UP News: स्कूटी से स्कूल पहुंचे मंत्री, बच्चों के बीच बन गए शिक्षक; पढ़ाया भूगोल
मंत्री सुनील शर्मा ने बच्चों को भूगोल पढ़ाया, सवाल पूछे और सरकारी स्कूल में बिताया समय
UP News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सुनील कुमार शर्मा का एक बेहद सादगी भरा और प्रेरक अंदाज सामने आया है। वीआईपी प्रोटोकॉल, सुरक्षा काफिले और सायरन बजाती गाड़ियों से पूरी तरह दूरी बनाते हुए कैबिनेट मंत्री सोमवार सुबह साधारण स्कूटी पर सवार होकर गाजियाबाद के मोहन नगर स्थित करहेड़ा कंपोजिट विद्यालय पहुंचे। स्कूल परिसर में औपचारिकताएं निभाने या अधिकारियों की बैठक लेने के बजाय मंत्री सीधे प्राथमिक कक्षाओं की ओर बढ़ गए और बच्चों के बीच बैठकर एक समर्पित शिक्षक की भूमिका में नजर आए।
मंत्री के इस अप्रत्याशित और सहज रूप को देखकर स्कूल के शिक्षक और नन्हे विद्यार्थी दोनों ही आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने लगभग एक घंटे तक कक्षा में विद्यार्थियों को भूगोल विषय पढ़ाया, ब्लैकबोर्ड पर रेखाचित्र बनाए और बच्चों से संवादात्मक तरीके से पढ़ाई से जुड़े रोचक सवाल पूछे। मंत्री के इस प्रेरक कदम ने न केवल बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाया, बल्कि बुनियादी शिक्षा व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों के सीधे जुड़ाव की एक नई नजीर भी पेश की।
UP News: स्कूटी से पहुंचे कंपोजिट विद्यालय, प्रोटोकॉल छोड़ बच्चों के बीच लगाई क्लास
सामान्य तौर पर किसी भी कैबिनेट मंत्री के दौरे से पूर्व प्रशासनिक अमला, पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था में जुट जाते हैं। किंतु सुनील कुमार शर्मा ने इस बार सभी सरकारी औपचारिकताओं को दरकिनार कर दिया। बिना किसी पूर्व सूचना और बिना किसी सुरक्षा दस्ते के वे सामान्य नागरिक की तरह दोपहिया वाहन चलाते हुए सीधे करहेड़ा के सरकारी स्कूल के मुख्य द्वार पर पहुंचे।
कक्षा कक्ष में प्रवेश करते ही उन्होंने शिक्षकों से अपनी नियमित दिनचर्या जारी रखने को कहा और स्वयं बच्चों की कतार में जाकर खड़े हो गए। इसके बाद उन्होंने हाथ में चॉक और डस्टर उठाया और सीधे अध्यापन का कार्य आरंभ कर दिया। उनका यह आचरण यह दर्शाता है कि सत्ता और पद की सीमाओं से परे जब कोई जनप्रतिनिधि सीधे धरातल पर उतरता है, तो उसका आम जनता और विशेष रूप से नई पीढ़ी पर गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है।
हिमालय के उद्भव का पढ़ाया पाठ, संवादात्मक शैली में समझाए कठिन नियम
भूगोल की कक्षा लेते हुए मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में शामिल हिमालय पर्वत श्रृंखला के निर्माण और उसके भूगर्भीय इतिहास का विषय चुना। उन्होंने टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल और करोड़ों वर्ष पूर्व टेथिस सागर के स्थान पर विशाल हिमालय के उभरने की जटिल वैज्ञानिक प्रक्रिया को अत्यंत सरल, बोलचाल की भाषा और उदाहरणों के जरिए समझाया।
उन्होंने बच्चों को बताया कि हिमालय केवल बर्फ की सफेद चादर ओढ़े पहाड़ों की श्रृंखला नहीं है, बल्कि यह भारत की जलवायु का रक्षक, मानसूनी हवाओं को रोककर वर्षा कराने वाला प्राकृतिक साधन और गंगा-यमुना जैसी पवित्र बारहमासी नदियों का उद्गम स्थल भी है। कठिन भौगोलिक अवधारणाओं को चित्रों और सरल भाषा के जरिए समझकर बच्चों के चेहरे खिल उठे और उन्होंने पूरी तन्मयता के साथ पाठ को ग्रहण किया।
बच्चों के संग सवाल-जवाब का दौर, झिझक तोड़कर सामने आए नन्हे छात्र
अध्यापन के उपरांत मंत्री ने कक्षा को एक जीवंत संवाद मंच में बदल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से केवल रटे-रटाए जवाब मांगने के बजाय उनकी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता को परखने वाले प्रश्न पूछे। जब बच्चों ने सही उत्तर दिए तो मंत्री ने तालियां बजवाकर उनका उत्साहवर्धन किया।
कक्षा के सहज वातावरण का परिणाम यह रहा कि आमतौर पर अजनबियों या अधिकारियों के सामने सहम जाने वाले ग्रामीण और कस्बाई परिवेश के बच्चे भी पूरी निडरता के साथ खड़े हुए। विद्यार्थियों ने पर्यावरण, नदियों और विज्ञान से जुड़े कई रोचक सवाल सीधे मंत्री से पूछे, जिनका उन्होंने अत्यंत धैर्य और आत्मीयता से समाधान किया। मंत्री ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि कक्षा में सवाल पूछने से कभी संकोच नहीं करना चाहिए, क्योंकि हर बड़े वैज्ञानिक और विद्वान की यात्रा मन में उठने वाले छोटे-छोटे प्रश्नों से ही आरंभ होती है।
सरकारी स्कूलों का कायाकल्प और डिजिटल तकनीकों का विस्तार
संवाद के दौरान कैबिनेट मंत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बेसिक शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ और डिजिटल पहलों की प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के सरकारी स्कूल जर्जर भवनों और संसाधनों के अभाव की पुरानी छवि को पीछे छोड़ चुके हैं। आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम, सुसज्जित खेल के मैदान, स्वच्छ पेयजल और डिजिटल लर्निंग टूल्स के माध्यम से परिषदीय स्कूलों को कॉन्वेंट स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने रेखांकित किया कि राज्य में दीक्षा (DIKSHA) जैसे डिजिटल शैक्षणिक पोर्टल्स का व्यापक उपयोग हो रहा है, जिससे 27 लाख से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता जुड़े हुए हैं। शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण सामग्री और छात्रों को क्यूआर-कोडेड पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से उच्चस्तरीय ज्ञान उपलब्ध कराया जा रहा है। तकनीक और मानवीय संवाद के इस सुंदर संगम से प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा के स्तर में ऐतिहासिक सुधार दर्ज किया जा रहा है।
बचपन की यादें साझा कर दिया देश निर्माण का संकल्प
नन्हे विद्यार्थियों के बीच समय बिताते हुए सुनील कुमार शर्मा भावुक भी नजर आए। उन्होंने बच्चों के साथ अपने बचपन और शुरुआती स्कूली दिनों के संस्मरण साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि भौतिक सुख-सुविधाओं का अभाव कभी भी प्रतिभा और सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बन सकता।
उन्होंने बच्चों से लगन और एकाग्रता से अध्ययन करने का आह्वान करते हुए कहा कि आज इन टाट-पट्टियों और बेंचों पर बैठने वाला हर बच्चा कल का वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर, सेना का जांबाज या देश का नीति-निर्माता है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के विजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब गांव और कस्बे का अंतिम बालक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करेगा, तभी 2047 के विकसित भारत की सुदृढ़ आधारशिला रखी जा सकेगी।
UP News: निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुनील कुमार शर्मा का स्कूटी पर सवार होकर सरकारी स्कूल पहुंचना और एक शिक्षक की भांति चॉक संभालना केवल एक दिन की सुर्खी नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक गहरा नीतिगत संदेश है। यह पहल दर्शाती है कि फाइलों और वातानुकूलित दफ्तरों से बाहर निकलकर जब नेतृत्व सीधे प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों की आंखों में झांकता है, तो सरकारी योजनाओं की वास्तविक उपयोगिता और कमियों का सबसे सटीक आकलन होता है। इस प्रकार के निरंतर और अनौपचारिक संवाद से सरकारी तंत्र पर जनता का विश्वास मजबूत होता है और प्राथमिक शिक्षा की दशा व दिशा में क्रांतिकारी परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होता है।
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