Rahul Gandhi ने दिल्ली पुलिस को खूब छकाया, सड़क पर बैठे, बैरिकेड पर चढ़े फिर आकाशवाणी भवन में घुसे
Rahul Gandhi ने दिल्ली पुलिस को खूब छकाया, सड़क पर बैठे, बैरिकेड पर चढ़े फिर आकाशवाणी भवन में घुसे
Rahul Gandhi: सेव डेमोक्रेसी मार्च कहां रोका गया और बैरिकेड पर क्या हुआ?
मार्च संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय की तरफ बढ़ा। पुलिस ने संसद मार्ग पर नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के बीच के हिस्से में कड़े बैरिकेड लगा दिए। मार्च रुकने के बाद राहुल गांधी सड़क पर धरने पर बैठे। इसके बाद वे अचानक बैरिकेड पर चढ़े और ऊपर खड़े होकर तिरंगा लहराया। उनके पीछे कई युवा सांसद भी बैरिकेड पर चढ़े। इस दौरान राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो, टाइम टू रिजाइन। विपक्षी नेताओं ने सीईसी के खिलाफ वोट चोर, गद्दी छोड़ जैसे नारे लगाए। विपक्ष का कहना है कि वे शांतिपूर्ण मार्च करना चाहते थे, लेकिन भारी तैनाती और बैरिकेडिंग ने स्थिति तनावपूर्ण बना दी। चुनाव आयोग का मुख्यालय आकाशवाणी भवन से करीब 270 मीटर दूर बताया गया है। मार्च वहां तक नहीं पहुंच सका।
हिरासत और बस के बाद राहुल-प्रियंका आकाशवाणी भवन में कैसे घुसे?
पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी समेत कई सांसदों को हिरासत में लिया। उन्हें बस में बिठाकर ले जाने की कोशिश हुई, लेकिन सांसदों ने बस रोक दी। इसके बाद राहुल और प्रियंका बस से उतरकर आकाशवाणी भवन के रिसेप्शन गेट से अंदर घुस गए और वहीं बैठ गए। फिलहाल दिल्ली पुलिस इन विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेना चाहती है, जबकि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस के कई नेता भवन के भीतर एक पेड़ के नीचे बैठे हैं। भवन चुनाव आयोग मुख्यालय नहीं है। विपक्ष इसी परिसर में रुककर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है। पुलिस की रोक और नेताओं के अंदर चले जाने के इस क्रम को मार्च के बीच का मोड़ माना जा रहा है।
सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग किस विवाद से जुड़ी है?
विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया में वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए और फॉर्म-6 में बदलाव किए गए। इसी को वोट चोरी का खतरा बताया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को टिप्पणी की कि उसने फॉर्म-6 का कोई संशोधित संस्करण मंजूर नहीं किया है और रिकॉर्ड जांचेगा कि बदलाव किसने और कैसे किए। इसी पृष्ठभूमि में विपक्ष ने सीईसी के इस्तीफे की मांग तेज कर दी। राहुल गांधी का सोशल मीडिया संदेश भी इस्तीफे की इसी अपील पर था। ममता बनर्जी ने कहा कि प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक सीईसी इस्तीफा नहीं देते। आरोप विपक्ष के हैं। आयोग की सफाई अलग है। अदालत की टिप्पणी फॉर्म-6 के संशोधन को लेकर है, इस्तीफे के आदेश के रूप में नहीं।
एसआईआर में 13 करोड़ नाम हटाने का आंकड़ा क्या कहता है?
चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया जून 2025 में बिहार से शुरू हुई और बाद में 30 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में फैली। आंकड़ों के अनुसार ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम एएसडीडी श्रेणी में डाल दिए गए। यह श्रेणी अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट की है। विपक्ष इसे बड़े पैमाने पर नाम काटना बता रहा है। आयोग कहता है कि यह अंतिम सूची नहीं है और छूटे मतदाताओं के लिए विशेष ड्राइव चलाई जा रही है। इसी विवाद में विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार पर भरोसा खोने का आरोप लगाया है। ड्राफ्ट सूची और अंतिम सूची का अंतर इस बहस का केंद्र है। नाम एएसडीडी में जाना अपने आप अंतिम विलोपन नहीं माना गया है, जबकि विपक्ष प्रक्रिया और फॉर्म-6 दोनों पर सवाल उठा रहा है।
Rahul Gandhi: आकाशवाणी भवन में धरना और पुलिस की तैनाती आगे क्या संकेत देती है?
नेता भवन के अंदर पेड़ के नीचे बैठे हैं और पुलिस हिरासत की कोशिश में है। मार्च चुनाव आयोग तक नहीं पहुंचा, क्योंकि बैरिकेडिंग बीच में ही रोक गई। विपक्ष शांतिपूर्ण मार्च की बात कह रहा है। पुलिस की भारी तैनाती को तनाव की वजह बताया जा रहा है। नारे, तिरंगा और इस्तीफे की अपील इसी धरने का हिस्सा रहे। प्रदर्शन ममता बनर्जी के बयान के अनुसार सीईसी के इस्तीफे तक जारी रखने की बात पर टिका है। फिलहाल राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की मौजूदगी आकाशवाणी भवन के परिसर में दर्ज है, मुख्यालय से करीब 270 मीटर दूर। आगे की स्थिति पुलिस कार्रवाई और नेताओं के वहीं रुकने पर निर्भर करेगी। एसआईआर, फॉर्म-6 और 13 करोड़ नामों वाला विवाद संसद से सड़क तक आ चुका है।
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