Bihar News: पप्पू यादव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई, श्रीकृष्ण पर टिप्पणी को लेकर विवाद
Bihar News: पप्पू यादव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई, श्रीकृष्ण पर टिप्पणी को लेकर विवाद
Bihar News: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की एक रामकथा के दौरान की गई टिप्पणी को लेकर विवाद बढ़ गया है। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव मंगलवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे और शास्त्री के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने एफआईआर दर्ज करने की मांग की। मामला मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित कथा का है, जहां शास्त्री ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की तुलना की थी। बाद में शास्त्री ने सफाई देते हुए माफी मांगी।
पप्पू यादव ने क्या कहा और शिकायत में क्या लिखा?
पप्पू यादव ने थाने पहुंचने से पहले सोशल मीडिया पर लिखा कि भगवान श्रीकृष्ण का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह शिकायत दर्ज कराने जा रहे हैं और माफी मांगने से काम नहीं चलेगा। थाने में उन्होंने धार्मिक भावनाएं आहत करने और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने के आरोप में सख्त कार्रवाई की मांग की। यादव ने कहा कि शास्त्री ने 140 करोड़ लोगों की भावनाएं ठेस पहुंचाई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले धर्म को बांटा जा रहा था और अब धर्म के अंदर भी बांटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृष्ण हमारे गुरु हैं और ऐसे बयानों पर कानून लागू होना चाहिए।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कथा में क्या कहा था?
29 अक्टूबर को करैरा में रामकथा के दौरान शास्त्री ने श्रीराम और श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना की। उन्होंने कहा कि श्रीराम सीधे खड़े होते हैं, जबकि श्रीकृष्ण तीन जगह से टेढ़े होकर खड़े होते हैं। उन्होंने त्रिभंग मुद्रा, बांसुरी और वृंदावन का जिक्र करते हुए अयोध्या और वृंदावन की भी तुलना की। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मथुरा-वृंदावन के संतों और कृष्ण भक्तों ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि दोनों देव समान रूप से पूजनीय हैं और इस तरह की तुलना उचित नहीं।
शास्त्री ने क्या सफाई दी?
विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने केन्या के नैरोबी से वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि उनकी मंशा श्रीराम और श्रीकृष्ण के बीच कोई अंतर बताने की नहीं थी। टिप्पणी भक्ति परंपरा और ब्रज की प्रेमपूर्ण अभिव्यक्ति के संदर्भ में थी। उन्होंने कहा कि दोनों एक ही परम सत्ता के स्वरूप हैं। शास्त्री ने स्वयं को श्रीकृष्ण का भक्त बताया और कहा कि वह भागवत कथा भी करते हैं। उन्होंने कहा कि भावावेश में कही गई बात से यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे क्षमा चाहते हैं।
अन्य नेताओं की क्या प्रतिक्रिया रही?
इस विवाद पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मानवीय भूलों के लिए माफी हो सकती है, लेकिन ईशनिंदा के लिए नहीं। उन्होंने ऐसे लोगों पर आजीवन प्रतिबंध और कार्यक्रमों के बहिष्कार की मांग की। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने भी टिप्पणी की आलोचना की। कुछ संतों और संगठनों ने भी आपत्ति दर्ज कराई। दूसरी तरफ शास्त्री के समर्थकों ने कहा कि बातों का गलत अर्थ निकाला गया है।
इस विवाद का क्या मतलब है?
यह मामला धार्मिक कथाओं में की गई टिप्पणियों और उनकी व्याख्या को लेकर बहस खड़ी करता है। पप्पू यादव की शिकायत के बाद पुलिस आगे क्या कार्रवाई करती है, यह देखना बाकी है। शास्त्री ने माफी मांगी है, लेकिन आलोचक इसे पर्याप्त नहीं मान रहे। धार्मिक भावनाओं से जुड़े मुद्दों पर बयानों की सावधानी और स्पष्टता महत्वपूर्ण मानी जाती है। फिलहाल यह विवाद राजनीतिक और धार्मिक दोनों हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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