनिया को चौंकाया

यह महत्वपूर्ण और गंभीर अध्ययन प्रसिद्ध विज्ञान पत्रिका ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ में प्रकाशित हुआ है। यूनिवर्सिटी कॉलेज कॉर्क के शोधकर्ताओं ने बच्चों के खान-पान और उनके मानसिक विकास के बीच के संबंध को समझने के लिए एक लंबा शोध किया। इस अध्ययन के दौरान सामने आया कि जो बच्चे बचपन में नियमित रूप से ज्यादा फैट और हाई शुगर यानी चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, उनके मस्तिष्क में स्थायी परिवर्तन हो जाते हैं।

इस स्टडी की मुख्य लेखिका डॉ. क्रिस्टीना कुएस्टा मार्टी ने बताया कि जीवन के शुरुआती दिनों में हम जो कुछ भी खाते हैं, उसका असर केवल हमारे पेट या वजन पर नहीं पड़ता, बल्कि वह हमारे सोचने-समझने की क्षमता को भी तय करता है। बचपन का यह खराब खान-पान इंसान के बड़े होने पर भी उसकी खाने की आदतों को बुरी तरह प्रभावित रखता है।

दिमाग के ‘हाइपोथैलेमस’ पर होता है सीधा हमला

वैज्ञानिकों ने इस गहरे राज से परदा उठाने के लिए चूहों पर एक जटिल प्रयोगशाला परीक्षण किया था। इस प्रयोग के दौरान जिन जानवरों को उनके जीवन के शुरुआती और विकासशील दौर में अत्यधिक वसा और चीनी से भरपूर भोजन दिया गया, उनके बड़े होने पर खाने-पीने के व्यवहार में कुछ स्थायी और असामान्य बदलाव देखे गए।

जब वैज्ञानिकों ने उनके मस्तिष्क की जांच की, तो पाया कि जंक फूड के कारण दिमाग के ‘हाइपोथैलेमस’ हिस्से में गंभीर गड़बड़ी पैदा हो गई थी। चिकित्सा विज्ञान में हाइपोथैलेमस को शरीर का सबसे जरूरी हिस्सा माना जाता है, क्योंकि यही हमारे शरीर के ऊर्जा संतुलन को बनाए रखता है और हमें भूख लगने या पेट भरने का संकेत देता है। जब इस हिस्से की बनावट बिगड़ जाती है, तो इंसान को लगातार खाने की लत लग जाती है, जिससे मोटापा और अन्य बीमारियां पैर पसारने लगती हैं।

Childhood Junk Food Effect: याददाश्त कमजोर होना और एकाग्रता की कमी का बड़ा खतरा

इस शोध में साफ किया गया है कि जंक फूड केवल हमारे शरीर का बाहरी ढांचा या वजन ही नहीं बढ़ाता, बल्कि यह अंदरूनी तौर पर हमारे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बेहद धीमा कर देता है। बचपन में फास्ट फूड का ज्यादा सेवन करने वाले बच्चों में बड़े होने पर याददाश्त की कमजोरी, किसी भी काम पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और कुछ भी नया सीखने की क्षमता में भारी गिरावट देखी गई है।

अक्सर स्कूलों और घरों में बच्चों की खराब परफॉर्मेंस को उनकी लापरवाही मान लिया जाता है, जबकि इसके पीछे असल जिम्मेदार उनके पेट में जा रहा पैकेट बंद और प्रोसेस्ड फूड होता है। मेट्रो शहरों में रहने वाले हजारों परिवारों के बच्चे इस समय इस मानसिक और शारीरिक संकट से जूझ रहे हैं।

Childhood Junk Food Effect: क्या इस गंभीर नुकसान से बचने का कोई उपाय है?

हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि जंक फूड से दिमाग की बनावट में होने वाला नुकसान काफी हद तक स्थायी होता है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने एक छोटी सी उम्मीद की किरण भी दिखाई है। रिसर्च के अनुसार, कुछ विशेष प्रकार के फायदेमंद आंत के बैक्टीरिया (गट बैक्टीरिया) और ‘प्रीबायोटिक फाइबर’ के सही इस्तेमाल से दिमाग पर पड़ने वाले इन बुरे प्रभावों को कुछ हद तक कम जरूर किया जा सकता है।

डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि इस नुकसान से बचने का इकलौता और सबसे बेहतर तरीका यही है कि बच्चों को शुरुआती सालों में जंक फूड के स्वाद से पूरी तरह दूर रखा जाए। माता-पिता को चाहिए कि वे पैकेट बंद चीजों के बजाय बच्चों की थाली में हरी सब्जियां, फल, दूध और मोटे अनाज को शामिल करें, ताकि उनके मस्तिष्क का विकास प्राकृतिक और सही तरीके से हो सके।

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