Bihar Daroga Recruitment 2026: मेंस रद्द होने पर पटना में प्रदर्शन, 1,799 पदों का भविष्य अटका
Bihar Daroga Recruitment 2026: मेंस रद्द होने पर पटना में प्रदर्शन, 1,799 पदों का भविष्य अटका
आयोग ने मेंस 27 मई 2026 को दो पारियों में कराई थी और रिजल्ट 19 जून को जारी किया था। करीब तीन महीने बाद 23 सितंबर को परीक्षा “अपरिहार्य कारणों” से रद्द कर दी गई। नई तारीख अलग से बताए जाने की बात कही गई, लेकिन विस्तृत वजह सार्वजनिक नोटिस में साफ नहीं हुई। इसी अनिश्चितता ने विरोध बढ़ाया है।
Bihar Daroga Recruitment 2026: मेंस परीक्षा कब हुई और रद्द क्यों की गई?
प्रारंभिक परीक्षा जनवरी 2026 में हुई थी। मेंस में सफल अभ्यर्थी जून से फिजिकल टेस्ट की तैयारी कर रहे थे। 23 सितंबर को BPSSC ने नोटिस जारी कर 27 मई की दोनों पालियों की मुख्य लिखित परीक्षा रद्द कर दी। आयोग का कहना है कि फैसला अपरिहार्य कारणों से लिया गया, ताकि भर्ती निष्पक्ष रहे। कुछ रिपोर्टों में परीक्षा के दिन सॉल्वर सिंडिकेट को लेकर प्राथमिकी और कुछ केंद्रों पर लगातार सीटों पर सफल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या को लेकर सवाल उठने का जिक्र है। आयोग ने इन आरोपों का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नोटिस में नहीं दिया। उम्मीदवार पूछ रहे हैं कि अगर अनियमितता थी तो जांच और दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और पूरे मेंस को रद्द करने में रिजल्ट के तीन महीने बाद तक इंतजार क्यों किया गया।
पटना में मार्च कहां रुका और उम्मीदवार क्या कह रहे हैं?
प्रदर्शनकारियों ने तिरंगा, बैनर और पोस्टर लेकर गांधी मैदान से कूच किया। नारे में BPSSC की विश्वसनीयता पर सवाल थे। पुलिस ने जेपी गोलंबर पर रास्ता रोका। कुछ अभ्यर्थियों का कहना है कि जून से सितंबर तक गर्मी में फिजिकल की तैयारी की, अब मेहनत व्यर्थ लग रही है। एक पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की बात भी हुई। पुलिस का कहना है कि पहले प्रतिनिधिमंडल को आयोग कार्यालय भेजा गया, शाम को मुख्यमंत्री सचिवालय तक मांग रखने का मौका दिया गया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि उन्हें पहले से रद्दीकरण की जानकारी नहीं दी गई और नोटिस अचानक आया।
उम्र सीमा और आर्थिक दबाव क्यों बड़ा मुद्दा बना?
कई अभ्यर्थियों की उम्र सीमा नजदीक है या निकल चुकी है। भर्ती में और देरी से वे अगली परीक्षा के योग्य नहीं रह सकते। तैयारी के वर्षों में परिवार ने खर्च उठाया था। मेंस रिजल्ट के बाद उम्मीद थी कि फिजिकल और दस्तावेज जांच के बाद नियुक्ति की राह खुलेगी। रद्दीकरण के बाद कोचिंग, यात्रा और दोबारा पढ़ाई का खर्च अलग चिंता है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि कथित गड़बड़ी की सजा उन सबको नहीं मिलनी चाहिए जिन्होंने मेहनत से परीक्षा दी। वे चाहते हैं कि पास नतीजे बरकरार रहें और केवल संदिग्ध मामलों की जांच हो।
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
पहली मांग 23 सितंबर के रद्दीकरण फैसले को वापस लेने की है। दूसरी, भर्ती प्रक्रिया तुरंत आगे बढ़ाने और फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट की तारीख घोषित करने की है। तीसरी, अगर परीक्षा में गड़बड़ी हुई तो दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों को दोबारा मेंस में न धकेला जाए। वे मुख्यमंत्री सचिवालय से हस्तक्षेप की भी अपील कर रहे हैं। आयोग की तरफ से नई परीक्षा की तारीख अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। जब तक शेड्यूल नहीं आता, हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में रहेगा।
आगे भर्ती प्रक्रिया पर क्या असर पड़ सकता है?
1,799 पदों की यह भर्ती बिहार पुलिस के निचले स्तर की बड़ी नियुक्तियों में गिनी जाती है। मेंस रद्द होने से प्रारंभिक परीक्षा से चुने गए हजारों अभ्यर्थियों का अगला चरण रुक गया। अगर दोबारा मेंस होती है तो तैयारी का कैलेंडर और उम्र सीमा दोनों प्रभावित होंगे। वहीं निष्पक्षता की दलील देने वाले कहते हैं कि संदेह बने रहने पर भर्ती बाद में अदालत में अटक सकती है। फिलहाल पटना में प्रदर्शन और आयोग के अगले नोटिस दोनों पर नजर है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जल्द लिखित फैसला नहीं आया तो समय, पैसा और उम्र तीनों का नुकसान होगा।
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