CEC Gyanesh Kumar SIR Controversy: सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई, सामूहिक निर्णय प्रक्रिया और डेटाबेस ऑडिट पर टिकी नजर

SIR से जुड़े फैसलों और आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर उठे सवाल, CJI सूर्यकांत की पीठ सुनेगी याचिकाएं

0
CEC Gyanesh Kumar SIR Controversy: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारत निर्वाचन आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर दायर याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय में आज, सोमवार 5 अक्टूबर 2026 को एक बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान कथित रूप से एकतरफा निर्णय लेने और बहुसदस्यीय आयोग के अन्य दो सदस्यों की सहमति की अनदेखी करने के आरोपों की पृष्ठभूमि में यह मामला शीर्ष अदालत की चौखट पर पहुंचा है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ इस संवेदनशील संवैधानिक विषय पर दलीलें सुनेगी।

CEC Gyanesh Kumar SIR Controversy: क्या हैं CEC ज्ञानेश कुमार और आयोग के फैसलों पर मुख्य आरोप

याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े कई अहम प्रशासनिक व तकनीकी निर्णय सामूहिक विमर्श और पूर्ण सहमति के बिना लिए गए। याचिकाओं में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच आयोग के भीतर लगभग 14 नीतिगत और प्रक्रियात्मक मामलों पर आंतरिक असहमति या आपत्तियां दर्ज की गई थीं। इन आपत्तियों को कथित रूप से चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के विचारों से जोड़कर देखा जा रहा है। याचिकाकर्ताओं का प्राथमिक विधिक तर्क है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत भारत निर्वाचन आयोग एक बहुसदस्यीय संवैधानिक निकाय है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्ववर्ती फैसलों, विशेष रूप से टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ के सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा गया है कि आयोग के समस्त नीतिगत निर्णय आम सहमति या बहुमत के आधार पर ही वैध माने जा सकते हैं, और किसी एक पदाधिकारी द्वारा एकतरफा शक्तियों का प्रयोग संवैधानिक ढांचे के विपरीत है।

सुप्रीम कोर्ट में उठाई गई प्रमुख मांगें

शीर्ष अदालत के समक्ष सूचीबद्ध याचिकाओं में कई गंभीर और दूरगामी राहतों की मांग की गई है। याचिका में अंतरिम राहत के तौर पर निर्देश देने की मांग की गई है कि जब तक पूरे मामले का विधिक निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक आयोग के किसी भी फैसले को तीनों आयुक्तों की औपचारिक सहमति अथवा बहुमत के बिना लागू न किया जाए। इसके साथ ही कथित रूप से बिना सर्वसम्मति या नियमानुसार प्रक्रिया का पालन किए बिना लिए गए 14 निर्णयों को रद्द करने या उनकी वैधानिक समीक्षा का अनुरोध किया गया है। पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र पड़ताल के लिए सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल या न्यायिक आयोग के गठन की प्रार्थना भी की गई है। इसके अलावा विवाद से जुड़े सभी रिकॉर्ड, आंतरिक फाइलों की नोटिंग्स और बैठकों के मिनट्स को कानूनी तौर पर संरक्षित रखने का अंतरिम निर्देश मांगा गया है।

SIR प्रक्रिया, ECINet और ERONet के फोरेंसिक ऑडिट की मांग

इस कानूनी विवाद का केंद्रीय बिंदु देश भर में चलाए गए मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की पारदर्शिता से जुड़ा है। याचिकाओं में दावा किया गया है कि पुनरीक्षण अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने अथवा बदले जाने की शिकायतें सामने आईं, जिससे चुनावी डेटाबेस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से गुहार लगाई है कि निर्वाचन आयोग के मुख्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ईसीआई-नेट और ईआरओ-नेट का किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से व्यापक साइबर एवं फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि डेटाबेस में किसी भी स्तर पर अनधिकृत संशोधन या प्रक्रियात्मक त्रुटियां तो नहीं हुईं। वहीं दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग का पूर्व में यह रुख रहा है कि देशव्यापी पुनरीक्षण अभियान पूरी तरह पारदर्शी, वैधानिक और चुनाव आयुक्तों की सहमति व संवैधानिक दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही संचालित किया गया था।

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ करेगी सुनवाई

उच्चतम न्यायालय में इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ कर रही है। अदालत के सामने मुख्य संवैधानिक प्रश्न यह है कि क्या चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त संवैधानिक संस्था में आंतरिक निर्णय प्रक्रिया के मानकों और नियमों का उल्लंघन हुआ है। इसके साथ ही प्रशासनिक दक्षता और बहुसदस्यीय संस्था की सामूहिक जिम्मेदारी के बीच संवैधानिक संतुलन कैसे साधा जाए, इस पर भी पीठ विचार करेगी। अदालत यह भी तय करेगी कि क्या चुनावी डेटाबेस के तकनीकी ऑडिट और न्यायिक जांच की याचिका स्वीकार किए जाने योग्य पर्याप्त प्राथमिक आधार मौजूद हैं।

CEC Gyanesh Kumar SIR Controversy: संवैधानिक मर्यादा और चुनावी प्रक्रिया के लिहाज से बेहद अहम दिन

देश की लोकतांत्रिक प्रणाली में निष्पक्ष चुनावों और पारदर्शी मतदाता सूचियों की केंद्रीय भूमिका को देखते हुए इस सुनवाई पर कानूनी, प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों की गहरी निगाहें टिकी हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा आज की जाने वाली प्रारंभिक टिप्पणियां और जारी किए जाने वाले निर्देश न केवल चुनाव आयोग की भविष्य की निर्णय प्रक्रिया की रूपरेखा तय करेंगे, बल्कि मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े पूरे विवाद की भावी दिशा भी निर्धारित करेंगे।

Read More Here

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.