Budgam Encounter: बडगाम में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, लश्कर कमांडर मूसा ढेर; इलाके में सघन तलाशी अभियान जारी

यूसमर्ग के कोराग इलाके में सेना, पुलिस और CRPF का संयुक्त ऑपरेशन, तलाशी अभियान जारी

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Budgam Encounter: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के समूल सफाए के लिए चलाए जा रहे अभियानों के तहत सुरक्षाबलों को एक और बड़ी रणनीतिक सफलता हाथ लगी है। मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में स्थित प्रसिद्ध पर्यटन व वन क्षेत्र यूसमर्ग के कोराग इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मंगलवार देर रात हुई भीषण मुठभेड़ में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का शीर्ष कमांडर सुलेमान शाह उर्फ ‘मूसा’ (फौजी मूसा) मारा गया। सेना की चिनार कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (SOG) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने एक सटीक खुफिया इनपुट के आधार पर इस अभियान को अंजाम दिया।

सेना ने इस संयुक्त अभियान को ‘ऑपरेशन कोराग’ नाम दिया था। अधिकारियों के अनुसार सुरक्षाबलों की टुकड़ियां जब घने जंगली इलाके में तलाशी ले रही थीं, तभी छिपे हुए आतंकियों ने स्वचालित हथियारों से अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की और मुठभेड़ में मुख्य लश्कर कमांडर को ढेर कर दिया।

Budgam Encounter: यूसमर्ग के कोराग जंगलों में चला संयुक्त ‘ऑपरेशन कोराग’

बडगाम के ऊंचाई वाले जंगलों में आतंकियों की संदिग्ध मौजूदगी को लेकर 29 सितंबर 2026 को सुरक्षा एजेंसियों को एक अत्यंत पुख्ता और गोपनीय इनपुट प्राप्त हुआ था। सूचना की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टुकड़ियों ने तत्काल यूसमर्ग के कोराग वन क्षेत्र की घेराबंदी शुरू कर दी।

घने जंगलों और दुर्गम ढलानों के कारण इलाके में आगे बढ़ना बेहद चुनौतीपूर्ण था। रात के अंधेरे में सुरक्षाबलों ने घेरा सख्त किया और सभी संभावित निकास मार्गों को सील कर दिया। संदिग्ध गतिविधि दिखने पर जब सुरक्षाबलों ने चुनौती दी, तो आतंकियों ने भारी गोलीबारी की। घंटों चली इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने लश्कर कमांडर को मार गिराया।

घाटी में कई हमलों का मास्टरमाइंड था लश्कर कमांडर मूसा

मारे गए आतंकी की पहचान आधिकारिक तौर पर सुलेमान शाह उर्फ मूसा के रूप में की गई है, जिसे आतंकी हलकों में ‘फौजी मूसा’ के नाम से भी जाना जाता था। खुफिया एजेंसियों के अनुसार वह लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष रैंक का सक्रिय कमांडर था और बडगाम तथा पुलवामा के सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंकी नेटवर्क के संचालन और नए लड़कों की भर्ती में सीधे तौर पर शामिल था।

सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि मूसा लंबे समय से वांटेड सूची में शीर्ष पर था। वह सुरक्षा बलों पर घात लगाकर किए गए हमलों, गैर-स्थानीय श्रमिकों को निशाना बनाने के षड्यंत्रों और स्थानीय युवाओं को आतंक के रास्ते पर धकेलने के मामलों में प्रमुख आरोपी था। उसके मारे जाने से मध्य कश्मीर में लश्कर के सक्रिय ढांचे को गहरा झटका लगा है।

5 सितंबर की मुठभेड़ से बच निकला था, यासिर के बाद अब मूसा का अंत

सुरक्षाबलों द्वारा बडगाम में की गई यह कार्रवाई सितंबर माह के भीतर यूसमर्ग वन क्षेत्र में दूसरा बड़ा आतंकवाद-रोधी प्रहार है। इससे पूर्व 5 सितंबर को इसी यूसमर्ग क्षेत्र के ऊपरी पहाड़ों में एक तीव्र मुठभेड़ हुई थी, जिसमें सुरक्षाबलों ने लश्कर से जुड़े पाकिस्तानी विदेशी आतंकी यासिर को मार गिराया था।

उस समय के खुफिया रिकॉर्ड्स के अनुसार मूसा उस मुठभेड़ के दौरान घने जंगलों और अंधेरे का लाभ उठाकर मौके से बच निकलने में कामयाब रहा था। इस घटना के बाद से ही सुरक्षा एजेंसियां लगातार तकनीकी निगरानी और जमीनी सूत्रों के जरिए उसकी टोह ले रही थीं। करीब तीन सप्ताह के निरंतर पीछा करने और सटीक इनपुट मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने उसे उसी इलाके में घेरकर निष्प्रभावी कर दिया।

क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन जारी

मुठभेड़ में शीर्ष लश्कर कमांडर के मारे जाने के बावजूद सुरक्षाबलों ने अभियान को समाप्त नहीं किया है। मुठभेड़ स्थल और आसपास के सघन जंगलों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान (CASO) चलाया जा रहा है।

अधिकारियों का मानना है कि मूसा के साथ इलाके में एक या दो अन्य स्थानीय गाइड या आतंकी भी मौजूद हो सकते हैं जो गोलीबारी के दौरान पीछे हट गए थे। इसके अलावा इलाके में आतंकियों द्वारा बनाए गए संभावित भूमिगत ठिकानों (हाइडआउट्स), गोला-बारूद के जखीरे और संचार उपकरणों की बरामदगी के लिए खोजी कुत्तों और ड्रोन की सहायता से चप्पे-चप्पे की पड़ताल की जा रही है।

Budgam Encounter: मध्य कश्मीर में लश्कर नेटवर्क को करारा झटका

यूसमर्ग में लश्कर कमांडर सुलेमान शाह उर्फ मूसा का खात्मा जम्मू-कश्मीर में शांति और सुरक्षा की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। विदेशी आतंकी यासिर के बाद मूसा के मारे जाने से यह सिद्ध होता है कि सुरक्षाबलों का संयुक्त खुफिया और परिचालन तंत्र ऊंचाई वाले जंगलों में भी आतंकियों को सुरक्षित ठिकाना नहीं बनाने दे रहा है।

इस सफल कार्रवाई ने आतंकी संगठनों की कश्मीर घाटी में पुनर्संगठित होने की कोशिशों पर पानी फेर दिया है। सुरक्षा एजेंसियां अब इस अभियान से जुड़े तकनीकी डेटा और इनपुट्स का विश्लेषण कर रही हैं ताकि मूसा के भूमिगत सहयोगियों (ओवरग्राउंड वर्कर्स) के तंत्र को भी पूरी तरह से ध्वस्त किया जा सके।

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