Calcutta High Court: बुलडोजर एक्शन में हद पार करने पर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त, दोबारा बनवाएगा इमारत, देगा 10 लाख मुआवजा
Calcutta High Court ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर व्यावसायिक इमारत गिराने के मामले में सख्त आदेश दिया, नई इमारत और मुआवजे का निर्देश दिया।
Calcutta High Court: अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के नाम पर तय सीमा से आगे जाकर तोड़फोड़ करने के एक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने प्रशासन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। मामला पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले का है, जहां सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के दौरान अधिकारियों ने याचिकाकर्ताओं की दो मंजिला व्यावसायिक इमारत भी गिरा दी थी। जस्टिस पार्थ सारथी सेन ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि अधिकारियों ने अपनी तय सीमा से आगे जाकर कार्रवाई की थी। इसके बाद कोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को न सिर्फ याचिकाकर्ताओं की इमारत दोबारा बनवाने का आदेश दिया, बल्कि जब तक नई इमारत तैयार नहीं होती, तब तक उन्हें मुफ्त वैकल्पिक आवास देने और 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। यह फैसला प्रशासनिक कार्रवाई और नागरिकों के संपत्ति अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक अहम मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।
Calcutta High Court: कोर्ट ने माना, तय सीमा से आगे गई कार्रवाई
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 8 सितंबर को दिए अपने आदेश में हाईकोर्ट ने साफ कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री और पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर यह मानने में कोई परेशानी नहीं है कि अधिकारियों ने याचिकाकर्ताओं के निर्माण को तोड़कर अपनी तय सीमा से आगे जाकर कार्रवाई की। कोर्ट के अनुसार याचिकाकर्ताओं की संपत्ति को बिना किसी वैध अधिकार के गिराया गया था।
सरकारी जमीन पर अतिक्रमण से शुरू हुआ था पूरा विवाद
यह पूरा मामला पूर्व मेदिनीपुर में सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण से जुड़ा था। याचिकाकर्ता कबिता मन्ना और एक अन्य ने स्थानीय ग्राम पंचायत से स्वीकृत नक्शा हासिल करने के बाद अपनी दो मंजिला व्यावसायिक इमारत बनवाई थी, जिसमें दूसरे याचिकाकर्ता का कारोबार भी चलता था। यह विवाद 2024 से ही हाईकोर्ट के सामने था और अगस्त 2024 में एक समकक्ष पीठ ने अधिकारियों को पीडब्ल्यूडी सड़क पर मिलने वाले अवैध अतिक्रमण के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।
पैमाइश और रिपोर्ट के बाद हुई तोड़फोड़ की कार्रवाई
कार्यकारी अभियंता के निर्देश पर सरकारी जमीन की दोबारा पैमाइश कराई गई, जिसके बाद राजस्व निरीक्षक ने 10 सितंबर 2024 को अपनी रिपोर्ट और नक्शा पेश किया। इसके बाद फिर से मौके की जांच हुई और 17 मार्च 2025 को एक और रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें सरकारी प्लॉट नंबर 1 और 12 पर अतिक्रमण होने का उल्लेख किया गया। इन रिपोर्टों के आधार पर कार्यकारी अभियंता ने अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया था।
याचिकाकर्ताओं को मिली अंतरिम राहत
अधिकारियों की कार्रवाई को याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद उन्हें मार्च 2025 में अंतरिम राहत मिली। बाद में यह मामला डिवीजन बेंच के सामने पहुंचा, जिसने 19 मई 2025 को दर्ज किया कि राज्य ने सरकारी जमीन के एक प्लॉट पर मौजूद अनधिकृत निर्माण को गिराया था। हालांकि याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इस दौरान उनकी अपनी वैध संपत्ति भी प्रभावित हुई, जिस पर आगे सुनवाई की अनुमति दी गई।
राज्य सरकार ने तथ्यों को बताया विवादित
सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता अतिरिक्त तोड़फोड़ के अपने आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री पेश नहीं कर सके। राज्य ने यह भी कहा कि मामले में तथ्यों को लेकर विवाद है, इसलिए रिट क्षेत्राधिकार में इसका फैसला नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हों तो रिट कोर्ट रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर फैसला दे सकता है।
प्लॉट नंबर 650 पर बना निर्माण भी हुआ था ध्वस्त
कोर्ट ने अपनी जांच में पाया कि तोड़फोड़ के दौरान प्लॉट नंबर 1 और 12 पर मौजूद अतिक्रमण के साथ-साथ याचिकाकर्ताओं के एलआर प्लॉट नंबर 650 पर बना वैध निर्माण भी गिरा दिया गया था। इसी आधार पर कोर्ट ने माना कि अधिकारियों की कार्रवाई तय सीमा से कहीं आगे तक गई थी।
दो साल में बनेगी नई इमारत, मिलेगा वैकल्पिक आवास
हाईकोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं की इमारत उनके 1 मार्च के पूरक हलफनामे के साथ संलग्न स्वीकृत नक्शे के अनुसार दोबारा बनाई जाए। इसके निर्माण के लिए फैसले की प्रति मिलने की तारीख से दो साल का समय दिया गया है। साथ ही जब तक नई इमारत तैयार नहीं होती, तब तक याचिकाकर्ताओं को उसी इलाके में मुफ्त वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है।
Calcutta High Court: दो किस्तों में मिलेगा 10 लाख रुपये मुआवजा
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की संपत्ति बिना वैध अधिकार के गिराए जाने को गंभीरता से लेते हुए 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह राशि दो बराबर किस्तों में दी जाएगी, जिसमें पहली किस्त के 5 लाख रुपये अक्टूबर 2026 के आखिरी दिन तक और दूसरी किस्त के 5 लाख रुपये फरवरी 2027 के आखिरी दिन तक चुकाने होंगे।
कुल मिलाकर, कलकत्ता हाईकोर्ट का यह फैसला प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान वैध संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना स्वीकार्य नहीं होगा। कोर्ट ने न सिर्फ याचिकाकर्ताओं को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए, बल्कि नई इमारत और मुआवजे का प्रावधान कर यह भी सुनिश्चित किया कि प्रभावित पक्ष को वास्तविक राहत मिले। यह मामला आने वाले समय में इसी तरह के अन्य विवादों के लिए एक अहम नजीर बन सकता है।
Read More Here:-
Pakistan Cricket Board: आकिब जावेद और वहाब रियाज की हो सकती है छुट्टी, हार के बाद बड़ा फैसला
UP News: स्कूटी से स्कूल पहुंचे मंत्री, बच्चों के बीच बन गए शिक्षक; पढ़ाया भूगोल
IRCTC Dubai Tour Package 2026: ₹92,200 से दुबई-अबू धाबी घूमने का मौका
Samsung Galaxy A56 5G Discount: ₹42 हजार वाला फोन अब ₹9 हजार सस्ता