दिल्ली का मुंडका-बक्कर वाला टोल प्लाजा हुआ पूरी तरह बैरियर-फ्री, MLFF तकनीक से बिना रुके कटेगा टोल, 2027 तक देशभर के हाईवे होंगे स्मार्ट और जाममुक्त

MLFF तकनीक से बिना रुके कटेगा टोल, जाम और ईंधन खर्च में होगी भारी बचत

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MLFF Toll System: भारतीय राजमार्गों पर यात्रा को अधिक तेज, सुगम, आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक तकनीकी कदम उठाया गया है। दिल्ली का व्यस्त रहने वाला मुंडका-बक्कर वाला टोल प्लाजा अब पूरी तरह से बैरियर-फ्री (अवरोध मुक्त) हो गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 12 मई को अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-2) पर स्थित इस महत्वपूर्ण टोल प्लाजा पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम की औपचारिक शुरुआत की। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब वाहन चालकों को टोल टैक्स का भुगतान करने के लिए अपनी गाड़ियों को रोकने या धीमा करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ेगी। अब गाड़ियां हाईवे की अपनी सामान्य रफ्तार यानी 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे को बनाए रखते हुए बेहद आसानी से प्लाजा को पार कर सकेंगी।

यह दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र का पहला और पूरे देश का दूसरा बैरियर-फ्री टोल प्लाजा बन गया है। इससे पहले गुजरात के चोर्यासी टोल प्लाजा पर इस अत्याधुनिक तकनीक का सफल परीक्षण किया जा चुका है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के इस बड़े तकनीकी कदम से न केवल रोजाना सफर करने वाले मुसाफिरों के कीमती समय और ईंधन की भारी बचत होगी, बल्कि पीक आवर्स के दौरान टोल प्लाजा पर लगने वाली वाहनों की किलोमीटर लंबी कतारों और ट्रैफिक जाम की समस्या से भी हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह तकनीक कैसे काम करती है, इसके आर्थिक-पर्यावरण लाभ क्या हैं और देशव्यापी स्तर पर इसे लेकर क्या योजनाएं हैं।

MLFF Toll System: अत्याधुनिक मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम की तकनीकी कार्यप्रणाली

मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) एक उच्च स्तरीय और स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली है, जो पूरी तरह से डिजिटल गवर्नेंस पर आधारित है। इस सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों और मौजूदा फास्टैग (FASTag) तकनीक का एक बेहतरीन तकनीकी संयोजन किया गया है। जब कोई भी वाहन हाईवे की सामान्य या तेज गति से टोल प्लाजा के नीचे लगे गेंट्री (लोहे के ऊंचे ढांचे) के पास से गुजरता है, तो वहां लगे हाई-स्पीड कैमरे और सेंसर्स पलक झपकते ही वाहन की नंबर प्लेट और फास्टैग को स्कैन कर लेते हैं। इसके बाद सिस्टम पूरी तरह से ऑटोमैटिक तरीके से वाहन के लिंक्ड बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट से निर्धारित टोल राशि काट लेता है और वाहन बिना रुके आगे बढ़ जाता है।

इस पारदर्शी सिस्टम में मानवीय हस्तक्षेप लगभग शून्य है। यदि किसी स्थिति में वाहन के फास्टैग में पर्याप्त बैलेंस नहीं है या कोई अन्य तकनीकी गड़बड़ी सामने आती है, तो भी वाहन को रोका नहीं जाएगा ताकि पीछे आ रही गाड़ियों की रफ्तार प्रभावित न हो। ऐसी स्थिति में सिस्टम वाहन मालिक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक ‘ई-नोटिस’ (डिजिटल चालान) जारी करेगा, जिसके तहत चालक को अगले 72 घंटे के भीतर ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से टोल राशि का भुगतान करना होगा। निर्धारित समय में भुगतान न करने पर नियमानुसार जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया गया है। यह व्यवस्था टोल संग्रह में पारदर्शिता लाने के साथ-साथ टोल चोरी की घटनाओं पर भी पूरी तरह से रोक लगाएगी।

नितिन गडकरी का विजन: सालाना ₹6,000 करोड़ की बचत और पर्यावरण का संरक्षण

टोल प्लाजा के उद्घाटन के अवसर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस तकनीक के बड़े आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों को देश के सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि देशभर के सभी मुख्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर चरणबद्ध तरीके से MLFF सिस्टम लागू होने के बाद टोल प्लाजा के परिचालन और रख-रखाव पर होने वाले खर्च में सालाना लगभग ₹6,000 करोड़ की सीधी बचत होगी। इसके अलावा, गाड़ियों के न रुकने के कारण देश के हजारों करोड़ रुपये के डीजल, पेट्रोल और सीएनजी की बचत होगी, जिससे भारत के कच्चे तेल के आयात बिल को कम करने में मदद मिलेगी।

केवल मुंडका-बक्कर वाला टोल प्लाजा की बात करें तो इस अकेले बैरियर-फ्री सिस्टम की वजह से सालाना लगभग ₹285 करोड़ मूल्य के ईंधन की बचत होने का अनुमान लगाया गया है। इसके साथ ही, गाड़ियों के स्टार्ट मोड में खड़े रहने से होने वाले प्रदूषण में भी भारी गिरावट आएगी, जिससे इस क्षेत्र में सालाना 81,000 टन कार्बन उत्सर्जन (Carbon Footprint) कम होगा। गडकरी ने जोर देकर कहा कि यह इंफ्रास्ट्रक्चर देश की लॉजिस्टिक्स लागत (Logistics Cost) को कम करने में एक गेम-चेंजर साबित होगा, जिससे भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।

देशव्यापी विस्तार का खाका: 2027 तक बदल जाएगा राजमार्गों का स्वरूप

NHAI के चेयरमैन संतोष कुमार यादव के अनुसार, मुंडका-बक्कर वाला प्लाजा की सफलता को देखते हुए इस तकनीक के देशव्यापी विस्तार का एक विस्तृत टाइमलाइन तैयार किया गया है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के प्रथम चरण में देश के 9 प्रमुख राज्यों के 17 व्यस्ततम टोल प्लाजा को पूरी तरह से बैरियर-फ्री बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इन राज्यों में गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और असम जैसे आर्थिक रूप से सक्रिय राज्य शामिल हैं। विभाग की योजना इन सभी 17 प्लाजा को सितंबर 2026 तक पूरी तरह से MLFF तकनीक से लैस करने की है।

परियोजना के दूसरे चरण के तहत, मार्च 2027 तक देश के 108 से अधिक मुख्य टोल प्लाजा को इस व्यवस्था से जोड़ दिया जाएगा। वर्तमान में NHAI पूरे देश में लगभग 1,100 से अधिक टोल प्लाजा का संचालन करता है, और दीर्घकालिक लक्ष्य यह है कि वर्ष 2027-28 के अंत तक देश के अधिकांश प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे को पूरी तरह से कैशलेस, स्मार्ट और बैरियर-फ्री बना दिया जाए। भविष्य में इन कैमरों और सेंसर्स को 5G कनेक्टिविटी और एडवांस्ड एआई एनालिटिक्स से भी जोड़ा जाएगा, जिससे हाईवे सुरक्षा, स्पीड मॉनिटरिंग और आपातकालीन चिकित्सा सहायता (Emergency Response) में भी मदद मिलेगी।

निष्कर्ष: आर्थिक प्रगति और ‘स्मार्ट इंडिया’ का नया मील का पत्थर

निष्कर्षतः, दिल्ली के मुंडका-बक्कर वाला टोल प्लाजा का बैरियर-फ्री होना भारतीय सड़क परिवहन और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के इतिहास में एक नया मील का पत्थर है। भारत वर्तमान में अपनी लॉजिस्टिक्स लागत को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 14% से घटाकर 8 से 9 प्रतिशत के वैश्विक स्तर पर लाने का प्रयास कर रहा है, और MLFF जैसी आधुनिक डिजिटल प्रणालियां इसी आर्थिक विजन को धरातल पर उतारने का काम कर रही हैं।

हालांकि, इस सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने के लिए शुरुआती स्तर पर आम जनता के बीच फास्टैग को हमेशा रिचार्ज रखने और डिजिटल पेमेंट नियमों को लेकर जागरूकता बढ़ाना एक चुनौती होगी, जिसके लिए NHAI बड़े पैमाने पर अभियान चला रहा है। बिना रुके, बिना जाम के और न्यूनतम प्रदूषण वाली यह बाधारहित यात्रा तकनीक और विकास के सामंजस्य का एक आदर्श उदाहरण है, जो नए भारत के ‘स्मार्ट हाईवे’ के सपने को पूरी तरह साकार कर रही है।read more here

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