Bihar Weather Update: बिहार में 22 अगस्त से फिर बरसेगा बदरा, किसानों के लिए मौसम विभाग ने जारी की खास सलाह

Bihar Weather Update: बिहार में 22 अगस्त से फिर बरसेगा बदरा, किसानों के लिए मौसम विभाग ने जारी की खास सलाह

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Bihar Weather Update: मॉनसून के तीसरे महीने यानी अगस्त की विदाई से पहले मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से सूबे के कई हिस्सों में बारिश का दौर धीमा पड़ने के कारण किसानों की चिंताएं बढ़ने लगी थीं, लेकिन अब मौसम विभाग ने बड़ी राहत की खबर दी है। राज्य में 22 अगस्त से 26 अगस्त के बीच एक बार फिर झमाझम बारिश होने के पूरे आसार बन गए हैं। इस दौरान खासकर उत्तरी बिहार के जिलों में बादलों की सक्रियता बढ़ने से भारी से अत्यंत भारी बारिश की संभावना जताई जा रही है, जिससे धान की फसलों को नया जीवन मिलने की पूरी उम्मीद है।
मौसम में आ रहे इस बड़े बदलाव को लेकर कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। खरीफ सीजन में धान की रोपनी के बाद जिन इलाकों में पानी की कमी महसूस हो रही थी, वहां यह मानसूनी बारिश संजीवनी साबित होगी। हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि अत्यधिक नमी और बारिश के कारण फसलों में कीटों के लगने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिसके प्रति किसानों को अभी से पूरी तरह सतर्क रहने की जरूरत है।

Bihar Weather Update: मॉनसून द्रोणी रेखा का रुख और बारिश का गणित

मौसम विज्ञान केंद्र पटना से मिली जानकारी के अनुसार, इस समय मॉनसून की द्रोणी रेखा अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसक रही है। यह प्रभावी सिस्टम गंगानगर, नारनौल, सतना और उत्तर छत्तीसगढ़ के पास बने निम्न दबाव के क्षेत्र से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ है। इसके असर से अगले कुछ दिनों में यह उत्तर बिहार के ऊपर से गुजरेगी, जिससे नमी से भरी हवाएं सीधे सूबे के उत्तरी छोर को प्रभावित करेंगी।
आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में अब तक सामान्य से कुछ कम बारिश दर्ज की गई है, जिसके चलते इस नए स्पेल से उस कमी को पूरा करने में काफी मदद मिलेगी। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार और उनके आसपास के जिलों में गरज के साथ बादलों की भारी आवाजाही देखने को मिलेगी। इस मानसूनी सक्रियता का असर पूरे राज्य के कृषि परिदृश्य पर सकारात्मक रूप से पड़ने की पूरी संभावना है।

कृषि वैज्ञानिकों की किसानों को जरूरी सलाह

इस आगामी मानसूनी बारिश को ध्यान में रखते हुए डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वरीय वैज्ञानिक सह नोडल पदाधिकारी डॉ अब्दुस सत्तार ने किसानों के लिए खास दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उनका कहना है कि जो धान की फसलें बीस से पच्चीस दिन की हो चुकी हैं, उनमें प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पैंतीस किलो नेत्रजन का छिड़काव करना बेहद फायदेमंद साबित होगा। इसके साथ ही, किसानों को अपने खेतों में जल निकासी का उचित प्रबंध रखने की भी सलाह दी गई है, ताकि भारी बारिश की स्थिति में पानी ज्यादा दिनों तक जमा न रहे।
इसके अलावा, अगात धान की फसल और मक्का की खड़ी फसलों में तना छेदक कीट लगने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे लगातार अपने खेतों की निगरानी करते रहें ताकि किसी भी कीट के शुरुआती लक्षण दिखते ही उसका समय पर उपचार किया जा सके। खेतों में जरा सी भी लापरवाही पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है।

Bihar Weather Update: सब्जी की फसलों और मक्का की सुरक्षा

धान और मक्का के अलावा सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को भी इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। सब्जी की नर्सरी में इस दौरान लाही, सफेद मक्खी और अन्य चूसक कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ सकता है। यदि फसलों पर इस तरह के कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत सतर्क होकर अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसान किसी भी बीमारी के लक्षण मिलने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह से इमिडाक्लोप्रिड दवा को निर्धारित मात्रा में पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इसके अलावा, इस समय राज्य में पशुओं में लंपी स्किन रोग का खतरा भी मंडरा रहा है, जिससे बचाने के लिए गायों और अन्य दुधारू पशुओं को समय पर गोट पॉक्स वैक्सीन का टीका जरूर लगवा देना चाहिए। वृक्षारोपण के लिए भी यह समय काफी अनुकूल माना जा रहा है।
मौजूदा वक्त में मौसम की यह चाल खेती-किसानी से जुड़े हर परिवार के लिए एक नया संदेश लेकर आई है। प्रकृति की यह मेहरबानी तभी पूरी तरह सार्थक हो सकती है जब किसान भाई वैज्ञानिक सलाह और आधुनिक तरीकों का सही तालमेल बिठाकर चलें। आने वाले दिनों में बादलों की यह आवाजाही सूबे के कृषि विकास को एक नई गति प्रदान करेगी, जिस पर हर अन्नदाता की निगाहें टिकी हुई हैं। मामले की आगे की अपडेट्स और मानसूनी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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