Bihar Flood Relief: बाढ़ प्रभावित किसानों को मिलेगा ₹22,500 तक कृषि इनपुट अनुदान, 29 सितंबर तक आवेदन

18 जिलों की 653 पंचायतों के पात्र किसान 29 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे

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Bihar Flood Relief: अगस्त माह के अंतिम सप्ताह में अप्रत्याशित मानसूनी अतिवृष्टि और गंगा, कोसी, गंडक समेत विभिन्न नदियों के उफान से फसलों को हुए व्यापक नुकसान के बाद बिहार सरकार ने प्रभावित अन्नदाताओं को संबल प्रदान करने के लिए राहत प्रक्रिया युद्धस्तर पर प्रारंभ कर दी है। आपदा प्रबंधन विभाग और कृषि विभाग के संयुक्त सर्वेक्षण के उपरांत राज्य के 18 जिलों के 84 प्रखंडों की 653 चिन्हित पंचायतों के पीड़ित किसानों के लिए ‘कृषि इनपुट अनुदान योजना’ (Agri Input Subsidy Scheme) के तहत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया बुधवार, 23 सितंबर 2026 से आधिकारिक रूप से खोल दी गई है।

प्राकृतिक आपदा की मार झेलने वाले पात्र किसानों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 29 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली के माध्यम से राहत राशि सीधे लाभार्थी किसानों के आधार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से जुड़े बैंक खातों में प्रेषित की जाएगी। इस योजना के अंतर्गत फसलों के प्रकार और सिंचाई की उपलब्धता के आधार पर किसानों को न्यूनतम 1,000 रुपये से लेकर अधिकतम 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

Bihar Flood Relief: 18 जिलों के 84 प्रखंडों में फसल क्षति राहत का दायरा

अगस्त 2026 के अंतिम दिनों में आई बाढ़ के कारण खेतों में जलभराव होने से खरीफ की प्रमुख फसलें, विशेषकर धान, मक्का, मौसमी सब्जियां और गन्ना जलमग्न होकर नष्ट हो गई थीं। राज्य सरकार के निर्देश पर कृषि समन्वयकों और राजस्व कर्मचारियों की टीमों ने धरातल पर जाकर फसल नुकसान का वैज्ञानिक सर्वेक्षण संपन्न किया।

इस सर्वेक्षण के आधार पर गंभीर रूप से जलप्लावन प्रभावित 18 जिलों की 653 पंचायतों को आधिकारिक सूची में शामिल किया गया है। कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर आवेदन करने से पूर्व प्रत्येक किसान को अपनी पंचायत की पात्रता सूची अवश्य जांच लेनी चाहिए, क्योंकि यह विशेष राहत पैकेज केवल बाढ़ से विधिवत अधिसूचित पंचायतों के निवासियों के लिए ही प्रभावी है।

प्रति हेक्टेयर अनुदान का वित्तीय ढांचा: असिंचित से लेकर बहुवर्षीय फसलों की दरें

राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन मानकों के अनुरूप विभिन्न फसल श्रेणियों के लिए इनपुट सब्सिडी की पारदर्शी दरें तय की हैं। वर्षाश्रित अथवा असिंचित फसल क्षेत्र के नुकसान पर 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं सुनिश्चित सिंचाई सुविधा वाले सिंचित क्षेत्र में फसल बर्बादी के लिए यह अनुदान राशि 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है।

बारहमासी अथवा बहुवर्षीय फसलों, जिनमें गन्ना, केला, पपीता और विभिन्न औषधीय व सुगंधित पौधों की खेती शामिल है, के लिए सर्वाधिक 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान देय होगा। योजना के तहत सीमांत और छोटे किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए न्यूनतम देय सीमा भी तय की गई है। असिंचित क्षेत्र के लिए न्यूनतम 1,000 रुपये, सिंचित क्षेत्र के लिए न्यूनतम 2,000 रुपये और बहुवर्षीय फसलों के लिए न्यूनतम 2,500 रुपये की राहत राशि प्रत्येक दशा में प्रदान की जाएगी।

अधिकतम दो हेक्टेयर की सीमा और किसान परिवार की विधिक परिभाषा

कृषि इनपुट अनुदान का लाभ प्राप्त करने के लिए भू-क्षेत्रफल की अधिकतम सीमा दो हेक्टेयर (लगभग 494 डिसमिल) निर्धारित की गई है। अर्थात यदि किसी किसान का दो हेक्टेयर से अधिक रकबा भी बाढ़ में नष्ट हुआ है, तो भी सरकारी नियमों के तहत वित्तीय सहायता अधिकतम दो हेक्टेयर के दायरे तक ही सीमित रहेगी।

योजना का लाभ ‘किसान परिवार’ की इकाई के आधार पर स्वीकृत किया जाएगा। आधिकारिक प्रावधानों के अनुसार किसान परिवार में स्वयं किसान, उसकी पत्नी और उनके अवयस्क बच्चों को सम्मिलित माना गया है। परिवार के किसी एक ही वयस्क सदस्य के नाम पर आवेदन स्वीकार्य होगा। आवेदन के दौरान परिवार के सभी सदस्यों का विवरण दर्ज करना अनिवार्य है, जिसका जनसांख्यिकी सत्यापन आधार डेटाबेस के जरिए स्वतः किया जाएगा ताकि दोहरे लाभ की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो सके।

रैयत और गैर-रैयत खेतिहरों के लिए आवश्यक दस्तावेज

योजना की सबसे व्यावहारिक विशेषता यह है कि इसमें वास्तविक रूप से खेती करने वाले भू-स्वामी (रैयत) और बटाईदार या वास्तविक खेतिहर (गैर-रैयत) दोनों वर्गों को शामिल किया गया है। रैयत किसानों को आवेदन करते समय अपनी कृषि भूमि से जुड़े अद्यतन दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे, जिसमें वित्तीय वर्ष 2024-25 से लेकर अब तक की ऑनलाइन मालगुजारी रसीद अथवा अद्यतन भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र (LPC) मान्य होगा।

गैर-रैयत या वास्तविक खेतिहर किसानों को जमीन की रसीद के स्थान पर निर्धारित प्रारूप में स्व-घोषणा प्रमाण पत्र (Self-Declaration) संलग्न करना होगा। इस स्व-घोषणा पत्र पर संबंधित वार्ड सदस्य और कृषि समन्वयक द्वारा सत्यापन की मुहर आवश्यक होती है। यदि कोई किसान अपनी निजी भूमि के साथ-साथ बटाई पर भी खेती करता है, तो उसे दोनों श्रेणियों का चयन करते हुए भूमि रसीद और स्व-घोषणा पत्र दोनों प्रस्तुत करने की छूट दी गई है।

डीबीटी और बैंक खाते की एनपीसीआई लिंकिंग अनिवार्य

पारदर्शिता सुनिश्चित करने और बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करने के लिए संपूर्ण अनुदान राशि का हस्तांतरण केवल आधार-सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) और डीबीटी के माध्यम से किया जाएगा। कृषि विभाग ने सख्त हिदायत दी है कि किसान यह सुनिश्चित करें कि उनका बैंक खाता सक्रिय हो और वह नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के मैपर पर उनके आधार नंबर के साथ विधिवत लिंक (DBT Enabled) हो।

यदि किसी किसान का बैंक खाता एनपीसीआई से लिंक नहीं होगा, तो आवेदन स्वीकृत होने के बावजूद वित्तीय लेनदेन विफल हो जाएगा। ऐसी स्थिति से बचने के लिए किसानों को तुरंत अपनी बैंक शाखा अथवा नजदीकी ग्राहक सेवा केंद्र (CSP) पर जाकर खाता सत्यापन और आधार सीडिंग की स्थिति दुरुस्त कराने का परामर्श दिया गया है।

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और आधिकारिक हेल्पलाइन

आवेदन की संपूर्ण प्रक्रिया को डिजिटल रखा गया है। पंजीकृत किसान सीधे कृषि विभाग के आधिकारिक डीबीटी पोर्टल पर जाकर अपने 13 अंकों के किसान पंजीकरण संख्या के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन पत्र भरते समय पंजीकृत मोबाइल नंबर पर वन-टाइम पासवर्ड (OTP) प्राप्त होगा, जिसे दर्ज करने के बाद ही आवेदन अंतिम रूप से सबमिट होगा।

आवेदन करते समय प्रभावित फसल का नाम, कुल बोया गया रकबा, क्षतिग्रस्त रकबा और भूमि का खाता-खेसरा नंबर सावधानीपूर्वक दर्ज करना आवश्यक है। किसी भी प्रकार की तकनीकी कठिनाई, पात्रता संबंधी शंका या प्रक्रियागत समस्या के समाधान के लिए कृषि विभाग ने राज्य स्तरीय टोल-फ्री किसान हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1551 जारी किया है। इसके अतिरिक्त किसान अपने संबंधित प्रखंड कृषि पदाधिकारी (BAO) या जिला कृषि पदाधिकारी (DAO) से भी सीधा संपर्क स्थापित कर सकते हैं।

Bihar Flood Relief: निष्कर्ष

अगस्त की बाढ़ ने बिहार के कृषि परिदृश्य और किसानों की अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई थी। ऐसे संकट के समय राज्य सरकार द्वारा 23 सितंबर से प्रारंभ की गई यह इनपुट सब्सिडी प्रक्रिया किसानों को आगामी रबी सीजन की बुवाई के लिए आवश्यक खाद, बीज और कीटनाशकों की व्यवस्था करने में सहायक सिद्ध होगी। 29 सितंबर की समयसीमा अत्यंत सीमित है, अतः सभी बाढ़ प्रभावित पात्र किसानों के लिए यह आवश्यक है कि वे बिना अंतिम तिथि की प्रतीक्षा किए अविलंब अपने वैध दस्तावेजों के साथ आवेदन संपन्न करें ताकि राहत राशि का त्वरित अंतरण संभव हो सके।

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