Bihar Pink Bus: बिहार में महिला सशक्तिकरण की नई उड़ान, संविदा पर पिंक बसें चलाएंगी महिला ड्राइवर, 5 जून तक कर सकेंगे आवेदन
Bihar Pink Bus: बिहार में पिंक बसें चलाएंगी महिला ड्राइवर, 5 जून तक आवेदन
Bihar Pink Bus: बिहार की सड़कों पर जल्द ही महिला आत्मनिर्भरता और सुरक्षा की एक अनोखी तस्वीर दिखाई देगी, जहां भारी भरकम बसों के स्टेयरिंग पर पुरुष ड्राइवरों के बजाय महिलाएं नजर आएंगी। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) ने राज्य के विभिन्न शहरी क्षेत्रों में इस साल के अंत तक पिंक बसों का दायरा बढ़ाने का एक बड़ा फैसला लिया है। परिवहन विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद यह तय किया गया है कि अब इन विशेष पिंक बसों के परिचालन की कमान पूरी तरह से संविदा पर बहाल होने वाली महिला चालकों के हाथों में सौंपी जाएगी। इसके लिए निगम ने आधिकारिक तौर पर राज्य के सभी जिलों से इच्छुक महिला बस ड्राइवरों से आवेदन आमंत्रित करना शुरू कर दिया है, जिसकी अंतिम तारीख 5 जून निर्धारित की गई है।
Bihar Pink Bus: पटना समेत छह प्रमंडलों में पहले से दौड़ रही हैं सीएनजी पिंक बसें
बिहार में महिलाओं के सफर को सुरक्षित और सुगम बनाने की कवायद कोई नई नहीं है, बल्कि इसका पहला चरण पहले से ही जमीन पर सफलतापूर्वक काम कर रहा है। राजधानी पटना समेत राज्य के 6 बड़े प्रमंडलों में सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) से चलने वाली पिंक बसें पहले से ही सड़कों पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। इन बसों को विशेष रूप से महिला यात्रियों की सुरक्षा और सहूलियत को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जिसके भीतर का माहौल महिलाओं के अनुकूल रहता है।
अगर मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो इस समय पटना प्रमंडल में सबसे ज्यादा 30 पिंक बसें रूटों पर चल रही हैं। इसके बाद औद्योगिक और शैक्षणिक हब माने जाने वाले मुजफ्फरपुर प्रमंडल में 20 बसें, धार्मिक नगरी गयाजी में 15 बसें, मिथिलांचल के केंद्र दरभंगा में 15 बसें, सिल्क सिटी भागलपुर में 10 बसें और सीमांचल के पूर्णिया प्रमंडल में 10 पिंक बसें अपनी सेवाएं दे रही हैं। इन प्रमंडलों के बस स्टैंडों और शहरी रूटों पर रोजाना हजारों की संख्या में कामकाजी महिलाएं, छात्राएं और आम गृहिणियां बेहद सुरक्षित माहौल में सफर कर रही हैं। अब परिवहन निगम इन्हीं प्रमंडलों के साथ-साथ अन्य छोटे शहरों में भी नेटवर्क का विस्तार करने जा रहा है, जिसके लिए बड़े पैमाने पर महिला ड्राइवरों की जरूरत महसूस की जा रही है।
क्या है आवेदन की जरूरी योग्यता और उम्र सीमा के कड़े नियम
परिवहन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए महिला उम्मीदवारों के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना अनिवार्य है। भर्ती के नियमों को इस तरह लचीला बनाया गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को रोजगार के मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। वे महिलाएं जो पहले से ही लाइट मोटर व्हीकल (एलएमवी) यानी कार या छोटी गाड़ियां चलाने का कम से कम एक साल का अनुभव रखती हैं, वे भी इस भारी वाहन (एचएमवी) चालक प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए आवेदन करने की पात्र मानी गई हैं।
आवेदक महिला चालकों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष तय की गई है। इस उम्र सीमा के भीतर आने वाली कोई भी इच्छुक महिला अपने संबंधित जिले के परिवहन कार्यालय या निगम की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से 5 जून तक अपना फॉर्म जमा कर सकती है। इस कदम से ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों की उन महिलाओं को आगे आने का मौका मिलेगा जो पारंपरिक नौकरियों से हटकर कुछ अलग करना चाहती हैं।
चार हफ्तों की होगी ट्रेनिंग और निगम दिलाएगा हैवी व्हीकल लाइसेंस
आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्क्रूटनी में सही पाए गए सभी फॉर्म्स के आधार पर महिला ड्राइवरों का चयन किया जाएगा। इन चयनित महिलाओं को सीधे सड़कों पर बस सौंपने के बजाय परिवहन निगम की देखरेख में बेहद पेशेवर और आधुनिक तरीके से प्रशिक्षित किया जाएगा। विभाग के शेड्यूल के मुताबिक, इन महिला चालकों की विशेष ट्रेनिंग 20 जून से शुरू होने जा रही है। इस पूरी ट्रेनिंग की अवधि चार सप्ताह यानी लगभग एक महीने की होगी, जिसमें उन्हें भारी वाहन चलाने के सभी तकनीकी गुर, ट्रैफिक नियम और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के तौर-तरीके सिखाए जाएंगे।
ट्रेनिंग प्रोग्राम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एलएमवी लाइसेंस धारक महिलाओं को हैवी मोटर व्हीकल (एचएमवी) श्रेणी में अपग्रेड होने के लिए परिवहन निगम अपनी तरफ से पूरा प्रशासनिक और तकनीकी सहयोग देगा। एक महीने के इस कड़े प्रशिक्षण सत्र के बाद महिलाओं को एचएमवी लाइसेंस के लिए होने वाली आधिकारिक परीक्षा में शामिल होना होगा। परीक्षा को सफलतापूर्वक पास करने वाली सभी योग्य महिला चालकों को बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की पिंक बसों में संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर नियमित नियोजन पत्र सौंप दिया जाएगा, जिससे उन्हें एक निश्चित मासिक आमदनी की गारंटी मिलेगी।
जिस शहर से आएंगे सबसे ज्यादा आवेदन वहीं से शुरू होंगी नई बसें
परिवहन विभाग के सचिव राजकुमार ने इस पूरे घटनाक्रम और विभागीय योजना के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है। उनका कहना है कि राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य बिहार के हर छोटे-बड़े शहर में पिंक बसों का जाल बिछाना है, ताकि किसी भी कोने में रहने वाली महिला को सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते समय असुरक्षा का थोड़ा भी अहसास न हो। इसी सोच को धरातल पर उतारने के लिए विभाग ने पहली बार महिला बस ड्राइवरों के लिए इतनी बड़ी वैकेंसी निकाली है।
सचिव राजकुमार ने एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसले का खुलासा करते हुए बताया कि नई पिंक बसों के रूट और शहरों का चयन पूरी तरह से आवेदनों की संख्या पर निर्भर करेगा। राज्य के जिन जिलों या शहरों से महिलाओं के सबसे अधिक आवेदन प्राप्त होंगे, विभाग प्राथमिकता के आधार पर उन्हीं शहरों को चिन्हित कर वहां नई पिंक बसों की खेप भेजेगा। इस व्यवस्था से जिलों के बीच एक सकारात्मक प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया पर भी परिवहन विभाग के इस फैसले की जमकर तारीफ हो रही है और विभिन्न महिला स्वयं सहायता समूहों (जीविका दीदी) के बीच इस जानकारी को तेजी से साझा किया जा रहा है।
Bihar Pink Bus: महिला यात्रियों की सुरक्षा और आत्मनिर्भर बिहार का नया मॉडल
इस योजना का व्यापक असर केवल रोजगार सृजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके सामाजिक प्रभाव बहुत गहरे हैं। जब बस की कमान एक महिला के हाथ में होगी, तो बस के भीतर सफर करने वाली अन्य महिला यात्रियों का आत्मविश्वास और सुरक्षा का भाव कई गुना बढ़ जाएगा। अक्सर देर शाम या रात के समय सफर करने वाली महिलाओं को जिन असुविधाओं और डरों का सामना करना पड़ता था, वह समस्या इस मॉडल से पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
बिहार सरकार का यह कदम राज्य को महिला सशक्तिकरण के मामले में देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा करता है। दिसंबर तक राज्य के कोने-कोने में पिंक बसों का परिचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, जो यह दर्शाता है कि प्रशासनिक अमला इस योजना को लेकर पूरी तरह गंभीर है। 5 जून तक मिलने वाले आवेदनों की समीक्षा के बाद परिवहन विभाग ट्रेनिंग सेंटरों की सूची और अन्य दिशा-निर्देश जारी करेगा। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि बिहार की ये जांबाज महिलाएं किस तरह भारी बसों को संभालते हुए विकास की रफ्तार को आगे बढ़ाती हैं।
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