BRICS Summit 2026: जयशंकर बोले- वैश्विक तनाव के बीच भारत ने बनाई सहमति
नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति, आतंकवाद से लेकर स्थानीय मुद्रा व्यापार तक बनी रणनीति
BRICS Summit 2026: विश्वभर में जारी गंभीर भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण, पश्चिम एशिया के विस्फोटक संकट और रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच देश की राजधानी में संपन्न हुए 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन को भारत की एक ऐतिहासिक कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सम्मेलन के आधिकारिक समापन के उपरांत स्पष्ट किया कि जब वैश्विक व्यवस्था युद्धों और परस्पर विरोधी गुटों में बंटी हुई है, तब ब्रिक्स के विस्तृत मंच पर सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ (New Delhi Declaration 2026) पारित कराना भारत की अद्वितीय “संयोजक शक्ति” (Convening Power) और परिपक्व नेतृत्व का सीधा प्रमाण है।
विस्तारित ब्रिक्स प्रारूप में विभिन्न सदस्य देशों के बीच मौजूद गंभीर द्विपक्षीय मतभेदों और क्षेत्रीय तनावों के बावजूद भारतीय वार्ताकारों ने साझा हितों को प्राथमिकता देते हुए एक संतुलित नीतिगत दस्तावेज तैयार किया। यह सफलता दर्शाती है कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किसी एक गुट का पिछलग्गू बनने के बजाय स्वतंत्र, नियम-आधारित और बहुध्रुवीय वैश्विक संवाद का सबसे विश्वसनीय सेतु बनकर उभरा है।
BRICS Summit 2026: मतभेदों के बीच साधा गया संतुलन
इस शिखर सम्मेलन के राजनयिक वार्ताकारों के समक्ष सबसे जटिल कार्य पश्चिम एशिया के नाजुक हालात और रूस-यूक्रेन युद्ध पर आम सहमति वाली शब्दावली का चयन करना था। ब्रिक्स समूह में अब ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देश भी शामिल हैं, जिनके क्षेत्रीय दृष्टिकोण और रणनीतिक प्राथमिकताएं कई मुद्दों पर भिन्न हैं। इसी प्रकार, रूस स्वयं समूह का संस्थापक सदस्य है, जबकि भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश पश्चिमी जगत के साथ भी गहरे आर्थिक और कूटनीतिक संबंध साझा करते हैं।
भारतीय विदेश मंत्रालय की टीम ने कई दौर की मैराथन वार्ताओं के माध्यम से यह सुनिश्चित किया कि घोषणापत्र में किसी एक पक्षीय दृष्टिकोण को थोपने के स्थान पर तनाव कम करने, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के सम्मान, संयम और संप्रभुता के सिद्धांतों पर बल दिया जाए। नई दिल्ली ने समूह को पश्चिम-विरोधी धड़े के रूप में ब्रांड किए जाने के प्रयासों को कुशलतापूर्वक निष्प्रभावी करते हुए इसे ‘गैर-पश्चिमी’ (Non-Western) किंतु रचनात्मक संवाद के वैश्विक मंच के रूप में स्थापित रखा।
आतंकवाद पर कड़ा रुख: पहलगाम हमले की निंदा से पाकिस्तान को संदेश
कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि आतंकवाद के विरुद्ध साझा घोषणापत्र में शामिल की गई स्पष्ट और दृढ़ भाषा रही। नई दिल्ली घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले की नाम लेकर सामूहिक निंदा दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त, सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाहों के खात्मे और टेरर-फाइनेंसिंग (आतंकी फंडिंग) पर रोक लगाने के लिए वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) के मानकों के पूर्ण क्रियान्वयन की वकालत की गई।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अक्सर आतंकवाद की परिभाषा को लेकर चीनी या अन्य वीटो अवरोधों का सामना करने वाले भारत के लिए यह एक बड़ी सफलता है। ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों द्वारा इस निंदा प्रस्ताव पर मुहर लगाना यह स्पष्ट करता है कि भारत राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाने में पूरी तरह सफल रहा है।
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और न्यू डेवलपमेंट बैंक का विस्तार
सम्मेलन के आर्थिक एजेंडे में वैश्विक वित्तीय प्रणालियों में सुधार और अमेरिकी डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने पर विस्तृत विमर्श हुआ। सदस्य देशों ने आपसी व्यापार और सीमा पार भुगतान प्रणालियों में स्थानीय मुद्राओं (Local Currencies) के उपयोग को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की, ताकि वैश्विक विनिमय दरों के उतार-चढ़ाव से विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं को सुरक्षा मिल सके।
ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की भूमिका को और अधिक सुदृढ़ करते हुए यह निर्णय लिया गया कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और सतत विकास लक्ष्यों के लिए स्थानीय मुद्राओं में ऋण आवंटन बढ़ाया जाएगा। हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया कि यह प्रयास किसी अन्य मुद्रा को नष्ट करने के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार में लचीलापन और बहु-मुद्रा विकल्प उपलब्ध कराने की एक व्यावहारिक आर्थिक व्यवस्था है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और जलवायु अनुकूल कृषि पर जोर
भारत ने शिखर सम्मेलन में अपनी तकनीकी और विकासात्मक प्राथमिकताओं को वैश्विक एजेंडे का हिस्सा बनाया। भारत के सफल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)—विशेषकर यूपीआई (UPI), आधार और डिजीलॉकर जैसे मॉडल्स—को ब्रिक्स देशों के बीच वित्तीय समावेशन बढ़ाने के लिए साझा करने की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
कृषि और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भारत की पहल पर जलवायु-अनुकूल खेती (Climate-Resilient Agriculture), मिलेट्स (मोटे अनाज) के वैश्विक संवर्धन और डिजिटल एग्री-स्टैक के उपयोग पर सहमति बनी। इसके अतिरिक्त, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सुरक्षित, समावेशी और नैतिक उपयोग पर भी समूह ने एक साझा दृष्टिकोण अपनाया, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि तकनीक का लाभ केवल विकसित देशों तक सीमित न रहकर ग्लोबल साउथ की अंतिम पंक्ति तक पहुंचे।
प्रधानमंत्री मोदी की 15 द्विपक्षीय बैठकें: व्यक्तिगत कूटनीति का प्रभाव
सम्मेलन की समग्र सफलता में तीन दिवसीय बैठकों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई 15 औपचारिक द्विपक्षीय मुलाकातों ने निर्णायक भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति और मध्य पूर्व के प्रमुख नेताओं के साथ अलग-अलग संवाद कर द्विपक्षीय तनावों को कम करने और साझा सहमति के बिंदुओं को मजबूत करने पर बल दिया।
बहुपक्षीय सम्मेलनों में व्यक्तिगत नेतृत्व और उच्चतम स्तर का राजनीतिक संवाद अक्सर जटिल राजनयिक गतिरोधों को तोड़ने का काम करता है। भारत ने पूरे वर्ष विभिन्न कार्यसमूहों और मंत्रिस्तरीय बैठकों के माध्यम से जो आधार तैयार किया था, शीर्ष स्तर की इन बैठकों ने उसे अंतिम सहमति के रूप में परिणत कर दिया।
BRICS Summit 2026: निष्कर्ष
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन यह सिद्ध करता है कि गहरे वैचारिक और रणनीतिक अंतर्विरोधों के बीच भी बहुपक्षीय संवाद को परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान स्वयं को एक ऐसे तटस्थ, परिपक्व और प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत किया है जो वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन साधने और ग्लोबल साउथ के वास्तविक सरोकारों को मंच प्रदान करने में पूरी तरह सक्षम है। नई दिल्ली घोषणापत्र का सर्वसम्मति से पारित होना केवल एक राजनयिक दस्तावेज का प्रकाशन नहीं, बल्कि खंडित विश्व व्यवस्था में भारत की बढ़ती कूटनीतिक प्रतिष्ठा और रणनीतिक स्वायत्तता की निर्विवाद पुष्टि है।
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